आनंद दत्त/किसलय शानू
साल 2001 में भारत के संसद पर हमला, साल 2009 में मुंबई में हमला और 166 लोगों की मौत, साल 2025 में पहलगाम में हमला और 26 निहत्थे पर्यटकों की मौत. इन तीन घटनाओं शायद ही कोई भारतीय याद करना चाहता हो, लेकिन भूलना उतना ही मुश्किल. इन तीन बड़ी घटनाओं को अंजाम देनेवाले संगठन का नाम है लश्कर-ए-तैयबा.
लश्कर-ए-तैयबा (LeT) पाकिस्तान स्थित एक आतंकवादी संगठन है, जिसका गठन 1980 के दशक के आखिरी वर्षों में हुआ था. संगठन का प्रमुख उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में भारत के खिलाफ सशस्त्र गतिविधियां चलाना रहा है. इसका नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा है. भारत सरकार ने इसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में रखा है.
पहली कड़ी में हमने आपको पटना बम ब्लास्ट कांड के आरोपियों, जेल में बंद तथाकथित आतंकियों और रिहा हो चुके लोगों के संबंध में गहन पड़ताल की जानकारी दी. दूसरी कड़ी में झारखंड में रह रहे अल-कायदा इन इंडियन सब कॉंटिनेंट के 44 संदिग्धों के बारे में पूरी जानकारी दी. अब तीसरी कड़ी में हम लश्कर-ए-तैयबा जैसे बेहद खरतनाक और भारत पर बड़े हमले करने वाले संगठन और उसके झारखंड कनेक्शन की पड़ताल बता रहे हैं.
जोहार लाइव को मिली जानकारी के मुताबिक इस खतरनाक संगठन के कुल 6 संदिग्धों का झारखंड से परोक्ष और अपरोक्ष तौर पर कनेक्शन मौजूद हैं.
तारीक अख्तर उर्फ राजू उर्फ शाहिद. यह मूलतः सरायकेला खरसावां का रहनेवाला है. साल 2006 में 31 जनवरी को इसे पहली बार गिरफ्तार किया गया था. वर्तमान में सरायकेला स्थित अपने घर को बेचकर कहीं चला गया है. उसके पड़ोसियों और आसपास रहनेवाले अन्य लोगों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वह कहां गया. यहां तक कि झारखंड पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी उसके होने की कोई मुकम्मल जानकारी नहीं है.
गुलाम सरवर उर्फ मो. सरवर मूलतः बिहार के गया जिला का रहनेवाला है. इसके खिलाफ हजारीबाग जिले में साल 2002 में आर्म्स एक्ट के अलावा धारा 186, 307 (हत्या करने का प्रयास करना), 120 बी (आपराधिक साजिश में शामिल होना, यानी अपराध करने की योजना या षड्यंत्र में भाग लेना), 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या इसमें सहायता देना), 121 ए (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या धारा 121 में बताए गए अपराध को अंजाम देने की साजिश करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके साथ ही आर्म्स एक्ट 25(1) बी (बिना वैध लाइसेंस या कानून के उल्लंघन में निर्धारित हथियार या गोला-बारूद रखना अथवा हासिल करना), सहित पोटो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज हुआ था. यह वर्तमान में रिहा होकर गया जिले में अपने घर पर रह रहा है.
हसन इमाम उर्फ हसन उर्फ जुबैर अहमद. यह मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले का रहनेवाला है. वर्तमान में गया में रह रहा है. इसके ऊपर भी हजारीबाग में साल 2002 में ही धारा 186, 307, 120 बी, 121, 121 ए, पोटा सहित कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज है. ये वर्तमान में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जेल में बंद है. उसके ऊपर एसटीएफ कोलकाता ने भी इन्हीं सब धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.
मो. जमालुद्दीन नसीर उर्फ जमील उर्फ जमालुद्दीन उर्फ नसीर उर्फ जावेद मूलतः बिहार के बिहारशरीफ जिले का रहनेवाला है. वर्तमान में पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में रहता है. साल 2002 में इनके ऊपर भी उन्हीं सब धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज था, जैसे हसन इमाम और गुलाम सरवर पर दर्ज था. साल 2025 में हजारीबाग सेशन कोर्ट ने 27 मार्च को उसे रिहा कर दिया. फिलहाल ये अन्य मामलों की वजह से कोलकाता जेल में बंद हैं.
तौफीक अहमद पीर उर्फ तौसीक. ये मूलतः जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के रहनेवाला है. इसके रिश्तेदार हजारीबाग के पेलावल में हैं, जहां यह कभी काम करने के लिए आया था. साल 2012 में इन्हें हजारीबाग पुलिस ने 29 फरवरी को गिरफ्तार किया था. ये वर्तमान में अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले में सीसीटीवी बेचने व लगाने का काम करता है.
नूर अहमद उर्फ हाजी नूर. साल 2006 में कोलकाता पुलिस ने इन्हें 1 फरवरी को गिरफ्तार किया था. उस वक्त इनके ऊपर कोलकाता पुलिस ने धारा 186, 307, 120 बी, 121, 121 ए, के तहत मामला दर्ज किया था. वर्तमान में यह अपने घर जमशेदपुर में रहकर जमीन खरीदने-बेचने का काम करता है.
जोहार लाइव इन्हें संदिग्ध इसलिए बता रहा है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां और झारखंड पुलिस अब भी इन पर नजर रख रही है. उन पर भी, जो पूर्व में लगे आरोप से या तो बरी हो गए हैं या फिर जमानत पर बाहर हैं.
भारत में लश्कर-ए-तैयबा के कराए बड़े आतंकी हमले
- संसद पर हमला, 13 दिसंबर 2001: नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद पर पांच हथियारबंद आतंकियों ने हमला किया था. इस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी. जांच और विभिन्न आधिकारिक आकलनों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी को केवल एक संगठन तक सीमित करना उचित नहीं होगा.
- मुंबई आतंकी हमला, 26 नवंबर 2008: लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी सबसे चर्चित आतंकी घटना मुंबई हमला है. समुद्री रास्ते से आए 10 आतंकियों ने ताज होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और अन्य स्थानों को निशाना बनाया. हमला 29 नवंबर तक चला. इसमें 166 लोगों की मौत हुई. अजमल कसाब को जीवित पकड़ा गया था और मुकदमे के दौरान उसके बयान तथा अन्य साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण रहे.
- गुरदासपुर हमला, जुलाई 2015: पंजाब के गुरदासपुर जिले में हथियारबंद आतंकियों ने पुलिस और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले में सात लोगों की मौत हुई. अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में इस हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार बताया गया है.
- जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां: वर्ष 2016 और उसके बाद भी लश्कर से जुड़े आतंकियों तथा उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ कई मामले सामने आए. सुरक्षा बलों पर हमले, घुसपैठ और स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने के नेटवर्क की जांच एजेंसियां करती रही हैं.
- पहलगाम हमला, 22 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पर्यटकों पर हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई. दिसंबर 2025 में NIA ने अपनी चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को आरोपी बनाया.
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा का नेतृत्व स्थापना से लेकर साल 2025 तक हाफिज सईद इस आतंकी संगठन का नेतृत्व कर रहा था. साल 2025 के अंत में उसने अपने बेटे तल्हा सईद के हाथों में संगठन की कमान सौंप दी है. जबकि खुद वैचारिक प्रमुख बना हुआ है. वहीं जकी-उर-रहमान लखवी संगठन का वरिष्ठ कमांडर रहा है और 2008 के मुंबई हमलों के मामले में प्रमुख नामों में शामिल है.

