आनंद दत्त
रांची : सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ कि अभय तिवारी ने जेपीएससी के अभ्यर्थियों को ब्लैकमेल कर वसूली करने के लिए एक सिंडिकेट तैयार कर रखा था. इस सिंडिकेट में उसके अलावा अन्य आरोपी भी शामिल रहे हैं. ब्लैकमेलिंग का सिंडिकेट इसलिए तैयार किया गया था ताकि अगर कोई परीक्षार्थी जेपीएससी की परीक्षा में सफल हो जाये, और परीक्षार्थी पैसा देने में आना कानी करें, तब संबंधित छात्र को ब्लैकमेल कर उससे पैसा की वसूली की जा सके.
इसके लिए एक पूरा गिरोह तैयार किया गया था. इसमें गिरोह के वैसे सदस्य जो एजेंट के काम करते थे और परीक्षार्थी को लाते थे, उन्हें कमीशन के रूप में अभय तिवारी के द्वारा पैसा भी दिया जाता था.
क्या था ब्लैकमेलिंग और वसूली का मॉडल
सीआईडी की जांच में आये तथ्यों के अनुसार भुगतान की रकम सुनिश्चित करने और उम्मीदवारों को ब्लैकमेल करने के लिए आरोपियों ने अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, रद्द किए गए चेक, हस्ताक्षरित खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए खाली ए-4 शीट अपने पास रखे थे. मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र इसलिए लिये जाते थे, ताकि अगर किसी छात्र की नौकरी लग जाये और पैसा नहीं दे तो मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण सत्यापन के क्रम में छात्र को नौकरी नहीं मिले. कैंसिल चेक इसलिए लिये जाते थे कि ताकि किसी छात्र के पैसा नहीं दिये जाने की स्थिति में चेक को बैंक में जमा कर इसके क्लियर नहीं होने पर संबंधित छात्र पर चेक बाउंस या अन्य मामले में केस दर्ज किया जा सकें. तीसरे खाली पेपर में हस्ताक्षर कराना सबसे महत्वपूर्ण था. क्योंकि इस पेपर में गिरोह के द्वारा किसी भी झूठी कहानी को गढ़ना सबसे आसान था, ताकि छात्र को इसके आधार पर ब्लैकमेल कर पैसे की वसूली की जा सकें.
जेपीएससी 14 वीं पीटी में 11 छात्रों से वसूली की हो चुकी है पुष्टि
सीआईडी की जांच में अभी तक जेपीएससी पीटी पास कराने के नाम पर 11 छात्रों से पैसों की वसूली की पुष्टि हो चुकी है. गिरोह के द्वारा 24 छात्रों को पीटी परीक्षा पास कराने के नाम पर शैक्षणिक प्रमाण पत्र, कैंसिल चेक और सादे कागजात पर हस्ताक्षर कराया गया था. लेकिन, इसमें से 11 छात्रों से 10-10 लाख के हिसाब से एक करोड़ दस लाख की वसूली हुई थी. बाद में अन्य छात्रों को उनका दस्तावेज लौटा दिया गया था. हालांकि, यह पूरा मामला 100 छात्रों को पीटी पास कराने से जुड़ा है, जिस पर सीआईडी की टीम आगे की जांच कर रही है.

