किसलय शानू
जेपीएससी की परीक्षाओं में परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की संदिग्ध भूमिका पर गंभीर सवाल अब उठने लगे है. जोहार लाइव ने 16 अगस्त को ही बता दिया था कि उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने कैसे ओएमआर शीट में हेरफेर से लेकर एजेंसी तक में कथित तौर पर धांधली की. यहां तक कि उन धांधलियों का नियंत्रण भी अपने पास रखा था.
अब जोहार लाइव की खबर पर मुहर लगाते हुए सीआईडी ने भी न्यायालय में चार्जशीट जमा कर श्वेता गुप्ता के कथित हेराफेरी से न्यायालय को अवगत कराया है.
चार्जशीट के मुताबिक, श्वेता गुप्ता ने परीक्षा नियंत्रक के पद पर रहते हुए निजी एजेंसियों को लाभ पहुंचाने, बिना निर्धारित प्रक्रिया के कंपनियों को परीक्षा कार्य सौंपने, ओएमआर और ओएसएम प्रक्रिया में कथित हेरफेर तथा परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के प्रबंधन में अनियमितताओं को बढ़ावा दिया है.
सीआईडी ने जो चार्जशीट न्यायालय में जमा किया है उसके पेज संख्या 62 से 67 में टीडीपीएल (टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड प्रोसेसिंग लिमिटेड) और बिंसिस एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम देने से लेकर 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, अभ्यर्थियों के अंकों और निजी लाभ से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है.
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि परीक्षा नियंत्रक के पद पर रहते हुए श्वेता गुप्ता ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर कथित तौर पर निजी एजेंसियों को फायदा पहुंचाया.
छुट्टी में मिला परीक्षा नियंत्रक का प्रभार, उसी दिन TDPL को काम देने का आरोप
सीआईडी की चार्जशीट में लिखा है कि 30 मई 2025 से 5 जून 2025 तक तत्कालीन नियमित परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा अवकाश पर थे. इसी अवधि में श्वेता कुमारी गुप्ता को परीक्षा नियंत्रक का प्रभार सौंपा गया था.
रिपोर्ट में आरोप है कि 5 जून 2025 को ही टीडीपीएल को परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए एम्पैनल करने की प्रक्रिया पूरी कराई गई थी. इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि कंपनियों के चयन में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया था.
टीडीपीएल को बिना उचित सत्यापन और नियमित निविदा प्रक्रिया के परीक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण काम सौंपा गया. इतना ही नहीं, नियमित परीक्षा नियंत्रक के वापस आने के बाद भी श्वेता गुप्ता को परीक्षा नियंत्रक का कार्यभार मिलता रहा.
सीआईडी की जांच रिपोर्ट में टीडीपीएल के साथ ALPS Solutions और NAVEE Assessment के कोटेशन की भी चर्चा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों के निदेशकों के बीच संबंध और कोटेशन प्रक्रिया में समानता को लेकर संदेह पैदा हुआ और आरोप है कि कंपनियों के बीच पहले से तय तरीके से कोटेशन तैयार कर टीडीपीएल को L1 यानी सबसे कम दर वाली एजेंसी दिखाने की कोशिश की गई.
14वीं जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर-ओएसएम से छेड़छाड़ का आरोप
सीआईडी की रिपोर्ट में सबसे गंभीर हिस्सा 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर और ओएसएम प्रक्रिया से संबंधित है. इसमें दावा किया गया है कि ओएमआर शीट की स्कैनिंग और ओएसएम प्रक्रिया में बदलाव का काम टीडीपीएल के चुनिंदा कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाता था.
रिपोर्ट में उस्मान, प्रभात, संजय, हेमंत वर्मा, निदेशक रामवीर और सत्यपाल जैसे नामों का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा यह भी आरोप है कि परीक्षा से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों और उत्तर पुस्तिकाओं को नियंत्रित तरीके से संभालने के बजाय उनमें हेरफेर की गुंजाइश छोड़ी गई.
ओएमआर शीट की स्कैनिंग के दौरान प्रभावी निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं थी. यहां तक कि स्कैनिंग का काम जिन स्थानों पर किया जा रहा था, वहां पर्याप्त सीसीटीवी निगरानी भी नहीं थी.
वहीं, सीआईडी को जांच में यह भी साक्ष्य मिला है कि ओएमआर शीट को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के बजाय कार्यालय से बाहर ले जाने, स्कैनिंग में मनमानी करने और ओएसएम में छेड़छाड़ के जरिए कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया है.
इन गड़बड़ियों के बाद ओएमआर शीट को श्वेता गुप्ता ने अपने हस्ताक्षर से दोबारा स्ट्रॉन्ग रूम में रखवाया था.
कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर के अंकों में भारी अंतर
सीआईडी को जांच में अभ्यर्थियों के कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर के अंकों में अंतर के कई उदाहरण दिए गए हैं. यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थी सुमन सोरेन की कार्बन कॉपी में 48 उत्तर थे, जबकि स्ट्रॉन्ग रूम में रखी मूल ओएमआर शीट में 99 उत्तर दर्ज मिले है. रिपोर्ट में उनके पिता के खाते से एजेंट को लगभग 15.9 लाख रुपये भेजे जाने का भी उल्लेख है.
राकेश सिंह: एफआरओ परीक्षा के इस अभ्यर्थी की कार्बन कॉपी में 31 उत्तर थे, जबकि मूल ओएमआर में 147 उत्तर मिले.
अरविंद कुमार: परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज में परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई देने के बावजूद उन्हें 292 अंक मिलने का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने ओएमआर खाली छोड़ने और कार्बन कॉपी जलाने की बात स्वीकार की.
ओम प्रकाश राणा: 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में पूरे समय निष्क्रिय रहने के बावजूद उनके दोनों पेपर की ओएमआर शीट में क्रमशः 91 और 92 उत्तर मिले.
वंदना कुमारी: सीसीटीवी फुटेज के अनुसार दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न हल करने के बावजूद उनकी ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज मिले.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्ह्राट्सएप्प पर परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों को निर्देश देने का आरोप
सीआईडी की जांच में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप चैट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया है. इसमें आरोप लगाया गया है कि परीक्षा नियंत्रक के निर्देश पर टीडीपीएल के कर्मचारियों को उत्तर कुंजी और ओएमआर-ओएसएम प्रक्रिया से जुड़े कामों के लिए संदेश भेजे जाते थे.
इतना ही नहीं एसीएफ और 14वीं पीटी की उत्तर कुंजी के मूल्यांकन से पहले टीडीपीएल के कर्मचारी मो. उस्मान को व्ह्राटसअप के माध्यम से संदेश भेजा गया था, ताकि ओएमआर-ओएसएम में कथित बदलाव किए जा सकें. इसमें यह भी सवाल उठाया गया है कि आधिकारिक प्रक्रिया के बजाय व्यक्तिगत व्हाट्सएप संवाद के माध्यम से संवेदनशील परीक्षा संबंधी निर्देश क्यों दिए गए.
14वीं पीटी के परिणाम की जांच के दौरान 32 ओएमआर शीटों की जांच का भी उल्लेख है. रिपोर्ट के अनुसार, श्वेता गुप्ता ने परीक्षा परिणाम प्रकाशित होने से पहले स्वयं ओएमआर की स्क्रूटनी की, जबकि यह काम आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था. 2 जुलाई 2026 को परिणाम प्रकाशित हुआ, जिसमें मुख्य परीक्षा के लिए 2204 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था.
बिंसिस के निदेशक पर 5 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
सीआईडी की जांच में बिंसिस एजेंसी और उसके निदेशक अरुण कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. इस दौरान सीआईडी ने बताया है कि जेट-2024 परीक्षा का काम बिंसिस को दिया गया था. आरोप है कि एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार ने जेपीएससी का काम प्राप्त करने के लिए 5 प्रतिशत कमीशन देने की बात कही थी.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कमीशन की राशि नहीं देने पर श्वेता गुप्ता की ओर से दबाव बनाया जाता था. इस संबंध में श्वेता कुमारी गुप्ता और अरुण कुमार के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत का भी उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट में दो मोबाइल नंबरों के माध्यम से संपर्क और संवाद के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है. जांचकर्ताओं ने इसे एजेंसी और परीक्षा नियंत्रक के बीच कथित सांठगांठ का महत्वपूर्ण आधार बताया है.
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप
सीआईडी की जांच में यह भी स्पष्ट हो चुका है कि परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर कई बार शिकायत की गई थी, इसके बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं की गई. जांच में एफआरओ अभ्यर्थी कुणाल साहनी का उदाहरण दिया गया है.
बताया गया है कि उन्होंने एफआरओ और एसीएफ परीक्षा की ओएमआर में गड़बड़ी की शिकायत आयोग के अध्यक्ष से की थी और जांच कर परीक्षा रद्द करने की मांग की थी. इस आवेदन को परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजा गया, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक छह महीने से अधिक समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
इसी तरह सुमित सौरभ कुमार वर्मा की शिकायत का भी उल्लेख है. सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार उनकी शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं की गई.
एसीएफ मुख्य परीक्षा के परीक्षक प्रो. हरिकेश सिंह ने उत्तर पुस्तिका के पहले और दूसरे खंड में लिखावट के मिलान को लेकर सवाल उठाए थे. इस मामले में भी उचित कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप है.


