रांची: झारखंड में कैंसर मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है. इसके तहत मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में कैंसर डे-केयर और रेडिएशन की सुविधा बढ़ाई जाएगी. राज्य में छह स्थानों पर रेडिएशन सेंटर विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, वहीं रांची समेत राज्य के पांचों मेडिकल कॉलेजों में पीपीपी (PPP) मोड पर कैंसर डे-केयर और रेडिएशन सेंटर शुरू करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा. इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई.
छह जगहों पर रेडिएशन सेंटर और समूहों का गठन
जिला स्तर पर मरीजों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेजों को दो समूहों (ग्रुप्स) में बांटा गया है. पहले ग्रुप में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका को शामिल किया गया है, जबकि दूसरे ग्रुप में रांची, हजारीबाग और पलामू को रखा गया है. इन सभी सेंटरों में आधुनिक लीनैक (Linear Accelerator) मशीनें लगाई जाएंगी. इसके संचालन के लिए रेडिएशन विशेषज्ञ, तकनीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित मानवबल की आवश्यकता होगी.
बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य में ‘रेडियो फिजिसिस्ट’ की कमी रेडिएशन सेवा शुरू करने में एक बड़ी चुनौती है. मशीन खराब होने की स्थिति में मरीजों का इलाज बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मशीनों के नियमित रखरखाव पर भी विशेष रूप से मंथन किया गया.
पीपीपी मोड, डे-केयर मॉडल और अन्य आधुनिक सुविधाएं
मशीनों और तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था पीपीपी मोड पर करने पर विचार किया जा रहा है. डे-केयर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था को अलग-अलग रखा जाएगा. डे-केयर सेंटरों में मेडिकल अफसरों के जरिए सेवाएं देने की योजना है, जिसके लिए बिहार के डे-केयर मॉडल की तर्ज पर मेडिकल अफसरों को प्रशिक्षित कर सेवा संचालित करने का विचार है.
आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को निर्धारित पैकेज और दर के अनुसार इलाज मिलेगा, जबकि अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस (CGHS) की दरों को आधार बनाया जाएगा. इसके अलावा, रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पीपीपी मोड पर पेट स्कैन (PET Scan) की सुविधा बढ़ाने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई है.
कैंसर डे-केयर सेंटरों की सुचारू निगरानी के लिए रिम्स (RIMS) में एक कंट्रोल एंड कमांड सेंटर विकसित किया जा सकता है. पूरी योजना की निगरानी के लिए एक विभागीय समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रस्ताव तैयार करने, संसाधनों के आकलन, टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था पर पूरी नजर रखेगी. विभाग की ओर से भारत सरकार के बीजीएफ (BGF) कार्यक्रम के तहत भी प्रस्ताव भेजकर जरूरी स्वीकृति लेने की तैयारी की जा रही है.

