किसलय शानू
जेपीएससी घोटाले में शामिल कई लोगों का पहले से अपराधिक इतिहास नहीं रहा है. गिरफ्तार हुए आरोपियों में आज हम संजय कुमार, प्रदीप कुमार सिंह और रमेश कुमार की कहानी बताने जा रहे हैं. सिंडिकेट में शामिल होने से पहले संजय कुमार सऊदी अरब की एक कंपनी में बतौर डेवलपर काम कर रहा था. प्रदीप कुमार डेटा स्कैनिंग के काम में बतौर ट्रेनी से एक्सपर्ट तक का सफर तय कर चुका था. वहीं रमेश कुमार खुद का नर्सिंग कॉलेज चलाता था.
सउदी अरब की कंपनी में काम कर चुका था संजय
संजय कुमार मूल रूप से भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाने के गंगापुर गांव का रहनेवाला है. 42 साल के संजय टीडीपीएल कंपनी में काम करने से पहले से ही हेमंत वर्मा के साथ काम कर चुका है. सीआईडी को दिए जानकारी के मुताबिक संजय ने स्नातक करने के बाद साल 2010 में नोटिक कसंलटेंसी सर्विस नामक कंपनी में लखनऊ में बतौर ट्रेनी काम की शुरूआत की. जहां उसका टीम लीडर हेमंत वर्मा ही था. वहां करीब एक साल काम करने के बाद उसने दूसरी कंपनी ओमीनेट टेक्नोलॉजी में जूनियर डेवलपर के तौर पर ज्वाइन किया. वहां भी मात्र एक साल काम किया. इसके बाद साल 2012 में उसकी माता का निधन हो गया और वो अपने गांव भागलपुर के गंगापुर आ गया.
एक साल वो घर पर ही बैठा रहा. इसके बाद साल 2014 में वह एक बार फिर काम की तलाश में बाहर निकला और गाजियाबाद पहुंचा. यहां उसने सॉफ्टेक टेक्नोलॉजी नामक कंपनी में काम करने लगा. यहां वह साल 2019 तक काम किया. इसके बाद उसने इस कंपनी को भी छोड़ दिया और सऊदी अरब की डीएचए अरबिया नामक कंपनी से जुड़ गया. यहां वो साल 2025 तक काम करता रहा. संजय के मुताबिक इस काम के दौरान बीच-बीच में उसकी बात हेमंत वर्मा से होती रहती थी. बातचीत के दौरान हेमंत ने साल 2025 में उसे बताया कि उसे जेपीएससी का काम मिला है और उसे ज्वाइन करने बोला. बातचीत होने के बाद हेमंत ने उसे उस्मान से बात करवाई. उस्मान ने जून 2025 में उसे काम करने के लिए तैयार कर लिया और फिर भागलपुर से रांची का टिकट उस्मान ने ही कटवा कर भेजा था.
ये भी पढ़ें : सीआईडी की जांच में खुलासा, जेपीएससी के अभ्यर्थियों को ब्लैकमेल कर वसूली के लिए अभय तिवारी ने तैयार किया था सिंडिकेट
नर्सिंग कॉलेज चलाता था रमेश
रमेश कुमार मूल रूप से रांची के बरियातू भरमटोली का रहनेवाला है. 37 साल के रमेश ने साल 2011 से 2016 तक रांची जिले के सामलौंग स्थित बीके इंस्टीट्यूट में बतौर इलेक्ट्रिकल इंस्ट्रक्टर के रूप में काम किया. इसके बाद वहां काम छोड़ दिया. साल 2016 में उसने रांची के ही कोकर इलाके के खोरहाटोली स्थित डॉन बॉस्को आईटीआई में एडमिशन कंसलटेंट के रूप में काम शुरू किया. इस दौरान रमेश जगह-जगह कैंप लगा कर बीबीए, बीसीए जैसे विषयों में बच्चों का एडमिशन करवाता था. जहां उसे इन एडमिशन के बदले कमिशन मिलता था. रमेश ने साल 2023 में ये नौकरी भी छोड़ दी. इसके बाद उसने धरती आबा नर्सिंग कॉलेज खोला. इस कॉलेज में उसके अलावा उसके दो पार्टनर भी थे. जिसमें एक पार्टनर का नाम राज वर्मा था और दूसरी पार्टनर का नाम अंशु कुमारी था.
नर्सिंग कॉलेज के काम के सिलसिले में उसकी मुलाकात बुद्धेश्वर भगत से हुई. एक दिन इसी नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के सिलसिले में बुद्धेश्वर भगत ने कहा कि वो उसे उसके कॉलेज में एडमिशन के लिए बच्चे लाकर देगा. साथ ही उसने यह भी कहा कि 14वीं जेपीएससी में अगर किसी को पास होना है तो वो अभ्यर्थी लाकर दे. बातचीत के दौरान बुद्धेश्वर ने बताया था कि सामान्य वर्ग के कैंडीडेट के लिए 1 करोड़ रुपया लगेगा. वहीं एसटी कैंडिडेट के लिए 80 लाख रुपए देने होंगे. इस संबंध में बातचीत होने के बाद रमेश के मुताबिक उसने बरियातू के उमाकांत उरांव, कोकर के रॉकी सचिन लकड़ा, मनोज कुमार, रौशन कुजूर से संपर्क किया.
ये सभी अभ्यर्थी परीक्षा पास करने के एवज में 1 करोड़ से 80 लाख रुपए तक देने के लिए तैयार हो गए. पीटी परीक्षा से एक सप्ताह पहले उमाकांत उरांव से रिम्स ऑडिटोरियम के पास मिला और अपने अलावा रॉकी सचिन लकड़ा और मनोज कुमार का मैट्रिक, इंटरमीडिएट और ग्रैजुएशन का सर्टिफिकेट लिया. अगले दिन रौशन केरकेट्टा नामक अभ्यर्थी ने भी ये सारे डॉक्यूमेंट्स दिए. इन सभी अभ्यर्थियों से रमेश ने कहा कि मुख्य परीक्षा होने से पहले ही कुल राशि का 50 परसेंट जमा करना होगा. इसके बाद मेरे द्वारा चारों अभ्यर्थियों का ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट्स और 40 लाख रुपया बुद्धेश्वर को दे दिया. जिसे बुद्धेवर ने अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय को दिया गया था.
स्कैनिंग का काम पहले से करता रहा है प्रदीप
प्रदीप कुमार सिंह मूल रूप से लखनऊ के अलीगंज थाने के निवेणी नगर का रहनेवाला है. सीआईडी के समक्ष दिए बयान के मुताबिक प्रदीप कुमार सिंह साल 2010 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह अजय मिश्रा के लखनऊ स्थित कंपनी इनफोटिंग कंसलटेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड में कंप्यूटर और स्कैनिंग काम सीखने लगा. यहां उसकी बहाली फोर्थ ग्रेड के कर्मचारी के तौर पर हुई थी. साल 2015 तक उसने यहां काम किया. उसके बाद फिर लखनऊ में ही राम प्रवेश यादव की एक्सिस डिग्निट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में स्कैनिंग का काम शुरू किया. यहां वह साल 2015 से 2019 तक काम किया. इन दोनों ही कंपनियों का मुख्य काम विभिन्न विश्वविद्यालयों के परीक्षाओं का संचालन करना और रिजल्ट प्रकाशित करना था. इसके बाद प्रदीप ने टूर और ट्रैवेल का काम शुरू किया. साल 2022 तक टूर एंड ट्रैवेल संबंधी काम करने के बाद लखनऊ के ही एक और व्यक्ति विमल मिश्रा की कंपनी में डेटाबेस बनाने के काम किया. यहां उसे 25,000 रुपया बतौर वेतन मिलता था. इसी दौरान टीडीपीएल कंपनी के निदेशक सतपाल सिंह ने उससे संपर्क किया. जिसके कहने पर जून 2025 में वह टीडीपीएल कंपनी ज्वाइन किया. इस दौरान उसका मुख्य काम ओएमआर स्कैनिंग, इमेज स्कैनिंग एवं डेटाबेस तैयार करना था.

