आनंद दत्त/किसलय शानू
एक ऐसा आतंकी संगठन, जिसकी दहशत दुनिया भर देशों में बरकरार है. खासकर यूरोप और एशियाई देशों में. अपने आतंकी हमलों से अब तक हजारों लोगों को मौत के घाट उतारने वाले इस संगठन की धमक झारखंड में भी है.
पहली कड़ी में पटना बम ब्लास्ट कांड, दूसरी कड़ी में झारखंड में रह रहे अल-कायदा इन इंडियन सब कॉंटिनेंट के 44 संदिग्ध, तीसरी कड़ी में हम लश्कर-ए-तैयबा झारखंड कनेक्शन के बाद अब चौथी कड़ी में हम दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस के झारखंड में उपस्थिति की पड़ताल बता रहे हैं.
गढ़वा निवासी मो. अरशद वारसी आईएसआईएस के पदगाह-बोरिवली मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है, इसके ऊपर 25-आर्म्स एक्ट, 4/5 एक्सप्लोसिव एक्ट, 18/20 यूएपीए, आईपीसी 12बी के तहत मामले दर्ज हैं. बता दें, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के पड़घा-बोरीवली इलाके से जुड़े ISIS मॉड्यूल का खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में हुआ. दिसंबर 2023 में NIA ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में 44 ठिकानों पर छापेमारी कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मॉड्यूल का नेतृत्व साकिब नाचन कर रहा था. आरोप है कि नेटवर्क युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, ISIS के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाने और देश में आतंकी हमलों की साजिश में शामिल था. जांच में आईईडी बनाने और उसके परीक्षण से जुड़े आरोप भी सामने आए. जनवरी 2025 में NIA ने इस मामले में 21वें आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया.
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आरिज हसनैन उर्फ इसरार मूलतः गोड्डा जिले का रहनेवाला है. साल 2023 में 7 नवंबर को झारखंड एसटीएस ने इसे गिरफ्तार किया था. इसके ऊपर यूएपीए के अलावा धारा 124ए, 120बी, आईपीसी की धारा 18/20/38/39 के तहत भी मामला दर्ज है.
हजारीबाग के नसीम अंसारी उर्फ मोहसिन को भी 7 नवंबर 2023 को झारखंड एटीएस ने गिरफ्तार किया था. इसके ऊपर इस वक्त धारा 124ए, 120बी, यूएपीए के अलावा आईपीसी की धारा 18/20/38/39 के तहत भी मामला दर्ज है. यह इस वक्त होटवार जेल में सजा काट रहा है.
आदिल हसन उर्फ मान भी हजारीबाग का ही रहनेवाला है. इसे यूएसआईएस (USIS) कोलकाता फायरिंग केस, जिसे 22 जनवरी 2002 को कोलकाता के अमेरिकन सेंटर आतंकवादी हमला भी कहा जाता है, में पहले गिरफ्तार किया गया, बाद में बेल पर छोड़ दिया गया. भारत के इतिहास में एक प्रमुख आतंकी घटना है.
रेहान आलम उर्फ सैयद रेहान आलम उर्फ मोंटी हजारीबाग का रहने वाला है. इसे भी 22 जनवरी 2002 को कोलकाता के अमेरिकन सेंटर आतंकवादी हमला मामले में पहले गिरफ्तार किया गया. बाद में बेल पर छोड़ दिया गया था. फिलहाल यह यूएई में काम कर रहा है.
शहनवाज आलम उर्फ अब्दुल्लाह उर्फ मो. इब्राहिम उर्फ प्रिंस हजारीबाग का ही रहनेवाला है. यह आईएसआईएस के पूणे मॉड्यूल का सदस्य रहा है, फिलहाल यह मुंबई जेल में बंद है, इसे एटीएस ने साल 2023 में गिरफ्तार किया था. बता दें, पुणे ISIS मॉड्यूल का खुलासा 2023 में हुआ था. NIA के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों पर पुणे के कोंढवा में आईईडी बनाने और परीक्षण करने, हथियारों का प्रशिक्षण लेने तथा महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं. जुलाई 2025 में रिजवान अली की गिरफ्तारी के साथ मामले में 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके थे.
जमशेदपुर का रहनेवाला मो. शहबाज उर्फ गुड्डू उर्फ जुल्फीकार आईएसआईएस के बेलारी (कर्नाटक) मॉड्यूल का सक्रिय सदस्य रहा है. फिलहाल यह बेंगलुरू जेल में बंद है. हालांकि इसकी मां ने बताया कि वर्तमान में उनका बेटा बेल पर बाहर है हाजिरी देने का कारण बेंगलुरू में ही रहता है.
मिली जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2023 में NIA ने बेल्लारी आधारित ISIS मॉड्यूल का खुलासा करते हुए कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली में छापेमारी कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया. जांच एजेंसी के अनुसार, मोहम्मद सुलेमान उर्फ मिनाज इस नेटवर्क का कथित सरगना था. आरोपियों पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, स्लीपर सेल तैयार करने और विस्फोटक बनाने की साजिश के आरोप लगे. जून 2024 में सात आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया.
मोहम्मद का यह संदिग्ध जमशेदपुर का रहनेवाला है. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के पास इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.
जमशेदपुर के ही साकिब अरमान को एजेंसी फिलहाल इसे भी संदिग्ध मान रही है. यह अभी दिल्ली मेट्रो में काम करता है और वहीं रहता है.
फैजान अंसारी उर्फ फैज. लोहरदगा निवासी फैज को एनआईए ने साल 2023 में गिरफ्तार किया था. यह फिलहाल बिरसा मुंडा जेल, होटवार में बंद है.
आईएसआईएस के दुनियाभर में 5 बड़े आतंकी हमले
- यजीदी समुदाय का नरसंहार, इराक (2014)
अगस्त 2014 में आईएसआईएस ने इराक के सिंजार क्षेत्र में यजीदी समुदाय पर हमला किया. हजारों लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा. पुरुषों की हत्या की गई, जबकि महिलाओं और लड़कियों को अगवा कर यौन गुलामी में धकेला गया. संयुक्त राष्ट्र ने इसे गंभीर अत्याचारों और व्यवस्थित यौन हिंसा का अभियान बताया. - पेरिस आतंकी हमला, फ्रांस (13 नवंबर 2015)
पेरिस में कई जगहों पर एक साथ गोलीबारी और आत्मघाती विस्फोट किए गए. कॉन्सर्ट हॉल, रेस्तरां और फुटबॉल स्टेडियम के आसपास हुए हमलों में 130 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए. आईएसआईएस ने हमले की जिम्मेदारी ली. - ब्रसेल्स बम धमाके, बेल्जियम (22 मार्च 2016)
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हवाई अड्डे और मेट्रो स्टेशन पर समन्वित बम धमाके हुए. इसमें 32 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए. इन हमलों की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली थी. - श्रीलंका ईस्टर हमला (21 अप्रैल 2019)
ईस्टर के दिन चर्चों और होटलों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार आत्मघाती हमले किए गए. 250 से अधिक लोगों की जान गई और 500 से ज्यादा घायल हुए. आईएसआईएस ने जिम्मेदारी ली, हालांकि श्रीलंका में स्थानीय चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात से जुड़े हमलावरों की भूमिका भी सामने आई. - मॉस्को कॉन्सर्ट हॉल हमला, रूस (22 मार्च 2024)
मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल में हमलावरों ने गोलीबारी की और आग लगा दी. अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी केंद्र के अनुसार, इस हमले में कम से कम 137 लोगों की मौत हुई. आईएसआईएस-खुरासान (ISIS-K) के आतंकियों को इस हमले से जोड़ा गया.
कब से अस्तित्व में आया ये संगठन
आईएसआईएस (ISIS) का पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (Islamic State of Iraq and Syria) है. इसे आईएसआईएल (ISIL) और दाएश (Daesh) के नाम से भी जाना जाता है. यह एक कट्टरपंथी आतंकवादी संगठन है, जो अपनी हिंसक गतिविधियों और चरमपंथी विचारधारा के लिए कुख्यात है.
इस संगठन का उदय इराक में अल-कायदा से जुड़े आतंकी नेटवर्क से हुआ. वर्ष 2013 में इसने आईएसआईएस नाम अपनाया. वहीं वर्ष 2014 में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर इसने तथाकथित खिलाफत घोषित कर दी. इसी दौरान इसने सामूहिक हत्याओं, अपहरण, धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और आत्मघाती हमलों जैसी घटनाओं को अंजाम दिया.
आईएसआईएस का प्रमुख चेहरा अबू बक्र अल-बगदादी था, जिसकी 2019 में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मौत हो गई. अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों के कारण 2019 तक संगठन का क्षेत्रीय कब्जा समाप्त हो गया, लेकिन इसका नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
वर्तमान में आईएसआईएस की शाखाएं और समर्थक एशिया, अफ्रीका तथा मध्य पूर्व के कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं. यह संगठन इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने तथा युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश भी करता है.
दुनिया के कई देशों और संयुक्त राष्ट्र ने आईएसआईएस के खिलाफ आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए हैं. बावजूद इसके यह संगठन आज भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है.
