किसलय शानू
जोहार लाइव ने सबसे पहले नौ अगस्त 2026 को जेपीएससी में हुए घोटाले की परत दर परत खुलासे किये थे. 25 दिन तक लगातार नये खुलासे के माध्यम से जोहार लाइव ने जिन तथ्यों को सामने लाया था, अब उन्हीं तथ्यों को सीआइडी ने चार्जशीट के माध्यम से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया है.
जाहिर है, जोहार लाइव की खबरों को सीआइडी ने भी सही माना और उसे कोर्ट के सामने रखकर उसपर मुहर लगायी है. हम अगले 13 दिनों तक जोहार लाइव के किये गये खुलासे और सीआइडी की चार्जशीट में आये नए तथ्यों के आधार पर जांच की रिपोर्ट को विस्तार से आपके सामने रख रहे हैं.
पहली कड़ी में किस तरह से टीडीपीएल कंपनी को जेपीएसपी के तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांगते ने सिर्फ पैसों की उगाही के लिए नियमों को ताक पर रख कर टेंडर दिया. सिर्फ यहीं नहीं, एल ख्यांगते को पहले ही पता चला गया था कि टीडीपीएल कंपनी दागी है. लेकिन इन्होंने पैसे के आगे किसी की नहीं सुनी. उन्होंने छात्रों के भविष्य को एक दागी कंपनी को बेच दिया.
सीआइडी की चार्जशीट और जांच में आये तथ्यों के अनुसार जेपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा के द्वारा जेपीएससी के चेयरमैन एल ख्यांगते को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी गयी थी. इसमें बताया गया था कि टीडीपीएल कंपनी पहले से एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी है.
रिपोर्ट में इस कंपनी के निदेशक के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी में इंपैनल नहीं करने का अनुरोध किया गया था. लेकिन इसे दरकिनार कर दिया गया था.
सौरभ बर्मन के द्वारा अभय तिवारी, उस्मान सहित अन्य लोगों के बारे शिकायत की गयी थी. चेयरमैन ने इस शिकायत पर 5 जनवरी 2026 को मार्क करके तत्कालीन परीक्षा उप-नियंत्रक श्वेता गुप्ता के पास भेजा दिया था. इससे स्पष्ट होता है कि परीक्षा में धांधली की सूचना काफी पहले से चेयरमैन सहित अन्य लोगों को थी. लेकिन जान बूझकर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. एसीएफ की परीक्षा में धांधली की सूचना भी आयोग को मिली थी. लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
टीडीपीएल के चयन में झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एवं सर्विसेस मैनुअल का उल्लंघन
सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार वित्त विभाग के द्वारा वर्ष 2024 में जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स सर्विसेस मैनुअल लागू है. जून 2025 को टीडीपीएल को काम दिये जाने के समय यह मैनुअल लागू था.
इस मैनुअल के नियम के अनुसार 10 लाख रुपये से अधिक का काम देने के लिए खुला टेंडर निकालना जरूरी था. लेकिन बिना टेंडर के सीधे टीडीपीएल को काम दिया गया. सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का निष्पक्ष तरीके से चयन के अनुसार सबको बराबर मौका देना होता है.
लेकिन एक ही दिन में एजेंसी चुन ली गयी और दिखावे की प्रतियोगता करायी गयी और रिश्वत की बात तय हुई. मैनुअल के नियम के अनुसार प्रतिबंध की बात छिपाने वाली और मिलिभगत करने वाली एजेंसी को अयोग्य घोषित करना था. लेकिन निजी लाभ के लिए मैनुअल का उल्लंघन किया गया.
कंपनी दो, निदेशक एक, टेंडर में शामिल नहीं, फिर भी नाम
सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2000 में झारखंड लोक सेवा आयोग प्रक्रिया नियमावली तैयार की गयी है. इस नियमावली के नियम चार में आयोग के कार्य और परीक्षा की गोपनीयता से संबंधित है.
लेकिन परीक्षा के दौरान गोपनीयता नहीं बरत कर इस नियम का उल्लंघन किया गया. क्योंकि सीआइडी की जांच में ओएमआर शीट में गड़बड़ी, उत्तर को व्हाट्सएप पर शेयर करना और परीक्षा की कॉपी को बाहर निकाल कर ले जाने की बात सामने आ चुकी है.
सीआइडी के द्वारा टीडीपीएल के अतिरिक्त टेंडर में शामिल दो अन्य एजेंसी एएलपीएस सॉल्यूशन एवं नेव असेसमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक से पूछताछ की गयी है. दोनों कंपनी के निदेशक एक ही व्यक्ति गौरव भूटानी है.
इन्हें सीआइडी ने नोटिस भेजकर बयान देने के लिए बुलाया था. इन्होंने अपने बयान में बताया है कि मैंने जेपीएससी के किसी टेंडर में शामिल होने के लिए प्रपोजल लेटर नहीं दिया था. सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार उपरोक्त दोनों कंपनी को इंपैनल करने के लिए उद्देश्य से फर्जी तरीके से शामिल किया गया था.
आइटीआइ कंपनी की आड़ में टीडीपीएल कंपनी से पहले से कराया जाता था काम
सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार जेपीएससी की 11 वीं से 13 परीक्षा में कार्यरत एजेंसी आइटीआइ के संबंध में छानबीन करने पर पता चला कि जेपीएससी की ओर से 11 से 13 वीं सिविल सेवा परीक्षा संचालन के लिए पहले आइटीआइ को काम दिया गया था.
इसकी आड़ में आइटीआइ के द्वारा टीडीपीएल को काम दे दिया गया. सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार टीडीपीएल अपने मंसूबे को पूरा करने के लिए पूर्व से सक्रिय था और कई एजेंसी की कड़ी बनाकर जेपीएससी में अपने नाम पर काम मिलने से पहले ही जेपीएससी में बैक एंड का कार्य कर रही थी.
एसीबी की जांच में आये तथ्यों के अनुसार सबसे पहले क्रिरीट नामक कंपनी बनायी गयी थी. टीडीपीएल कंपनी के कहने पर यह कंपनी के तत्कालीन अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा से काम के सिलसिले में मिला था. लेकिन तब जेपीएससी के द्वारा निजी कंपनी के बजाय पीएसयू आइटीआइ से काम लेने की बात सामने आने पर आरोपी पक्ष के लोग आइटीआइ कंपनी का पेपर लेकर लोकल व्यक्ति नंदलाल के माध्यम से जेपीएससी के चेयरमैन से लाइजिनिंग के लिए मिले थे.
आइटीआइ के पेपर काम मिलने के बाद आइटीआइ से टीडीपीएल को काम सबलेट कर दिया गया था. टीडीपीएल की ओर से अभियुक्त कृष्णा को जेपीएससी में काम के लिए अधिकृत किया गया था. इस तरह से टीडीपीएल 2024 से ही आइटीआइ की आड़ में काम कर रही थी.


