जोहार लाइव ब्यूरो
पलामू के छतरपुर में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. जन्म के महज तीन घंटे बाद एक नवजात बच्ची को तेज बारिश और ठंड के बीच धान के खेत की मेढ़ पर छोड़ दिया गया. बच्ची का नाल तक नहीं कटा था और शरीर पर कपड़े भी नहीं थे. ग्रामीणों को आशंका हुई कि बच्ची को उसकी मां और दो अन्य महिलाएं कथित तौर पर देवी मंदिर में बलि देने के लिए लेकर आई थीं. हालांकि, बच्ची को मंदिर के पास लाने के पीछे की असल वजह अभी सामने नहीं आई है.
घटना शुक्रवार रात करीब नौ बजे छतरपुर के मनहूं गांव की है. बताया जाता है कि मंदिर के पास तीन महिलाएं पूजा सामग्री के साथ मौजूद थीं. इसी दौरान खेत की मेढ़ पर नवजात बच्ची पड़ी मिली. ग्रामीणों को बच्ची की बलि दिए जाने का शक हुआ. युवकों ने शोर मचाया, जिसके बाद दो महिलाएं मौके से भाग निकलीं, जबकि एक महिला को ग्रामीणों ने पकड़ लिया.
बताया गया कि बच्ची को जन्म देने वाली महिला के पहले से दो बेटे और दो बेटियां हैं. यह उसकी पांचवीं संतान है. महिला के पास से सिंदूर, टिकली, कंघी और पूजा-पाठ की सामग्री भी मिली है. ग्रामीणों को इसी वजह से बच्ची को बलि देने की आशंका हुई.
अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही नवजात
जिस बच्ची को जन्म के बाद मां की गोद और देखभाल की जरूरत थी, वह बारिश और ठिठुरती रात में खेत की मेढ़ पर पड़ी मिली. ग्रामीणों की सूचना के बाद बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया. फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और वह जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है.
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात को मंदिर के पास क्यों लाया गया था और उसे इस हालत में खेत की मेढ़ पर छोड़ने के पीछे क्या वजह थी.
जब इस मामले पर जोहार लाइव ने छतरपुर नगर परिषद अध्यक्ष अरविंद प्रताप से बात की तो उन्होंने कहा की नगर पंचायत और पुलिस प्रशाशन इस बात की जांच कर रही है. अगर यह मामला नरबली या उससे जुड़ा हुआ साबित होता है तो इसपर कठोर करवाई की जाएगी.
हालांकि झारखंड में अंधविश्वास और कथित नरबलि से जुड़ी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं. खासकर पलामू, सरायकेला-खरसावां और हजारीबाग में बच्चों को निशाना बनाए जाने के मामले रिपोर्ट हुए हैं.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 में सरायकेला-खरसावां के टोटाटालवाडी और बेनगाडीह गांव में एक प्रस्तावित स्टील प्लांट की साइट पर दो छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को देखकर ग्रामीणों को बलि की आशंका हुई. ग्रामीणों ने हंगामा किया और कंपनी के कर्मचारियों पर हमला कर दिया. पुलिस ने बच्चों और उस व्यक्ति को हिरासत में लिया था. पुलिस ने तब कहा था कि बच्चों को गलत मंशा से लाया गया था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है.
दी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मई 2017 में सरायकेला-खरसावां के तिरुलडीह थाना क्षेत्र के चाइदा गांव में सात महीने की बच्ची की कथित नरबलि का मामला सामने आया था. बच्ची सुबाष गोप की बेटी थी. पुलिस के मुताबिक, भदोई कालिंदी और कथित तांत्रिक कर्मू कालिंदी ने बच्ची का अपहरण कर उसे नदी के पास स्थित श्मशान घाट ले जाकर हत्या कर दी थी. पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
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