आनंद दत्त/किसलय शानू
हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1953 में यरुशलम में शेख तकियुद्दीन अल-नबहानी ने की थी. यह संगठन दुनिया के विभिन्न देशों में अपनी गतिविधियों के लिए जाना जाता है. इसका घोषित वैचारिक उद्देश्य दुनिया भर के मुसलमानों को एकजुट कर इस्लामी खिलाफत की स्थापना करना है.
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार, संगठन पर आरोप है कि यह भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में लोकतांत्रिक सरकारों को हटाकर खिलाफत स्थापित करना चाहता है. गृह मंत्रालय ने युवाओं के कथित कट्टरपंथीकरण, ISIS जैसे आतंकवादी संगठनों में भर्ती के लिए प्रेरित करने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के आरोप भी लगाए हैं.
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केंद्र सरकार ने 10 अक्टूबर 2024 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत हिज्ब-उत-तहरीर और इसके सभी रूपों एवं फ्रंट संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया.
इस संगठन ने झारखंड में भी अपने पैर पसारे हैं. इस वक्त धनबाद और खूंटी जिले में कुल 6 संदिग्ध हैं. जिसमें 5 जेल में हैं और एक बाहर है. इन छह संदिग्धों में पांच धनबाद जिले से हैं और एक खूंटी जिले से. खास बात ये है कि सुरक्षा एजेंसियां जिन 311 लोगों को पूरे झारखंड में विभिन्न आतंकी संगठनों का संदिग्ध मानती है, उसमें एकमात्र महिला है, जो इसी हिज्ब-उत-ताहिर से संबंध रखती है और इस वक्त वो जेल में है.
धनबाद
अयान जावेद फिलहाल बिरसा मुंडा जेल रांची में कैद है. इसके ऊपर एटीएस ने आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है.
गुलफाम हसन भी बिरसा मुंडा जेल में कैद है और इसके ऊपर आर्म्स एक्ट, यूएपीए सहित कई अन्य धाराओं में केस दर्ज है.
मो. अम्माद असरार के ऊपर झारखंड और राजस्थान में आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित कुल 5 मुकदमें दर्ज हैं. फिलहाल यह भी बिरसा मुंडा जेल में बंद है. इसका संबंध हिज्ब-उत-ताहिर के साथ-साथ इंडियन मुजाहिदीन से भी है.
मो. सज्जाद आलम फिलहाल बिरसा मुंडा जेल में बंद है. इसके ऊपर यूए(पी) एक्ट, आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है.
शबनम परवीन एकमात्र महिला आरोपी है जो फिलहाल होटवार जेल में बंद है. इसके ऊपर भी झारखंड एटीएस ने यूए(पी) एक्ट, आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर रखा है.
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खूंटी
शकील अख्तर खूंटी में अदम सेना नाम से संगठन भी चलाता था.
बता दें, 26 अप्रैल 2025 को झारखंड पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की कार्रवाई के बाद धनबाद के वासेपुर, बैंक मोड़ और भूली इलाके में छापेमारी कर चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें गुलफाम हसन, आयान जावेद, मोहम्मद शहजाद आलम और शबनम परवीन शामिल थे.
पुलिस के अनुसार, इनके पास से दो पिस्तौल, 12 कारतूस, मोबाइल फोन, लैपटॉप और प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए. वहीं जांच के दौरान ATS ने 30 अप्रैल 2025 को अम्मार यासर नामक एक अन्य संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया था.
ATS की जांच में आरोप लगाया गया कि संदिग्ध सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को संगठन से जोड़ने, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और अवैध हथियारों की व्यवस्था करने में शामिल था.
वहीं 14 नवंबर 2025 को झारखंड ATS ने इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ विशेष ATS अदालत, रांची में आरोपपत्र दाखिल किया. आरोपियों पर UAPA, भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए.


