दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स समिट हो रहा है, और भारत की मेजबानी में शी जिनपिंग सात साल बाद और पुतिन पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं. भारत की मेजबानी सिर्फ रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दोहरी रणनीति काम कर रही है. भारत अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है, वो भी वॉशिंगटन से सीधी टक्कर लिए बिना, और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इस मंच पर चीन अपनी आर्थिक ताकत के दम पर दबदबा न बना पाए. इन्हीं दो बड़ी शक्तियों के बीच भारत को अपनी शर्तों पर संतुलन बनाना है.
डॉलर से किनारा, लेकिन जंग नहीं
भारत का रुख साफ है. डॉलर को सीधी चुनौती देने का कोई इरादा नहीं, लेकिन डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए व्यावहारिक विकल्प तैयार करने की तैयारी पूरी है. यहीं पर सबसे दिलचस्प मोड़ आता है. रूस और चीन लंबे समय से एक साझा “ब्रिक्स करेंसी” की मांग करते रहे हैं, लेकिन भारत इस रास्ते पर नहीं चल रहा. इसके बदले भारत यूपीआई की कामयाबी पर आधारित इंटरऑपरेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को आगे बढ़ा रहा है, जिससे पेमेंट सिस्टम जुड़ें तो जरूर, लेकिन नियंत्रण भारत के हाथ में रहे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सिर्फ अमेरिका को संकेत भर नहीं, यह भारत की पूरी आर्थिक रणनीति की झलक है.
चीन को ड्राइविंग सीट से दूर रखने की चाल
भारत की सबसे तीखी चुनौती चीन को साधना है. रणनीति यह है कि चीन अपनी आर्थिक ताकत या कर्ज नीति के सहारे ब्रिक्स पर एकतरफा दबदबा न बना सके, इसलिए भारत मंच पर साथ तो बैठेगा, लेकिन नियंत्रण किसी एक देश के हाथ में नहीं जाने देगा. इसी सोच के साथ भारत खुद को पश्चिम या पूर्व के किसी खेमे में बंधे बिना ग्लोबल साउथ की एक जिम्मेदार आवाज के तौर पर पेश कर रहा है, और यही उसकी मल्टी-अलाइनमेंट रणनीति का असली मतलब है. ब्रिक्स, G20, क्वाड और SCO जैसे अलग-अलग दिखने वाले मंचों पर साथ-साथ मजबूत मौजूदगी बनाए रखना. व्यापार के मोर्चे पर भी भारत का जोर आपसी कारोबार बढ़ाने पर है, लेकिन इस शर्त के साथ कि कोई भी सदस्य देश सिर्फ चीन पर निर्भर न हो जाए. हालांकि भारत के सामने सबसे बड़ी परीक्षा यह भी है कि पश्चिमी देश ब्रिक्स को अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ नए शीत युद्ध के अखाड़े के तौर पर न देखने लगें.
आखिर ब्रिक्स क्या है और अब इसमें कौन-कौन है
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका पांच देशों से हुई थी. 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जुड़े और 2025 में इंडोनेशिया भी शामिल हो गया, जिससे अब ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देश हैं. इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को पार्टनर कंट्री का दर्जा मिला है. भारत, ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका मिलकर दुनिया की करीब आधी आबादी, 40 फीसदी ग्लोबल जीडीपी और 26 फीसदी विश्व व्यापार का हिस्सा हैं. यही वो असली वजन है जिसकी वजह से यह मंच अमेरिका और यूरोप के लिए भी अनदेखा करना मुश्किल है.
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी इसकी अध्यक्षता कर चुका है. भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली, और यह वही साल है जब ब्रिक्स को बने हुए बीस साल पूरे हो रहे हैं.
समिट में कौन-कौन दिल्ली पहुंच रहा है?
शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालेद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समिट में पहुंच रहे हैं, जबकि ब्राजील की तरफ से विदेश मंत्री मौरो विएरा शिरकत कर रहे हैं. पार्टनर देशों में से बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनल, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और युगांडा की उप-राष्ट्रपति जेसिका अलुपो अपनी मौजूदगी की पुष्टि कर चुके हैं, और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस को भी न्योता दिया गया है.
दोनों दिन का शेड्यूल क्या है
12 सितंबर की शुरुआत सिर्फ ब्रिक्स के सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे में बैठक से होगी. दोपहर 2:35 बजे “समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना” विषय पर बंद सत्र रखा गया है, शाम 4:25 बजे नेता भारत इनोवेट्स एग्जिबिशन देखने जाएंगे, 5:05 बजे भारत मंडपम में सामूहिक फोटो और पौधरोपण का कार्यक्रम होगा, और शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताओं के लिए डिनर की मेजबानी करेंगे. 13 सितंबर का दिन बड़ा है- इस दिन सदस्य देशों के साथ पार्टनर देशों और मेहमान देशों के नेता भी शामिल होंगे. सुबह 9:55 बजे नेताओं का आना शुरू होगा, 10:35 बजे ग्रुप फोटो होगी, और 10:50 बजे “रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इनक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ” थीम पर मुख्य ओपन सेशन होगा, जिसके बाद न्यू दिल्ली डेक्लेरेशन जारी करके समिट खत्म होगा.
एजेंडे में और क्या-क्या है?
BRICS भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि अपने ऊर्जा, आर्थिक और रणनीतिक हितों को साधने का जरिया है.
रूस: भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है. रूसी कच्चे तेल से भारत को सप्लाई और कीमत के मोर्चे पर फायदा मिलता है. साथ ही भारत स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहता है.
चीन: सीमा विवाद के बावजूद भारत संवाद के रास्ते खुले रखना चाहता है. मकसद है सीमा पर तनाव को नियंत्रित रखना और आर्थिक व वैश्विक मुद्दों पर अपने हित सुरक्षित करना.
पश्चिम एशिया: सऊदी अरब, UAE और ईरान जैसे देशों के साथ भारत का फोकस तेल, व्यापार और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर है. क्षेत्रीय युद्ध का असर तेल की कीमत और भारत की सप्लाई चेन पर न पड़े, यह बड़ी चिंता है.
Global South: ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र जैसे देशों के साथ भारत विकासशील देशों की सामूहिक आवाज मजबूत करना चाहता है. इसके साथ UN, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधार की मांग भी आगे बढ़ाना चाहता है.

