जोहार लाइव ब्यूरो
जेपीएससी द्वारा विभिन्न परीक्षाओं में धांधली को लेकर जांच कर रही सीआईडी के समक्ष जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. सीआईडी को पहली बार श्वेता गुप्ता ने कुछ नहीं बताया था, लेकिन दूसरी बार की पूछताछ में इसने कई जानकारियां दी है.
श्वेता गुप्ता ने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में बताया है कि जब जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए और लगातार अपनी छुट्टी बढ़ाने लगे तब मुझे जेपीएससी के अध्यक्ष एल ख्यांगते ने उनके रूटिंग कार्यों को करने का आदेश दिया था. लेकिन जब असीम की कोटा का ट्रांसफर कार्मिक में वेटिंग फॉर पोस्टिंग हो गया, तब मुझे परीक्षा नियंत्रक का दायित्व अध्यक्ष ने लिखित रूप से 8 जून 2025 को दिया.
अध्यक्ष ने ही मुझे 11वीं से 13वीं जेपीएससी इंटरव्यू कराने का जिम्मा दिया. जबकि पीटी और मेंस असीम किस्पोट्टा ने कराया था. इंटरव्यू के दौरान ही लोकेश मिश्रा की पोस्टिंग परीक्षा नियंत्रण के पद पर हो गई. लेकिन लोकेश मिश्रा योगदान देने के बाद तुरंत छुट्टी पर चले गए और अपनी छुट्टी बढ़ाने लगे जिसके कारण फिर से मुझे अध्यक्ष ने परीक्षा नियंत्रक का कार्य सौंपा गया.
लोकेश मिश्रा के वापस आने के बाद वह परीक्षा नियंत्रक का कार्य करने लगे, लेकिन इसके बावजूद अध्यक्ष ने मुझे 11वीं से 13वीं जीपीएससी रिजल्ट देखने का दायित्व सौंपा और और दस्तावेज वेरिफिकेशन के लिए उपसचिव सरोजिनी तिर्की की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया. इस दौरान लोकेश मिश्रा फिर से छुट्टी पर चले गये और इसी दौरान उनका ट्रांसफर कार्मिक विभाग में वेटिंग फॉर पेस्टिंग हो गया.

इसके बाद अध्यक्ष ने फिर से श्वेता गुप्ता को ही परीक्षा नियंत्रण का कार्य सौंप दिया. इसके बाद 11वीं से 13वीं का जेपीएससी का रिजल्ट श्वेता और सुमंत तिर्की के देखरेख में प्रकाशित हुआ.
श्वेता गुप्ता के बयान के मुताबिक, मैं रिजल्ट प्रकाशित नहीं करना चाहती थी. क्योंकि मैं पीटी और मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं थी. लेकिन अध्यक्ष ने मुझसे कहा कि मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू का अंक जोड़कर रिजल्ट प्रकाशित कर दो. इसके बाद मेरे द्वारा रिजल्ट तैयार कर अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत किया गया और जेपीएससी के तीनों सदस्य अजीत भट्टाचार्य, एनिमा हांसदा और डॉ जमाल अहमद को स्क्रुटनी के लिए भेजा गया. दस्तावेज का सत्यापन और क्लीयरेंस मिलने के बाद रिजल्ट सेक्रेटरी के पास भेजा गया और अध्यक्ष के कहने पर रिजल्ट प्रकाशित किया.
श्वेता ने आगे अपने बयान में जानकारी दी है कि वो टीडीपीएल के सभी कर्मियों से परीक्षा संबंधी कार्य नहीं करती थी. ओएमआर शीट में परिवर्तन तथा लिखित परीक्षा से संबंधित कार्य केवल टीडीपीएल के कर्मी मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद इबाद, संजय कुमार, हेमंत कुमार तथा कंपनी के निदेशक रामवीर और सतपाल से करवाती थी.
ओएमआर शीट में हेरा फेरी किए जाने के उपरांत ओएमआर शीट की स्कैनिंग प्रमोद कुमार तिवारी करता था. इसके बाद लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग भी प्रमोद तिवारी करता था. श्वेता गुप्ता के द्वारा अपने बयान में इस पूरे कारनामे को अंजाम देने के लिए सहयोगी के रूप में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते का भी नाम लिया गया है.

श्वेता से सीआईडी ने पूछे 15 सवाल, जवाब में अध्यक्ष को बताया जिम्मेवार
श्वेता से सीआईडी की टीम ने अभी तक कल 15 सवाल किए हैं. जिसे हम यहां आम लोगों की जानकारी के लिए प्रकाशित कर रहे हैं. सीआईडी के द्वारा सबसे महत्वपूर्ण सवाल जब श्वेता से यह पूछा गया कि जब रामवीर सिंह ने आपको बताया कि धर्मेंद्र उसे पर प्रश्न पत्र आउट करने का दबाव बना रहा है तो आपने क्या किया? इस सवाल के जवाब में श्वेता गुप्ता ने उत्तर दिया है कि रामवीर ने जो जानकारी मुझे दी थी, उसे मैं अध्यक्ष को दे दिया था ताकि वह इस संबंध में आवश्यक एवं उचित कार्रवाई कर सके.
वहीं टीडीपीएल के बारे में पूछे जाने पर श्वेता ने बताया कि कंपनी ब्लैकलिस्टेड थी, इसके बारे हमने जेपीएससी से मौखिक रूप से जानकारी प्राप्त की थी. जिसमें बताया गया था कि टीडीपीएल कंपनी ब्लैकलिस्टेड नहीं है. जहां तक टीडीपीएल के इंपैनलमेंट का प्रश्न है तो यह अध्यक्ष के आदेश पर किया गया था. हालांकि ये बात सही है कि मैंने उस कंपनी के फाइनेंशियल कोटेशन का अवलोकन किया था जो सही था. जिस जांच की बात हो रही है, वो टीडीपीएल से संबंधित नहीं, बल्कि किसी दूसरी कंपनी से संबंधित था और यह जांच का आदेश भी मौखिक रूप से दिया गया था, न कि लिखित में. टीडीपीएल को इंपैनल करने का निर्णय अध्यक्ष ने लिया था. मुझे केवल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फाइल आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था.
वहीं उस्मान को व्हाट्सएप पर प्रश्न भेजे जाने के सवाल पर उसने कहा, उस्मान रांची से बाहर रहता था परिणाम शीघ्र प्रकाशित करने की आवश्यकता होती थी. इसी कारण उसे व्हाट्सएप के माध्यम से उत्तर भेजी गई थी. वहीं स्कैनिंग रूप पर नियंत्रण के बारे में उसने बताया है कि स्कैनिंग रूम में लगे सीसीटीवी फुटेज का लाइव मॉनिटरिंग जेपीएससी के अध्यक्ष अपने मोबाइल से करते थे.
पेपर लीक के बारे में श्वेता गुप्ता ने बताया है कि रामवीर ने जानकारी दी थी कि धर्मेंद्र उस पर प्रश्न पत्र आउट करने का दबाव बना रहा है. तब रामवीर ने जो जानकारी मुझे दी थी, उसे मैने तत्काल अध्यक्ष के संज्ञान में ला दी थी ताकि वह इस संबंध में आवश्यक एवं उचित कार्रवाई कर सके.


