विजय उरांव
भारत अब दुनिया के बड़े वित्तीय कारोबार को अपने देश में लाने की तैयारी तेज कर रहा है. गुजरात के गांधीनगर में बनी GIFT City इसी कोशिश का अहम हिस्सा है. यहां GIFT-IFSC को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विदेशी और भारतीय संस्थाएं बैंकिंग, बीमा, निवेश और पैसे से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय कारोबार कर सकें.
इसे आसान तरीके से ऐसे समझिए—अगर कोई भारतीय कंपनी विदेश से पैसा जुटाना चाहती है या कोई विदेशी कंपनी भारत से जुड़ा वित्तीय कारोबार करना चाहती है, तो हर काम के लिए उसे सिंगापुर या दुबई जैसे दूसरे देशों के वित्तीय केंद्रों पर निर्भर न रहना पड़े. GIFT-IFSC का मकसद ऐसी सुविधाएं भारत में ही उपलब्ध कराना है.
वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि GIFT-IFSC में दी गई मंजूरियों और रजिस्ट्रेशन की संख्या पिछले पांच साल में 110 से बढ़कर 1,193 हो गई है. मार्च 2021 में यह संख्या 110 थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 1,193 पहुंच गई.
क्या है GIFT-IFSC?
गुजरात के गांधीनगर में बनी GIFT City में एक खास वित्तीय केंद्र है, जिसे GIFT-IFSC कहा जाता है. GIFT-IFSC का पूरा नाम Gujarat International Finance Tec-City – International Financial Services Centre है. आसान भाषा में इसका मतलब है, ऐसा वित्तीय केंद्र जहां भारत और विदेश की कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकिंग, निवेश, बीमा और पैसे से जुड़ा कारोबार कर सकती हैं.
बैंकिंग और निवेश से जुड़ी सेवाओं में भी बढ़ोतरी
मार्च 2026 तक GIFT-IFSC में 37 बैंकिंग यूनिट, 217 फंड मैनेजमेंट संस्थाएं और 70 बीमा संस्थाएं थीं. इसके अलावा 869 दूसरी वित्तीय सेवाओं से जुड़ी संस्थाएं थीं. इनमें फिनटेक और फाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं. संसद के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक GIFT-IFSC में 652 संस्थाएं मौजूद थीं. इनमें 487 भारतीय और 165 विदेशी संस्थाएं थीं.

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?
GIFT-IFSC का असर आम आदमी को सीधे दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका मकसद देश में निवेश और कारोबार बढ़ाना और रोजगार के नए मौके पैदा करना है. अगर ज्यादा विदेशी बैंक, निवेश कंपनियां और दूसरी वित्तीय संस्थाएं भारत में काम करती हैं, तो उनके साथ बैंकिंग, तकनीक, कानून, अकाउंटिंग और दूसरी सेवाओं से जुड़े कारोबार भी बढ़ सकते हैं. इससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.
इसके साथ ही भारत की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए विदेश जाने की जरूरत कम हो सकती है. यानी जिस पैसे और वित्तीय कारोबार के लिए अभी भारत के बाहर के केंद्रों का इस्तेमाल होता है, उसका कुछ हिस्सा भारत में ही आने की कोशिश है.
सरकार ने क्या कदम उठाए?
GIFT-IFSC की निगरानी और विकास के लिए सरकार ने IFSCA नाम का एक अलग नियामक बनाया है. एयरक्राफ्ट और शिप लीजिंग, फंड मैनेजमेंट और दूसरी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा दिया गया है.
कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए Single Window System भी शुरू किया गया है. सरकार ने GIFT-IFSC से जुड़ी इकाइयों के लिए टैक्स में भी कई रियायतें दी हैं.

संसद के मुताबिक, GIFT-IFSC के बढ़ने से विदेशी निवेश आकर्षित करने, भारत में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कारोबार लाने, पूंजी जुटाने और सीमा-पार लेनदेन बढ़ाने में मदद मिल रही है. सीधी भाषा में कहें तो GIFT-IFSC भारत में बनाया जा रहा ऐसा वित्तीय केंद्र है, जहां दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों को लाकर भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश हो रही है.
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