आनंद दत्त/किसलय शानू
सीजीएल परीक्षा में धांधली को लेकर जांच कर रही एसआईटी की जांच में यह खुलासा हो चुका है कि सीजीएल परीक्षा का पेपर लीक हुआ था. प्रश्नों को उत्तर रटने के बाद परीक्षार्थियों ने परीक्षा दिया और अब वे पास होकर अफसर बन गये. लेकिन इसमें मामले में सीआईडी ने जेएसएससी की शिकायत पर सीआईडी थाना में एक और केस दर्ज किया था. इस केस में सीजीएल परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने की अफवाह फैलाने और जेएसएससी की छवि को धूमिल करने का आरोप था.
इस केस में सीआईडी ने 28 अक्टूबर 2025 को वित्त विभाग में अफसर के रूप में तैनात संतोष मस्ताना को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. जिसके कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या डीजीपी के पद पर रहते हुए अनुराग गुप्ता ने जान बूझकर बेकसूर संतोष मस्ताना को जेल भेजवाया था, ताकि पूरे मामले में यह स्थापित किया जा सकें कि संतोष मस्ताना को पेपर लीक करने की अफवाह फैलाकर जेल भेजने के बाद असल में हुई पेपर लीक की पूरे मामले को दबाया जा सकें.
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अनुराग गुप्ता को संतोष की गिरफ्तारी से पहले पता चल गया था पेपर लीक की जानकारी
सीआईडी की टीम सीजीएल परीक्षा धांधली केस में आईआरबी के जवान कुंदन कुमार को संतोष मस्ताना से पहले गिरफ्तार किया था. इस दौरान डीजीपी के पद पर रहते हुए अनुराग गुप्ता सीआईडी डीजी के प्रभार में थे.
कुंदन ने अपने बयान में बताया था कि वर्ष 2024 में मेरा रिश्तेदार औरंगाबाद निवासी पिंटू यादव के माध्यम से राम निवास राय से मेरी पहचान हुई थी. इसके बाद मुझे पता चला कि झारखंड में सीजीएल की परीक्षा होने वाली है. परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर मिल जायेंगे. परीक्षा देने वाले छात्रों का जुगाड़ कीजिए. पैसा कमाई होगा. परीक्षा के एक सप्ताह पहले प्रश्नों के उत्तर मिल जाये और इसे छात्रों को याद भी करवा दिया जायेगा. छात्रों को चीट या पुर्जा या प्रश्नपत्र इसलिए नहीं दिये जाते थे, क्योंकि को परीक्षा हॉल में किसी तरह का पेपर या पुर्जा लेकर जाने की अनुमति नहीं थी. इसलिए अब यह सवाल उठ रहा है कि अनुराग गुप्ता ने इन तथ्यों को नजरअंदाज क्यों किया. मामले में अनुराग का आधिकारिक पक्ष मिलने के बाद हम तथ्यों के आधार पर उसे भी प्रकाशित करेंगे.
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संतोष मस्ताना ने कहा मैंने दिया था प्रश्न लीक होने की जानकारी
संतोष मस्ताना ने कहा कि मुझे छात्रों के जरिये ही इस बात की जानकारी मिली थी कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो चुका है और इसमे सेटिंग हो रही है. इस बात की जानकारी मैंने पूछताछ के दौरान सीआईडी को दी थी. लेकिन सीआईडी ने मेरी बातों को सही मानने से इंकार कर दिया और मुझे एक वीडियो के आधार पर पेपर लीक की अफवाह फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. मैं अभी भी यह दावा करता हूँ कि करीब 1500 छात्रों के पास किसी न किसी माध्यम से सीजीएल परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर पहुंचे थे.
संतोष मस्ताना को रहना पड़ा था चार माह न्यायिक हिरासत में जेल में
जानकारी के अनुसार केस के अनुसंधान के दौरान सिर्फ एक वीडियो के आधार के आधार पर सीआइडी ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि संतोष मस्ताना के द्वारा सीजीएल परीक्षा का पेपर लीक करने के संबंधित अफवाह फैलाया गया था.अनुसंधान में आये तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने संतोष मस्ताना के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दिया था. इस केस में संतोष मस्ताना करीब चार माह तक जेल में रहे.जिसके बाद वह जमानत पर बाहर निकले.

