रांची में अब दूसरे राज्यों से खनिज लेकर आने वाले ट्रकों और गाड़ियों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) यानी कि डिजिटल पास अनिवार्य करने की तैयारी चल रही है. सरकार का मकसद ये है कि बिना कागजों के खनिजों की हेराफेरी रुके और ऑनलाइन निगरानी रखी जा सके. लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या इस नए पास से झारखंड सरकार की कमाई भी बढ़ेगी?
इस सवाल के पीछे वजह हमारा पड़ोसी राज्य बिहार है. बिहार में जब से ISTP लागू हुआ है, सरकार को इससे अच्छा-खासा पैसा मिल रहा है. इसलिए झारखंड में ये नियम आने से पहले ये जानना दिलचस्प है कि बिहार में इससे कितनी कमाई हुई और झारखंड में क्या उम्मीद है.
आखिर ये ISTP है क्या?
सीधी भाषा में कहें तो ये एक डिजिटल पास है. अगर कोई ट्रक दूसरे राज्य से गिट्टी, पत्थर, बोल्डर या बालू लेकर झारखंड आएगा, तो सिर्फ दूसरे राज्य का चालान होने से काम नहीं चलेगा. उसे झारखंड के सिस्टम में भी अपनी गाड़ी का पूरा ब्योरा देकर ISTP बनवाना होगा.
इसमें गाड़ी का नंबर, खनिज का नाम, कितनी मात्रा में है, कहां से चला है और कहां जा रहा है, ये सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होती है. यानी यह खनिजों की आवाजाही पर नजर रखने का एक डिजिटल तरीका है. मुख्य रूप से यह नियम बालू, गिट्टी, बोल्डर, पत्थर और मोरम जैसे छोटे खनिजों पर लागू होगा.
चालान कटने के छह घंटे के भीतर बनाना होगा पास
नियम के तहत किसी दूसरे राज्य की माइनिंग साइट से खनिज का चालान जारी होने के बाद अधिकतम छह घंटे के भीतर ISTP जेनरेट करना होगा. निर्धारित समय-सीमा के भीतर पास नहीं बनवाने या बिना ट्रांजिट पास के खनिज लदा वाहन झारखंड की सीमा में प्रवेश करता पाया गया तो उसे अवैध खनिज परिवहन माना जाएगा. ऐसे वाहनों को तत्काल जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है.
बिहार में ISTP से हुई 58 करोड़ से ज्यादा की कमाई
बिहार ने 10 जून 2026 से दूसरे राज्यों से आने वाले ऐसे खनिज वाहनों के लिए ISTP अनिवार्य कर दिया था. इसके बाद से वहां सरकार की तिजोरी में अलग से पैसे आने लगे.
बिहार के खान विभाग के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच वहां कुल 984.99 करोड़ रुपये का राजस्व आया. इसमें से अकेले ISTP की वसूली 58.14 करोड़ रुपये थी. शुरुआत में बिहार सरकार ने सोचा था कि साल के बाकी महीनों में इससे 200 से 250 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो जाएगी. वहां इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल बना हुआ है, जहां कागजात और फीस भरने के बाद पास मिल जाता है.
Also Read : यूपी सरकार गुंडा एक्ट का दूरुपयोग कर रही है : इलाहाबाद हाईकोर्ट

