जोहार लाइव ब्यूरो
रांची. झारखंड में 141 जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति सात साल से ज्यादा समय से अटकी है. वर्ष 2018 में निकले विज्ञापन के बाद अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, फीस जमा की, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई. नौकरी का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों ने जब मुख्यमंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाई, तो मामला मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंच गया. अब सचिवालय ने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है.
मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव घनश्याम प्रसाद सिंह ने 23 अक्टूबर को इस संबंध में पत्र जारी किया. इसमें अभ्यर्थी संजय कुमार की शिकायत पर कार्रवाई करने और 15 दिनों के भीतर इसकी जानकारी जन शिकायत कोषांग को देने को कहा गया है. साथ ही मुख्यमंत्री को भी मामले से अवगत कराने का निर्देश दिया गया है.
141 पदों के लिए निकला था विज्ञापन
नगर विकास एवं आवास विभाग ने JUIDCO के माध्यम से संविदा पर जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2018 में आवेदन मांगे थे. कुल 141 पदों में सिविल के 93, विद्युत के 23 और यांत्रिक के 25 पद थे. आवेदन के लिए 2,000 रुपये शुल्क तय किया गया था. अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने तय समय पर आवेदन किया और फीस भी जमा की, लेकिन इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी.
इस भर्ती से जुड़े विज्ञापन में संख्या 01/सा० स्था०-41/2017 और विभागीय संकल्प संख्या 2304 का उल्लेख है. सात साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी नियुक्ति पर फैसला नहीं होने से अभ्यर्थी परेशान हैं.
कई बार गुहार, फिर भी नहीं निकला रास्ता
अभ्यर्थी संजय कुमार के मुताबिक, नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया गया. आवेदन और जरूरी दस्तावेज भी सौंपे गए, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मुद्दे को समाचार-पत्रों में भी उठाया गया. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी.
इसके बावजूद भर्ती की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई. अभ्यर्थियों को अब तक यह जानकारी नहीं मिल सकी है कि नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या नहीं.
अभ्यर्थियों की चिंता सिर्फ भर्ती में देरी तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि सात साल से ज्यादा समय बीतने के कारण कई लोग निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच गए हैं. ऐसे में देरी जारी रही, तो नौकरी पाने का मौका ही हाथ से निकल सकता है. लंबे इंतजार ने उनकी आर्थिक और पेशेवर योजनाओं को भी प्रभावित किया है.
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