रांची. 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस मुख्यालय, रांची में आयोजित समारोह में झारखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में नक्सलवाद और अपराध के खिलाफ की गई कार्रवाई की उपलब्धियां साझा की. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि लगातार अभियान, पेशेवर रणनीति और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नक्सलवाद की चुनौती को काफी हद तक कमजोर किया गया है. साथ ही संगठित अपराध, मादक पदार्थ और साइबर अपराध के खिलाफ भी बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है.
नक्सल अभियान में 103 गिरफ्तार, 46 ने किया आत्मसमर्पण
पुलिस के अनुसार जनवरी से 5 अगस्त 2026 तक राज्य में 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 46 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 22 नक्सली पुलिस मुठभेड़ में मारे गए. गिरफ्तार नक्सलियों में एक करोड़ रुपये के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा शामिल है. वहीं मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में एक करोड़ रुपये के इनामी केंद्रीय कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल है.
अभियान के दौरान पुलिस ने 98 हथियार, 7470 कारतूस, 11 किलो विस्फोटक, तीन आईईडी और करीब छह लाख रुपये की लेवी बरामद की.
संगठित अपराध से नशे और साइबर क्राइम तक कार्रवाई
झारखंड पुलिस के मुताबिक जनवरी से जुलाई तक संगठित आपराधिक गिरोहों के 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इनके पास से 63 हथियार और 274 गोलियां बरामद की गईं. 50 अपराधियों के खिलाफ सीसीए की कार्रवाई भी की गई.
मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में जनवरी से जून तक 710 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसी अवधि में साइबर अपराध के मामलों में 486 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस ने 17 लाख रुपये से अधिक की राशि समेत कई अवैध वस्तुओं की बरामदगी की जानकारी दी.
आधुनिक वाहनों से पुलिसिंग मजबूत, डायल-112 का रिस्पांस टाइम घटा
पुलिस आधुनिकीकरण के तहत झारखंड पुलिस को 636 चार पहिया वाहन और 849 दो पहिया वाहन मिले हैं. पुलिस के अनुसार इससे कानून-व्यवस्था, त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया और जनसुरक्षा को मजबूती मिली है.

ERSS के तहत डायल-112 पर जनवरी में करीब 16 हजार शिकायतें दर्ज हुई थीं और पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम 9 मिनट 41 सेकंड था. जुलाई में शिकायतों की संख्या बढ़कर करीब 23 हजार हो गई, लेकिन औसत रिस्पांस टाइम घटकर 9 मिनट 12 सेकंड रह गया.
पुलिस कल्याण के क्षेत्र में भी जनवरी से जुलाई तक विभिन्न कोषों से पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दी गई. पुलिस मुख्यालय के अनुसार हजारों लाभार्थियों के लिए करोड़ों रुपये की सहायता स्वीकृत की गई, जबकि 153 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी गई है.
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