धनबाद के कतरास में रविवार सुबह अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने से दो महिलाओं की मौत की सूचना ने एक बार फिर कोयलांचल में चल रहे अवैध खनन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रामकनाली ओपी क्षेत्र के केशलपुर कुम्हारपट्टी में सुबह करीब सात बजे हुए हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है. तीन घायलों को बाहर निकालकर स्थानीय नर्सिंग होम में भर्ती कराने की बात सामने आई है.
लेकिन इस हादसे की सबसे अहम कड़ी यह है कि जिस केशलपुर में रविवार को चाल धंसी, उसी इलाके में कुछ महीने पहले ग्रामीणों ने अवैध कोयला खनन के खिलाफ आवाज उठाई थी और बड़े हादसे की आशंका जताई थी.
मई में ही ग्रामीणों ने बताया था, जमीन के नीचे चल रहा है खेल
जोहार लाइव की 21 मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, रामकनाली ओपी क्षेत्र के केशलपुर में अवैध कोयला खनन को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा था. ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि इलाके में लंबे समय से जमीन के नीचे चोरी-छिपे कोयला निकाला जा रहा है.
ग्रामीणों ने अवैध खनन स्थल पर पहुंचकर विरोध भी किया था. वहां कोयले से भरी बोरियां मिलने की बात सामने आई थी. लोगों ने इस तरह के खनन से इलाके में भू-धंसान का खतरा बढ़ने की आशंका जताई थी. यानी करीब चार महीने पहले ही केशलपुर के लोगों ने उस खतरे की तरफ इशारा कर दिया था, जिसकी तस्वीर रविवार को सामने आई.
प्रशासन ने कार्रवाई की, फिर अवैध सुरंग तक कैसे पहुंचे लोग?
यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि धनबाद में भू-धंसान और अवैध खनन की घटनाओं के बाद प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है. Johar Live की 3 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनारडीह में भू-धंसान के बाद SDM ने कई इलाकों में छापेमारी की थी. रामकनाली समेत दूसरे इलाकों में अवैध खनन के मुहानों को बंद कराने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद रविवार को केशलपुर में लोग अवैध सुरंग के भीतर कोयला काटने और चुनने के लिए पहुंचे थे. अब सवाल यह है कि अगर अवैध खनन के मुहाने बंद कराए गए थे, तो फिर उसी इलाके में नई सुरंगें कैसे बनीं और वहां तक लोगों की आवाजाही कैसे जारी रही?
CISF की सख्ती के बीच जमीन के नीचे जारी रहा कोयले का खेल
धनबाद में पिछले कुछ समय से कोयला चोरी के खिलाफ CISF की कार्रवाई और सख्ती को लेकर काफी चर्चा है. अवैध कोयला जब्ती और कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आती रही हैं. लेकिन कतरास की रविवार की घटना एक अलग तस्वीर दिखाती है. जमीन के ऊपर कार्रवाई और सख्ती की बातें हैं, लेकिन जमीन के नीचे अवैध खनन का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
यही इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल है. अगर CISF ने कोयला चोरी पर शिकंजा कस दिया है, तो फिर अवैध सुरंग में लोग कोयला काटने के लिए पहुंच कैसे गए? क्या कार्रवाई सिर्फ चोरी के कोयले की बरामदगी तक सीमित है, या उन अवैध खनन स्थलों को पूरी तरह बंद करने की भी व्यवस्था है जहां से कोयला निकाला जा रहा है?
कोयला चुनने वालों की जान पर भारी पड़ रही अवैध खदान
स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में कुछ लोग अवैध सुरंगों में जाकर कोयला काटते और चुनते हैं. इसके बाद कोयले को बाइक और दूसरे साधनों से आसपास के बाजारों तक पहुंचाया जाता है.
इस पूरे काम में सबसे बड़ा जोखिम उन लोगों का है जो सीधे सुरंग के भीतर जाते हैं. जमीन के नीचे बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के बनाई गई सुरंग कब धंस जाए, इसका कोई भरोसा नहीं होता. रविवार को भी कुछ महिला और पुरुष इसी तरह कोयला निकालने के लिए सुरंग में गए थे. अचानक चाल धंसने के बाद कई लोग मलबे में दब गए.
मलबे से दो महिलाओं को बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी. मृतकों में केवटकुली निवासी मुनिया देवी का नाम सामने आया है. दूसरे मृतक की पहचान को लेकर अलग-अलग जानकारी है. तीन घायलों को भी बाहर निकाले जाने की बात कही जा रही है. वहीं, स्थानीय लोग अभी भी कई और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जता रहे हैं.
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