जोहार लाइव ब्यूरो
जेपीएससी घोटाला को लेकर सीआईडी की ओर से कोर्ट में समर्पित केस डायरी के अनुसार जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते ने खुद को बचाने के लिए डिजिटल साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया था. सीआईडी ने जांच के क्रम में सीडीआर भी हासिल किया है. जिसके आधार पर भी सीआइडी को इस बात की जानकारी मिली है कि आरोपी इस मामले में शामिल रहे थे.
सीआईडी के जांच के क्रम में अन्य गवाहों का भी बयान लेकर इसे केस डायरी में शामिल किया है. जिसके आधार पर सीआईडी की ओर से यह दावा किया गया है कि एल ख्यांगते इस पूरे प्रकरण में शामिल थे. सीआईडी की ओर से न्यायालय को बताया गया है कि सीआईडी ने मामले में ने 22 जुलाई 2026 को सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच शुरू की थी. जांच के दौरान JPSC कार्यालय की तलाशी ली गई और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए.
गोपनीय दस्तावेजों के बाहर भेजे जाने से जुड़े तथ्य सामने आये
जांच में TDPL को परीक्षा कार्य दिए जाने, कंपनी के पूर्व ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद उससे काम लिए जाने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की गई. सीआईडी के अनुसार, जांच में परीक्षा की आंसर-की और अन्य गोपनीय दस्तावेजों के बाहर भेजे जाने से जुड़े तथ्य सामने आए. केस डायरी में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया. जांच में FRO और ACF परीक्षाओं की ओएमआर शीट में कथित छेड़छाड़ तथा परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की गई.
सीआईडी ने जांच के दौरान कई आरोपियों और गवाहों से पूछताछ की तथा मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड ड्राइव और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की. जांच में यह आरोप भी सामने आया कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा हटाने या उन्हें क्षतिग्रस्त करने की कोशिश हुई. सीआईडी की जांच में के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका को लेकर भी साक्ष्य और गवाहों के बयानों की जांच की गई. अदालत ने उपलब्ध केस डायरी और साक्ष्यों के आधार पर माना कि मामले में प्रथमदृष्टया जांच सामग्री मौजूद है, हालांकि ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं.

