एक तरफ JPSC-JSSC परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़ा विवाद CID जांच के दायरे में है, तो दूसरी तरफ इसी विवाद का असर सोशल मीडिया तक पहुंच गया है. JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों का आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग, बदनामी और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर महिला चयनित अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि उनकी तस्वीरों और नाम के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ कर उन्हें अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.
कोर्ट के आदेश के बाद जेएसएससी-सीजीएल के चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी तो मिल गई, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और कुछ व्हाट्सऐप ग्रुपों में कथित तौर पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है. उनका दावा है कि इन प्लेटफॉर्म पर मुख्यमंत्री, मंत्री, CID, JPSC, JSSC-CGL और चयनित अधिकारियों के साथ उनके परिवारों को भी निशाना बनाया जा रहा है.
अभ्यर्थियों के मुताबिक, कई पोस्ट में अभद्र भाषा और गाली-गलौज के अलावा मीम और धमकी भरे संदेश भी पोस्ट किए जा रहे हैं. कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने टेलीग्राम के ‘Jharkhand Updates’, ‘JSSC JPSC Legal & Protest Hub’ और व्हाट्सऐप के कथित ‘JPSC JSSC Reform Manch’ जैसे ग्रुपों का नाम लेते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है.
‘नौकरी मिली, लेकिन डर खत्म नहीं हुआ’
इस पूरे विवाद का सबसे परेशान करने वाला पहलू महिला चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव हैं. प्रोजेक्ट भवन में ASO के पद पर कार्यरत एक महिला अधिकारी ने बातचीत में बताया कि परीक्षा और कोर्ट की लंबी लड़ाई के बाद उन्हें लगा था कि अब उनका संघर्ष खत्म हो गया है. लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर और नाम को लेकर चल रही कथित मुहिम ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
उन्होंने बताया कि उनकी तस्वीर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ कर उसे कुछ यूट्यूब चैनलों और अलग-अलग सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रसारित किया गया. इसके बाद उन्हें परिवार और परिचितों के सामने सफाई देने की स्थिति का सामना करना पड़ा.
महिला अधिकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के खिलाफ लगातार माहौल बनाया जाए तो उसका असर सिर्फ उसकी नौकरी या पेशेवर जिंदगी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि निजी और पारिवारिक जिंदगी पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के बाद अब कहीं भी बाहर निकलने से पहले उन्हें कई बार सोचना पड़ता है. उन्हें यह चिंता रहती है कि उनकी तस्वीर या नाम को लेकर फिर से कोई आपत्तिजनक पोस्ट या भ्रामक सामग्री सामने न आ जाए.
‘विवाद की कीमत चयनित अभ्यर्थी क्यों चुकाएं?’
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर किसी को विरोध या कानूनी लड़ाई लड़ने का अधिकार है, लेकिन इसका खामियाजा चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को कथित ऑनलाइन बदनामी के रूप में नहीं भुगतना चाहिए. अभ्यर्थियों ने प्रशासन से सोशल मीडिया पर धमकी, अभद्र टिप्पणी, फर्जी खबर और तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करने वाले अकाउंट और ग्रुपों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है.
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