आज से हम जेपीएससी-जेएसएससी प्रकरण में गिरफ्तार हुए लोगों की प्रोफाइल यानी उनके बैकग्राउंड को समझने की कोशिश करेंगे. आखिर कथित पेपर लीक और भर्ती सिंडिकेट का हिस्सा बनने से पहले ये लोग कौन थे? उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसी थी, वे क्या काम करते थे और भविष्य में क्या बनना चाहते थे?
सीआईडी की पूछताछ में सामने आए बयानों के आधार पर हम एक-एक कर यह जानेंगे कि कथित मास्टरमाइंड बनने से पहले इन लोगों की जिंदगी और करियर किस दिशा में आगे बढ़ रहा था. किसी ने सरकारी नौकरी की तैयारी की, किसी ने टेक्निकल क्षेत्र में काम किया तो कोई खुद सरकारी सेवा में अधिकारी बना. बाद में इनकी राह कथित तौर पर भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक के उस नेटवर्क तक पहुंची, जिसकी जांच सीआईडी कर रही है.
इस कड़ी में आज पढ़िए रामबीर सिंह, मो. उस्मान और श्वेता कुमारी की कहानी. सीआईडी को दिए बयानों के मुताबिक, कथित सिंडिकेट से जुड़ने से पहले इन तीनों का बैकग्राउंड क्या था और वे क्या बनना चाहते थे.
दारोगा बनने की कोशिश से TDPL कंपनी के डायरेक्टर तक रामबीर सिंह
रामबीर सिंह: टीडीपीएल कंपनी के डायरेक्टर रामबीर सिंह ने सीआईडी को पूछताछ में बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस कमीशन सर्विस की तैयारी कर रहा था. वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश दारोगा बहाली में पीटी की परीक्षा पास किया था. इसके बाद मेंस की परीक्षा क्लीयर नहीं हुआ. काफी प्रयास करने के बाद कोई जॉब नहीं लगी तो उसने वर्ष 2010 में टीडीपीएल नामक कंपनी बनाया. उसके वक्त रामबीर के अलावा कंपनी में मो तारीक और सत्यपाल सिंह डायरेक्टर थे.
कंपनी का काम शेयर मार्केटिंग, चुनाव का गाइडलाइन छापना, संविदा और आधार कार्ड से संबंधित काम करते थे. वर्ष 2013-2014 में मो तारीब कंपनी के डायरेक्टर से त्यागपत्र दे दिए तो सिर्फ मैं और सत्यपाल सिंह कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर काम कर संचालन करते थे. फिर वर्ष 2022-2023 में दिल्ली गया तो वहां पर सैंटी (लालू प्रसाद जो मुरेना एमपी का रहने वाला था, अब मृत है)नामक व्यक्ति से मुलाकात हुई और बड़े-बड़े काम दिलाने की बात बोलकर अभय तिवारी से बातचीत करवाया. इसके बाद अभय के बुलावे पर झारखंड आया और वर्ष 2023 में जेएसएससी में इम्पेनलमेंट का टेंडर में अभय ने भरपूर मदद किया था. इसके बाद धीरे-धीरे सभी एक होकर पूरा पेपर लीक के सिंडिकेट का संचालन करने लगे.
टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर से जेपीएससी पोर्टल तक मो. उस्मान का सफर
मो. उस्मान: गिरफ्तारी के बाद मो. उस्मान ने बताया कि वर्ष वर्ष 2009 में स्नातक पास करने के बाद वर्ष 2010 में नाइस कॉलेज बरेली से एडवांस डिप्लोमा हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग इंजीनियरिंग में पास किया. इसके बाद वर्ष 2010 से वर्ष 2016 तक मेगा सॉफ्ट इंफोर्मेशन सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में टेक्नीकल सपोर्ट इंजीनियर के तौर पर काम करना शुरु किया.
फिर वर्ष 2017 में पीकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी हेमंत कुमार वर्मा के सहयोग से बनाया.कंपनी का मुख्य कार्यालय लखनऊ में था. इस कंपनी का काम बैंकिंग फिल्ड में सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाना था. वर्ष 2020 में पहली बार टीडीपीएलऊ कंपनी के डायरेक्टर रामबीर सिंह से मुलाकात हेमंत वर्मा के माध्यम से हुई थी. हेमंत कुमार वर्मा का रामबीर सिंह और सत्यपाल सिंह से पूर्व से पहचान था. रामबीर सिंह ने मुझे उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरओ और एआरओ की रिक्तियों हेतु निकाले गए भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन फॉर्म और एडमिट कार्ड जेनरेशन का कार्य दिया गया था. काम समाप्त होने के बाद टीडीपीएल कंपनी से मेरा संपर्क खत्म हो गया था. इसके बाद दोबारा से रामबीर सिंह ने वर्ष 2025 में बुलाया और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर झारखंड में जेपीएससी का पोर्टल बनवा कर पूरी तरह से पैसों के बदौलत अवैध नौकरी दर्जनों से छात्रों को दिलाई.
जेपीएससी परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर बनीं श्वेता कुमारी, फिर परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी
श्वेता कुमारी: वर्ष 2010 में तीसरी जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था. फिर प्रशिक्षण के दौरान पहली पोस्टिंग रामगढ़ बीडीओ के पद पर हुई थी. इसके बाद बीडीओ इटकी, कार्यपालक दंडाधिकारी रांची, सहायक निदेशक महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, अवर सचिव राजभवन एवं जेपीएससी, रांची में सेवारत थी. वर्ष 2024 मार्च में डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जाम, जेपीएससी में तबादला हुआ था. इसके बाद 22 मई 2026 को फिर से तबादला जेपीएससी से उप सचिव खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग में हो गई. खाद्य आपूर्ति विभाग में योगदान देने के बाद दोबारा से मेरा तबादला जेपीएससी में किया गया. कुछ दिन सेवा देने के बाद फिर से जेपीएससी में योगदान दी. इस दौरान जेपीएससी का मुख्य कार्य मुझे सौंपा गया. झारखंड सिविल सर्विस परीक्षा, युनिवर्सिटी प्रोफेसर, लेक्चरर और नन टिचिंग पोस्ट के लिए डायेक्ट इंटरव्यू की नियुक्ति का जिम्मा सौंपा गया. पहला वर्ष मुझे लिगल और प्रोटोकॉल वर्क का जिम्मा सौंपा गया. फिर जब एल. ख्यांग्ते जेपीएससी के चेयरमैन बने तब भी मैं उपरोक्त काम को ही कर रही थी. लेकिन इसी बीच एग्जाम कंट्रोलर असीम किस्पोट्टा छुट्टी पर चले गए तो उनका कार्य का दायित्व मुझे सौंप दिया गया.
इस दौरान चेरयमैन एल. ख्यांग्ते ने मुझे जेपीएससी 11वीं और 13वीं का इंटरव्यू कंडक्ट कराने का जिम्मा दिया था. पीटी और मेंस असीम किस्पोट्टा द्वारा करवाया गया था. इंटरव्यू कंडक्ट करवाने का मन नहीं था, लेकिन चेयरमैन के कहने पर पूरा कार्य को संपन्न की. इसके बाद फिर से चेयरमैन एल. ख्यांग्ते के कहने पर रिजल्ट प्रकाशित कर चेयरमैन के पास प्रस्तुत की. जिसके बाद अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और डॉ जमाल अहमद को रिजल्ट स्क्रूटनी के लिए मार्क किया गया था. फिर पूरी तरह से सत्यापन के बाद फिर से चेयरमैन द्वारा रिजल्ट प्रकाशित करने के आदेश पर रिजल्ट प्रकाशित किया गया.
उसके मुताबिक, शुरुआत में उसे लीगल और प्रोटोकॉल वर्क का जिम्मा दिया गया था. बाद में जब एल. ख्यांग्ते जेपीएससी के चेयरमैन बने, तब भी वह यही काम कर रही थी.
इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा छुट्टी पर चले गए. इसके बाद परीक्षा नियंत्रक के कार्य का दायित्व श्वेता को सौंपा गया.
श्वेता के बयान के अनुसार, इसी दौरान चेयरमैन एल. ख्यांग्ते ने उसे जेपीएससी की 11वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षा का इंटरव्यू कंडक्ट कराने की जिम्मेदारी दी. उसके मुताबिक, PT और मेंस की परीक्षा असीम किस्पोट्टा ने कराई थी.
श्वेता ने सीआईडी को बताया कि वह इंटरव्यू कंडक्ट कराने की इच्छुक नहीं थी, लेकिन चेयरमैन के कहने पर उसने यह कार्य पूरा किया.
इसके बाद, उसके बयान के मुताबिक, चेयरमैन एल. ख्यांग्ते के कहने पर उसने रिजल्ट प्रकाशित किया और चेयरमैन के सामने प्रस्तुत किया. इसके बाद अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद को रिजल्ट की स्क्रूटनी के लिए मार्क किया गया.
श्वेता के अनुसार, पूरी तरह सत्यापन के बाद चेयरमैन के आदेश पर रिजल्ट दोबारा प्रकाशित किया गया.


