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    Home»JPSC / JSSC»जोहार लाइव इन्वेस्टिगेशन : FRO-ACF परीक्षा में 500 से अधिक ओएमआर शीट में हुई छेड़छाड़, सीआईडी ने कोर्ट में पेश किए नए तथ्य
    JPSC / JSSC

    जोहार लाइव इन्वेस्टिगेशन : FRO-ACF परीक्षा में 500 से अधिक ओएमआर शीट में हुई छेड़छाड़, सीआईडी ने कोर्ट में पेश किए नए तथ्य

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkSeptember 10, 2026No Comments6 Mins Read12
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    आनंद दत्त/किसलय शानू

    जेपीएससी-जेएसएससी मामले में जैसे-जैसे सीआईडी की जांच आगे बढ़ रही है, हर दिन नए तथ्यों का खुलासा हो रहा है. अब सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि एफआरओ-एसीएफ की परीक्षा में 500 से अधिक ओएमआर शीटों में छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं. जिसके मुताबिक Forest Range Officer (FRO) परीक्षा में 350 से अधिक OMR शीट और Assistant Conservator of Forest (ACF) परीक्षा में 150 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर हेरफेर किया गया है.

    दरअसल, सीआईडी पूरे मामले में विभिन्न आरोपियों में से एक धर्मेंद्र कुमार के बेल संबंधी सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने इसका विरोध कर रही थी और उसी दौरान यह तथ्य प्रस्तुत किया गया. जिसके बाद कोर्ट ने धर्मेंद्र को जमानत देने से इनकार कर दिया.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव पार्ट-4: एसीएफ, एफआरओ में 100, 14वीं जेपीएससी में 100 से अधिक, जेपीएससी बैकलॉग में 50 से 100 अभ्यर्थी पैसा देकर हुए हैं पास

    बता दें, आरोपी/याचिकाकर्ता 06.08.2026 से न्यायिक हिरासत में है. उसके ऊपर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2), 316(5), 318(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) तथा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2025 की धारा 12(2) और 12(3) के तहत मामला दर्ज है.

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता निर्दोष है और कानून अथवा शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार उसने कोई अपराध नहीं किया है. उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और प्राथमिकी दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से दर्ज की गई है. वास्तविक तथ्यों की जांच किए बिना पुलिस ने जल्दबाजी में मामला दर्ज कर याचिकाकर्ता को आरोपी बना दिया.

    अधिवक्ता ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता मुख्य सचिव कार्यालय में संविदा के आधार पर केवल कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत है. वह परिस्थितियों का शिकार हुआ है और इस मामले के वास्तविक आरोपियों से उसका कोई संबंध नहीं है. याचिकाकर्ता के पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है. प्राथमिकी में उसका नाम नहीं है और उसका नाम इस मामले के सह-आरोपी के कथित इकबालिया बयान के आधार पर सामने आया है, जिसका कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है. उसका प्रश्नपत्र लीक करने अथवा किसी व्यक्ति को किसी भी माध्यम से नौकरी दिलाने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है. यह प्राथमिकी कुछ प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने के लिए दर्ज की गई है और याचिकाकर्ता को बलि का बकरा बनाया गया है.

    जमानत याचिका का हुआ जोरदार विरोध

    राज्य ने जमानत याचिका का जोरदार विरोध किया. उन्होंने कहा कि केस डायरी में आरोपी धर्मेंद्र कुमार को परीक्षा से जुड़ी कथित साजिश से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सामग्री मौजूद है.

    राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार ने कोर्ट को बताया कि पूरे मामले में सह-आरोपी रामबीर सिंह और अभय कुमार तिवारी ने विशेष रूप से धर्मेंद्र कुमार का नाम लिया है. जांच के दौरान मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में बाद में की गई तलाशी के दौरान, जहां आरोपी धर्मेंद्र कुमार कार्यरत था, जेपीएससी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मेन्स परीक्षा के आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी बरामद हुई. अलमारी से ये दस्तावेज बरामद किए गए.

    जांच के अनुसार, मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी के नेतृत्व वाले सिंडिकेट का काम करने का तरीका यह था कि वह अभ्यर्थियों को अपनी कथित फर्जी सफलताओं का उदाहरण देकर आकर्षित करता था. वह इन सफलताओं को सिस्टम में हेरफेर करने की अपनी क्षमता के प्रमाण के रूप में पेश करता था. आरोप है कि वह अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलता था. पीटी पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन सुनिश्चित कराने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव पार्ट-5: जेपीएससी-14 में थी 100 करोड़ वसूली की योजना, 11 छात्रों से एडवांस में लिए गए थे 1.10 करोड़

    जांच एजेंसी के अनुसार, सिंडिकेट परीक्षा के परिणामों में हेरफेर करने के लिए कई अवैध तरीकों का इस्तेमाल करता था. इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा दिलाना, ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में भौतिक रूप से छेड़छाड़ करना तथा मूल्यांकन प्रणाली और सर्वर में डिजिटल तरीके से हेरफेर करना शामिल था.

    कोर्ट खारिज कर चुकी है जमानत याचिका

    दोनों पक्षों के दलील को सुनने के बाद सीआईडी की विशेष अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता तथा राज्य/सीआईडी की ओर से पेश अपर लोक अभियोजक को सुनने के बाद, मुझे प्रतीत होता है कि केस डायरी में ऐसे विशिष्ट साक्ष्य मौजूद हैं, जो आरोपी को कथित लेन-देन से जोड़ते हैं.

    ये भी पढ़ें : जेपीएससी घोटाला : जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते ने बचने के लिए डिजिटल साक्ष्य को नष्ट करने का किया था प्रयास

    सह-आरोपी और टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह ने अपने बयान में बताया है कि आरोपी धर्मेंद्र कुमार ने अन्य लोगों के साथ मिलकर टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिलाने में मदद की थी. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सह-आरोपी अभय कुमार तिवारी ने कथित तौर पर बताया है कि जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन के लिए निर्धारित राशि धर्मेंद्र कुमार द्वारा एकत्र की गई थी.

    सह-आरोपी अरुण कुमार के बयान में भी आरोपी धर्मेंद्र कुमार की एक विशिष्ट भूमिका बताई गई है. बयान में यह भी उल्लेख है कि जेपीएससी से परीक्षा से संबंधित काम हासिल कराने के एवज में धर्मेंद्र कुमार के लिए 1 प्रतिशत कमीशन तय किया गया था. अभियोजन पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी एकत्र किए हैं.

    इसलिए, आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों, याचिकाकर्ता से जुड़ी खास परिस्थितियों और इससे संबंधित सबूतों को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और खासकर ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों पर नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023’ की धारा 22(b)(i) और (ii) के तहत बताई गई दोनों शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण, यह कोर्ट इस बात से सहमत नहीं है कि याचिकाकर्ता ज़मानत का हकदार है. इसलिए, आरोपी धर्मेंद्र कुमार की ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर दी जाती है.

    Also Read : जोहार लाइव इन्वेस्टिगेशन : JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते के सहयोगी धर्मेंद्र ने बुलेट बाइक खरीदने के लिए अभय से लिये थे 50 हजार, CID की जांच में मिले 8 एडमिट कार्ड के कनेक्शन

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