जोहार लाइव ब्यूरो
एक तरफ गुजरात के एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस पर नक्सल मुक्त भारत का जश्न मनाया जा रहा है, दूसरी तरफ झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की कहानी कई बड़े बदलावों के साथ सामने है. कभी माओवादियों का मजबूत गढ़ रहे सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों को नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है. एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी हो चुकी है. इस साल 15 अगस्त तक झारखंड में 113 माओवादी और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं. ऐसे में गुजरात का समारोह झारखंड के लिए भी खास मायने रखता है.
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर को गुजरात के एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस का मुख्य समारोह आयोजित किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने इस बार समारोह का एक प्रमुख हिस्सा सशस्त्र नक्सलवाद के अंत को बनाया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 21 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि एकता परेड के जरिए देश में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत और इस अभियान में सुरक्षा बलों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा.
समारोह में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस की वे टुकड़ियां शामिल होंगी, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है. इन टुकड़ियों के मार्च पास्ट के दौरान LED स्क्रीन पर उनके अभियानों और उपलब्धियों से जुड़ी फिल्में दिखाई जाएंगी. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से करीब 2,000 कलाकार नक्सल मुक्त भारत की थीम पर प्रस्तुति देंगे. ये कलाकार देश के उन 126 जिलों से जुड़े हैं, जिन्होंने कभी सशस्त्र नक्सलवाद का प्रभाव झेला है. इन जिलों के करीब 5,000 लोगों को भी समारोह में आमंत्रित किया गया है.
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया था. अब राष्ट्रीय एकता दिवस के मंच से सरकार इस अभियान को मिली सफलता और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आए बदलाव को देश के सामने रख रही है.
झारखंड में बदली नक्सलवाद की तस्वीर
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के लिहाज से 2026 कई बड़े घटनाक्रमों का साल रहा है. 29 जुलाई को भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को गिरफ्तार किया गया. उसके साथ माओवादी संगठन के दो अन्य सदस्य मेहनत उर्फ मोछू और गौरव उर्फ सौरभ भी पकड़े गए. यह गिरफ्तारी गिरिडीह के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के मनियाडीह इलाके में हुई थी. मिसिर बेसरा का प्रभाव सारंडा और कोल्हान के माओवादी नेटवर्क में रहा था.
इसके बाद 11 अगस्त को पश्चिम सिंहभूम पुलिस के सामने चार सक्रिय माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इनमें 10 लाख रुपये का इनामी माओवादी जोनल कमांडर सालुका कायम भी शामिल था. इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम सिंहभूम पुलिस ने सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट वन प्रमंडलों को नक्सलमुक्त घोषित किया. 15 अगस्त को सारंडा के संजाजाता गांव में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया. यह उस इलाके के लिए महत्वपूर्ण बदलाव था, जहां लंबे समय तक माओवादियों का प्रभाव रहा था.
15 अगस्त तक 113 गिरफ्तारी
झारखंड पुलिस के साढ़े सात महीने के रिपोर्ट कार्ड के मुताबिक, 15 अगस्त 2026 तक राज्य में 113 माओवादी और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के सदस्य गिरफ्तार किए गए. इनमें 49 भाकपा माओवादी, 30 PLFI, 23 TSPC, 10 JJMP और एक SJMM का सदस्य शामिल था. इसी अवधि में 50 लोगों ने आत्मसमर्पण किया और 22 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए.
गिरफ्तारी के आंकड़ों के साथ बड़े नेताओं पर कार्रवाई भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही. मिसिर बेसरा के अलावा कई इनामी माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी और मुठभेड़ों में संगठन के सदस्यों के मारे जाने से माओवादी नेटवर्क को झटका लगा है.
नक्सलवाद का अंत या एक नई चुनौती?
केंद्र सरकार देश में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है. झारखंड में भी सारंडा जैसे इलाकों में बदली स्थिति इस अभियान का महत्वपूर्ण परिणाम है. लेकिन नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलना और उन क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं.
अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन इलाकों में विकास और प्रशासन की पहुंच मजबूत करने की है, जहां कभी माओवादियों का प्रभाव था. क्या इन गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं लगातार पहुंचेंगी? क्या स्थानीय लोगों का भरोसा प्रशासन पर मजबूत होगा? क्या पुराने माओवादी नेटवर्क दोबारा सक्रिय नहीं हो पाएंगे?
गुजरात में राष्ट्रीय एकता दिवस पर नक्सल मुक्त भारत का जश्न मनाया जा रहा है. झारखंड के लिए यह सिर्फ एक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि उस बदलाव को स्थायी बनाने की चुनौती भी है, जिसकी शुरुआत दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहे इलाकों में हो चुकी है.
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