“मैं प्रमोशन की परीक्षा में फेल हुआ था. अपने बैचमेट्स से एक साल बाद प्रमोट हुआ, लेकिन आखिरकार वायुसेना प्रमुख बना.”
ये शब्द किसी मोटिवेशनल स्पीकर के नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के निवर्तमान प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के हैं. NCC कैडेट्स के सामने 8 जनवरी 2026 को उन्होंने अपनी जिंदगी की उस असफलता का जिक्र किया, जिसे बहुत कम लोग जानते थे.
जिस शख्स को कभी स्कूल में दाखिला नहीं मिला, जो प्रमोशन की दौड़ में अपने साथियों से पिछड़ गया, उसी ने एक दिन भारतीय वायुसेना की कमान संभाली. 5,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान, मिग-27 से लेकर तेजस तक का सफर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम सैन्य अभियान के दौरान नेतृत्व. 42 साल की वर्दी की जिंदगी में ए.पी. सिंह ने कई मुकाम हासिल किए.
आज जब उन्होंने वर्दी को आखिरी सलाम किया, तो पीछे सिर्फ एक सैन्य करियर नहीं, बल्कि असफलताओं को पीछे छोड़कर शिखर तक पहुंचने की एक कहानी छोड़ गए.
बचपन की असफलताएं और एनडीए तक का सफर
दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक सरकारी स्कूल से पढ़े अमर प्रीत सिंह का शुरुआती जीवन आसान नहीं था. बचपन में उन्हें एक प्रतिष्ठित स्कूल और हरियाणा के राय स्थित स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया था. बाद में सैन्य सेवा के दौरान भी उन्हें एक बार प्रमोशन बोर्ड में असफलता का सामना करना पड़ा, जिससे वे अपने बैचमेट्स से एक साल पिछड़ गए थे.
इन शुरुआती झटकों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 65वें कोर्स से जुड़े ए.पी. सिंह ने अपनी मेहनत के दम पर न केवल खुद को साबित किया, बल्कि बाद में देश के सर्वोच्च वायुसेना पद तक पहुंचे. एनडीए के साथी उन्हें प्यार से ‘डॉली’ पुकारते हैं. फिटनेस के प्रति उनका गहरा लगाव रहा है—वे लंबी दौड़, स्क्वैश और ट्रेकिंग के शौकीन हैं. इसके अलावा उन्हें तंदूरी चिकन और चिकन स्टेक बनाना भी बेहद पसंद है.
पहली उड़ान से लेकर वायुसेना प्रमुख तक
28 जनवरी 1984 को एयर फोर्स अकादमी में HJT-16 ‘किरण’ विमान से उन्होंने अपनी पहली उड़ान भरी थी और 21 दिसंबर 1984 को उन्हें फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला. उनके पास 5,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है. वे क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे. उन्होंने MiG-27 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और मॉस्को में MiG-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया.
भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) ‘तेजस’ के फ्लाइट टेस्ट डायरेक्टर के रूप में उन्होंने स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई. 1 फरवरी 2023 को वायुसेना के उप प्रमुख बनने के बाद, 30 सितंबर 2024 को उन्होंने भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख के रूप में कमान संभाली. उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें AVSM और PVSM जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया.
ऑपरेशन सिंदूर और ऐतिहासिक विदाई उड़ानें
उनके कार्यकाल की सबसे अहम सैन्य घटनाओं में मई 2025 का ऑपरेशन सिंदूर शामिल है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की थी. उनके कार्यकाल में स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष जोर रहा.
सेवानिवृत्ति से पहले उनकी विदाई उड़ानें बेहद खास रहीं. जोधपुर में ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास के दौरान 12 अक्टूबर 2026 को उन्होंने स्वदेशी तेजस विमान में अपनी आखिरी फाइटर उड़ान भरी.
इसके बाद, 20 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के डुंडीगल में उन्होंने ठीक उसी HJT-16 ‘किरण’ विमान से अपनी आखिरी उड़ान पूरी की, जिससे उन्होंने चार दशक पहले अपनी शुरुआत की थी. इस दौरान उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वी.एस. कोचर (सेवानिवृत्त) भी मौजूद रहे. लैंडिंग के बाद विमान को वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया.
31 अक्टूबर को उनके पदमुक्त होने के बाद एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना की कमान संभालेंगे
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