आनंद दत्त/किसलय शानू
झारखंड में रह रहे तथाकथित आतंकी, संदिग्ध, आरोपियों की पड़ताल में आज हम बता रहे हैं साल 2022 में प्रतिबंधित हो चुके संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई के बारे में.
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का गठन वर्ष 2006-07 में दक्षिण भारत के तीन संगठनों को मिलाकर किया गया था. इनमें केरल का नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF), कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KFD) और तमिलनाडु का मनिथा नीति पासराई (MNP) शामिल थे. नवंबर 2006 में केरल के कोझिकोड में इन संगठनों को एक साझा मंच पर लाने का फैसला हुआ.
इसके बाद 16 फरवरी 2007 को बेंगलुरु में एक सम्मेलन के दौरान PFI के गठन की औपचारिक घोषणा की गई. संगठन ने शुरुआत में मुस्लिम समुदाय समेत वंचित वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास को अपना उद्देश्य बताया था. हालांकि, बाद में संगठन पर कई गंभीर आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे. 28 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार ने UAPA के तहत PFI और उससे जुड़े संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया.
वहीं फरवरी 2018 में झारखंड सरकार ने PFI पर प्रतिबंध लगाया था. हालांकि, अगस्त 2018 में हाईकोर्ट ने सरकारी अधिसूचना में प्रक्रियागत कमी के कारण प्रतिबंध निरस्त कर दिया. फरवरी 2019 में राज्य सरकार ने दोबारा प्रतिबंध लगाया.
बता दें, इससे पहले के चार कड़ियों में हमने पटना बम ब्लास्ट कांड, अल-कायदा इन इंडियन सब कॉंटिनेंट के 44 संदिग्ध, लश्कर-ए-तैयबा झारखंड कनेक्शन और दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस के झारखंड में उपस्थिति के बारे में बताया था.
आइए अब इस संगठन की झारखंड के जिलों में उपस्थिति और उनके संदिग्धों के कामकाज के बारे में समझते हैं, जिसकी हमने गहन पड़ताल की है.
पाकुड़
मिस्बाउल इस्लाम, कलाम शेख उर्फ कमल शेख, रफिकुल इस्लाम, सुलेमान शेख मजदूर है.
हेंजला शेख, अबेदुर रहमान, अब्दुल हनन, सफरुद्दीन शेख राजनीति में सक्रिय है.
अबू समां, हरेज शेख, तफिजुल रहमान, बरीक शेख, मतिउर शेख, राजमिस्त्री है.
महफूज शेख पान दुकान, राजीव शेख नाश्ते का दुकान, उस्मान शेख फोटो कॉपी की दुकान, महीमुद्दीन शेख चाय नाश्ता का दुकान, अब्दुल जब्बार शेख बिस्किट दुकान, जहुरुल इस्लाम राशन दुकान, मो. इसराफिल बर्तन की दुकान चलाता है.
मुसाकलिमुल्लाह, मोजहिदुल इस्लाम झोलाछाप डॉक्टर हैं. तो मरजशन हुसैन प्राइवेट हेल्थ सेक्टर में वर्कर है और समिरुक शेख, कंपाउडर है.
नूर नबी शेख स्कूल संचालक, सौकत सफाहत, ट्यूशन पढ़ाता है, जेनारुल हक, रियाज शेख, मदरसा में शिक्षक, किस्मतुल्लाह, ट्यूशन पढ़ाता है.
सरफुल शेख, रफिकुल शेख, टोटो चालक है, वहीं इजरायल शेख साइकिल दुकान में मिस्त्री, सफिकुल शेख दरवाजा रिपेयर का काम करता है. जबकि हबिबुर रहमान मछली पालन करता है, आलम शेख दर्जी, जाकिर शेख फल विक्रेता, बनी इसायल साइकिल मिस्त्री है. जबकि दिलावर हुसैन, हजरत अली, रुस्तम अली सीएसपी संचालक है.
इसके अलावा मो. सद्दाम शेख, सुलेमान शेख, सदाकत हुसैन, दुखन शेख, अहिदुर शेख, अनारुल इस्लाम, निजामुद्दीन शेख, अजफरुल हक, मोहीबुर रहमान, हकीबुर हरमान, मूसा उर्फ सादिक शेख, वकील जमाल, मो. शफुल रेजाउल, मो. कमाल, मो. नईम, अब्दुल रहमान, मो. बोबेद, अब्दुल वकार, कयूम शेख, मो., राशिद शेख, मुसफुर शेख, मो. फरीक शेख, मो. जुबेर, मो. शेख अलाउद्दीन, हफिजुल इस्लाम, मैनुल शेख, मुलीन खान, मो. अबु सुफीयान, मुज्जबुर शेख, इमरान शेख, हक साहब, अब्दुल मनन शेख, सैबुर शेख, नसीम अख्तर, जहीर शेख, खुर्शीद सिद्दीकी, अनारुल शेख, बहेदुर शेख, दिलावर शेख, फिकारुल शेख, हजीफुल शेख, जहीर शेख, मंजर शेख, मो. हुसैन, मो. इसराफिल शेख, मो. सद्दाम शेख, रशीद शेख, साहाबाद शेख, शहाबुद्दीन शेख, सलाउद्दीन शेख, समीरुल इस्लाम, शहबाज आलम, शेर मोहम्मद, तोहेदुर रहमान, तुनु अंसारी, अब्दुल रशीद, तोबाबुल शेख, हसनैन शेख, इमरान आलम, इकबाल अंसारी, मो. हनीफ, मोहबुर रहमान, नदीम सिद्दीकी, सफाउर रहमान, साहेबुल रहमान, सनाउल शेख, नशरुद्दीन शेख, शहबाज शेख, दिल्लू अंसारी, नसीम अंसारी, उमर फारुक, अमीर हमजा, अमिरुल मोमिन, अहिदुर रहमान, लाल मोहम्मद, बाओस्ना शेख भी संदिग्ध की श्रेणी में है.
साहेबगंज
शमसाद आलम, अशरफुल अंसारी, जाकिर मोमिन, रमजान अंसारी, इम्तियाज अंसारी, मो. लियाकत अंसारी, जाकिर अली, मेंहदी हुसैन मजदूरी करता है. वहीं फिरोज आलम, मुंबई के कारखाना में मजदूर है.
बरकत अली, मैदुल शेख, अकरम अली, मो. इस्माइल शेख, आलमगीर आलम राजमिस्त्री है,
कुर्बान अंसारी, अशरफुल शेख, हसन अंसारी, यार मोहम्मद, अब्दुल हक टोटो चालक है.
कुतुबुद्दीन अंसारी, सदाकत अंसारी हफीज अब्दुल सलाम उर्फ अब्दुल सलाम मदरसा में शिक्षक, अब्दुल मलिक शेख रिटायर शिक्षक, इजाज मोहम्मद, प्राइवेट स्कूल में टीचर है.
अब्दुल वदूद, शमीम अख्तर, फोटो कॉपी की दुकान है.
अहमद अंसारी, कबीर हक, लुकमान अंसारी सीएसपी चलाता है.
शकीब आलम उर्फ अब्दुल रकीब बैग का दुकान चलाता है, खुर्शीद आलम फेरीवाला है, रफीक मोमिन दर्जी है, मसिउर रहमान, झोलाछाप डॉक्टर, तहमिदुर रहमान बाइक मिस्त्री, मैसुर आलम चौकी – पलंग बनाता है, नसीरुद्दीन शेख राजनीति में सक्रिय, मूसा अंसारी होटल संचालक, वसीकुल आलम किराना दुकान संचालक, उमर फारुक आधार सेंटर में कर्मी और मुफलिस अंसारी ठेकेदार है.
इसके अलावा मो. मुशर्रफ, फिरोज आलम, मो. सलाउल्लाह, नसीम अख्तर, शम्सुल हक, अब्दुल हदी, मो. लुकमान अंसारी, तारिक रहमान, रफीक अंसारी, अब्दुल रकीब, आफताब, अली हुसैन, अजफर आलम, अजीमुद्दीन अंसारी, फजरुल रहमान, फिकुल इस्लाम, हफाजुद्दीन अंसारी, इम्तियाज अंसारी, इशाक शेख, जमीर अंसारी, मकबूल खान, मो. नासिर हुसैन, मो. नाजिम, मो. सलाउद्दीन, मो. युनूस, मुदस्सर हुसैन, मो. नाजिम, सलाउद्दीन, नजीम आलम, सरफराज आलम, शौकत अली, नुरमुद्दीन शेख, जमीरुल इस्लाम, जमालुद्दीन, तरकुल शेख, तरिकुल आलम भी संदिग्ध की श्रेणी में हैं.
जामताड़ा
अब्दुल कबीर, जामताड़ा, इसके ऊपर पांच मुकदमें दर्ज हैं. इसके अलावा जैनुल अबिदिन मस्जिद में इमाम है, मौलाना रउफ उर्फ अब्दुल रउफ अंसारी, मोइनुद्दीन मियां, अलाउद्दीन अंसारी पारा टीचर हैं. वहीं गुलाम रसूल, सीएसपी संचालक, मो. मुर्तजा, जेसीबी चालक, फिरोज आलम, शादी कार्ड छापने की दुकान. मो सफिउल्लाह, रिटायर्ड शिक्षक, मुस्किम अंसारी पीडीएस डीलर हैं. इसके अलावा उस्मान अंसारी, इलियास मदिनी भी संदिग्ध की श्रेणी में हैं.
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) कब-कब चर्चा में रहा और क्या रहे विवाद?
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया वर्ष 2007 में गठन के बाद से कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा. शुरुआत में संगठन ने खुद को अल्पसंख्यकों, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए काम करने वाला सामाजिक संगठन बताया, लेकिन बाद के वर्षों में उस पर हिंसा, कट्टरपंथी गतिविधियों, हथियारों की ट्रेनिंग और आतंकी संगठनों से संपर्क रखने जैसे गंभीर आरोप लगे. आइए इसकी प्रमुख घटनाओं और विवादों को समझते हैं.
1. वर्ष 2010: केरल के प्रोफेसर का हाथ काटने का मामला
केरल में कॉलेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ काट दिया गया था. आरोप था कि परीक्षा के प्रश्नपत्र में पैगंबर मोहम्मद से जुड़ा आपत्तिजनक सवाल पूछने के कारण इस घटना को अंजाम दिया गया. जांच में PFI से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए. इस मामले में 13 लोगों को दोषी ठहराया गया.
2. वर्ष 2013: कन्नूर में हथियारों की ट्रेनिंग का आरोप
केरल के नाराथ में पुलिस ने एक कथित ट्रेनिंग सेंटर से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की. इस मामले में PFI से जुड़े 41 लोगों को 2016 में दोषी ठहराया गया.
3. वर्ष 2016-19: हत्याओं में कथित संलिप्तता
कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में RSS, हिंदू संगठनों और अन्य लोगों से जुड़े कई कार्यकर्ताओं की हत्याओं में PFI कार्यकर्ताओं पर संलिप्तता के आरोप लगे. इनमें बेंगलुरु के RSS कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या (2016), तमिलनाडु के रामलिंगम की हत्या (2019) और अन्य मामले शामिल हैं.
4. वर्ष 2020: दिल्ली दंगे और हाथरस मामला
दिल्ली में CAA विरोधी प्रदर्शनों के बाद हुए दंगों में PFI के कुछ सदस्यों के नाम सामने आए. दिल्ली पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए. इसी वर्ष उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद हुए विवाद में भी PFI पर हिंसा भड़काने और विदेशी फंडिंग के आरोप लगे. हालांकि, इन आरोपों को संगठन ने खारिज किया था.
5. वर्ष 2022: बिहार के फुलवारी शरीफ मामले में नाम
बिहार पुलिस ने पटना के फुलवारी शरीफ में कथित आतंकी साजिश की जांच के दौरान PFI से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया. आरोप था कि संगठन के सदस्य युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने और हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार करने में जुटे थे.
6. सितंबर 2022: देशभर में NIA की छापेमारी और प्रतिबंध
22 सितंबर 2022 को NIA और ED ने देश के 15 राज्यों में PFI से जुड़े 93 ठिकानों पर छापेमारी की. इसके बाद 27 सितंबर को भी कार्रवाई हुई. 28 सितंबर 2022 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत PFI और उसके आठ सहयोगी संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया.
7. जनवरी 2026: केरल में NIA की दोबारा छापेमारी
28 जनवरी 2026 को NIA ने केरल में PFI से जुड़े नौ ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई 2022 में दर्ज कथित आपराधिक साजिश और प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों से जुड़े मामले में हुई. एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए. NIA के अनुसार, जांच में युवाओं के कट्टरपंथीकरण, हथियारों के प्रशिक्षण और कथित आतंकी साजिश के साक्ष्य सामने आए हैं.


