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    Home»JPSC / JSSC»जेपीएससी घोटाले में शामिल होने से पहले बुद्धेश्वर था जमीन दलाल, हेमंत चलाता था खुद की कंपनी, उस्मान था सॉफ्टवेयर इंजीनियर
    JPSC / JSSC

    जेपीएससी घोटाले में शामिल होने से पहले बुद्धेश्वर था जमीन दलाल, हेमंत चलाता था खुद की कंपनी, उस्मान था सॉफ्टवेयर इंजीनियर

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkSeptember 13, 2026No Comments4 Mins Read3
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    किसलय शानू

    जेपीएससी घोटाले में आने से पहले गिरोह के बुद्धेश्वर भगत, हेमंत कुमार वर्मा और मो. उस्मान के जीवन की कहानी अलग थी. लेकिन बाद में जब सभी एक दूसरे के संपर्क में आ गए, तब सभी के जीवन का उद्देश्य एक ही था, जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में अधिक से अधिक कैंडिडेट को पास करा कर उनसे पैसे की वसूली की जा सके.

    जोहार लाइव की टीम ने जब इन तीनों के आरोपियों के प्रोफाइल के बारे में पता लगाने का प्रयास किया तो सबकी कहानी अलग–अलग निकली. लेकिन जेपीएससी घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी, रामवीर, सत्यपाल सिंह, तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांगते और परीक्षा उप-नियंत्रक श्वेता गुप्ता के कारण सभी का मुख्य काम एक ही हो गया, वह था जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में घोटाला करना.

    बुद्धेश्वर करता था जमीन ब्रोकर का काम

    बुद्धेश्वर मूल रूप से लोहरदगा जिले के बिजवाली गांव का रहनेवाला है. लेकिन वह वर्तमान में अरगोड़ा थाना क्षेत्र के न्यू पीपरटोली में रहता था. बुद्धेश्वर कंप्यूटर चलाना जानता था, लेकिन जब उसे कहीं नौकरी नहीं मिली तो वह नेशनल हेल्थ मिशन में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर संविदा के आधार पर काम करने लगा. इस पेशे के साथ-साथ वह जमीन की ब्रोकरी का भी काम करता था. इस कार्य से पहले 2001 में वह स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण कर 2001 से 2004 तक अपने गांव में ही रह कर ठेकेदारी का काम किया. साल 2006 से 07 तक लोहरदगा टाउन में जमीन खरीद-बिक्री का काम किया. कुछ रुपए कमाने के बाद वह अपनी पत्नी और बच्ची के साथ रांची आ गया.

    ये भी पढ़ें : UPPSC की तैयारी करता था टीडीपीएल का निदेशक रामवीर, जेपीएससी-जेएसएससी के घोटाले का सिंडिकेट बनाने से पहले 3 किरदार क्या करते थे

    नेशनल हेल्थ मिशन नामकुम मुख्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर संविदा में योगदान दिया, लेकिन जमीन का कारोबार नहीं छोड़ा. वह नौकरी के साथ-साथ जमीन ब्रोकरी का काम भी करता था. साल 2022 में जब वह अभय तिवारी के संपर्क में आया, तब वह अभय तिवारी के लिए काम करने लगा. अभय तिवारी नेशनल हेल्थ मिशन आउटसोर्सिंग का काम लेने के लिए टेंडर डालने गया था, उसी दौरान उसकी मुलाकात बुद्धेश्वर से हुई थी.

    हेमंत वर्मा चलाता था खुद की पिकार टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी

    जेपीएससी परीक्षा घोटाला में शामिल होने से पहले हेमंत वर्मा साल 2017 में अपने सहयोगी मो. उस्मान एवं मो. नासिर के साथ मिलकर पिकार टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनाया था. इस कंपनी से जब मो. नासिर ने रिजाइन कर दिया, तब इस कंपनी के डायरेक्टर सिर्फ हेमंत वर्मा और उस्मान बचे. यह कंपनी पहले मूल रूप से बैंकिंग के फील्ड में सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइड करने का काम करती थी.

    इस कंपनी ने साल 2013-14 में टीडीपीएल कंपनी के साथ काम किया था. इस वजह से इस कंपनी के दोनों अधिकारी सतपाल सिंह और रामवीर सिंह को जानते थे. इस कंपनी को जब उत्तर प्रदेश विधानसभा में सतपाल सिंह और रामवीर सिंह के जरिये काम मिला तो कंपनी को 3.5 लाख रुपया मिला. इस काम के बाद दोनों कंपनी के बीच का कनेक्शन समाप्त हो गया. लेकिन जून 2025 में फिर से पिकार कंपनी के अधिकारियों का संपर्क टीडीपीएल के अधिकारियों से हुआ और जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में घोटाले की योजना बनी.

    उस्मान था पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर

    जेपीएससी घोटाले का एक प्रमुख टेक्निकल मास्टरमाइंड उस्मान साल 2004 में मैट्रिक और 2006 में इंटर पास किया. बाद में उसने 2009 में इंग्लिश में ऑनर्स किया और 2010 में एडवांस डिप्लोमा इन हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग इंजीनियर की परीक्षा पास कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गया.

    वह 2010 से 2016 तक मेगा सॉफ्ट इनफॉर्मेशन सिस्टम नामक कंपनी में टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर के रूप में काम किया और 2017 में पिकार कंपनी बनाई. जून 2025 में रामवीर सिंह ने इसे फोन कर लखनऊ स्थित ऑफिस में बुलाया तब उस्मान अपने सहयोगी हेमंत के साथ वहां पहुंचा और झारखंड आकर टीडीपीएल कंपनी के लिए जेपीएससी घोटाले के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की योजना बनाई.

    Also Read : सीआईडी की जांच में खुलासा, जेपीएससी के अभ्यर्थियों को ब्लैकमेल कर वसूली के लिए अभय तिवारी ने तैयार किया था सिंडिकेट

    Johar @8 AM उस्मान जेपीएससी बुद्धेश्वर भगत हेमंत कुमार वर्मा
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