जोहार लाइव ब्यूरो
जोहार लाइव ने अपनी एक खबर में बताया था कि अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान के मुताबिक, ‘’11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा मैडम के साथ-साथ जेपीएससी चेयरमैन से संपर्क कर इंटरव्यू में सेटिंग कराई गई है. जिसमें उसके द्वारा आदित्य पांडेय नामक व्यक्ति से संपर्क कर अभ्यर्थी उपलब्ध कराया गया. आदित्य पांडेय ने अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और एल ख्यांगते से संपर्क कर चुने गए अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाए. इंटरव्यू में कुल सात प्रतिभागियों को लाभ पहुंचाया गया. जिसके एवज में प्रति कैंडीडेट 15 लाख रुपए वसूले गए.’’
उसने बताया, ‘’इस सेटिंग से पास हुए अभ्यर्थियों में पुलिस उपाधीक्षक रोबिन कुमार शामिल हैं. अब डीएसपी रोबिन कुमार ने पूरे मामले में अपना पक्ष रखा है. जोहार लाइव से संपर्क कर उन्होंने कहा कि जेपीएससी 7-10 में भी मैं बैठा था और इंटरव्यू तक पहुंचा था. उस दौरान साक्षात्कार में मुझे 62 नंबर मिले थे और मैं सफल नहीं हो पाया था.
वो आगे कहते हैं, मैं लगातार तीन साल मेहनत करता रहा. जिस मेघा कोचिंग सेंटर में मैं पढ़ता था, वहां मेरा ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर था. फिर 11-13वीं जेपीएससी में बैठा. जहां मुझे 66 नंबर आए. ये बात सही है कि मैं अजीता भट्टाचार्या मैडम की बोर्ड के सामने बैठा था. लेकिन पैसे देकर रिजल्ट हासिल करने की बात पूरी तरह निराधार और गलत है.
वो आगे कहते हैं, जब परिणाम आया तो मेरे गांव में कई लोग इस बात से परेशान हो गए कि मैं कैसे पास कर गया. लेकिन उन्हें और उनके जैसों को मेरी मेहनत कभी नजर नहीं आई. इस खबर के छपने से मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.
वहीं दूसरे डीएसपी शैलेष सिन्हा ने भी जोहार लाइव को फोन कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और वो मानहानी का केस करेंगे. बातचीत में आगे उन्होंने कहा, कि पुलिस के सामने दिए गए बयान को कोई साक्ष्य या सबूत नहीं माना जा सकता. मैं भी आगे अगर चाहूं तो किसी चोर को पकड़ कर आपका नाम उसके स्वीकारोक्ति बयान में डाल दूंगा.

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