रांची. जिस खिलाड़ी ने कभी खेल के मैदान में झारखंड के लिए मेडल जीते, आज उसी के हाथ में झाड़ू है. झारखंड की खिलाड़ी सुनीता उरांव की मौजूदा स्थिति को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सुनीता का मामला उठाते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर खिलाड़ियों की अनदेखी का आरोप लगाया है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की खेल प्रतिभाओं, खासकर आदिवासी बच्चे-बच्चियों के साथ इसी तरह का सौतेला व्यवहार किया जाता है. उन्होंने कहा कि राज्य के लिए दो गोल्ड समेत पांच मेडल जीतने वाली बेटी के हाथों में आज मेडल की जगह झाड़ू थमा दी गई है. उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया.
प्रचार के लिए करोड़ों, खिलाड़ियों के लिए नौकरी नहीं
सुनीता के मामले को लेकर बाबूलाल मरांडी ने खेल विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि खेल आयोजनों में ई-रिक्शे में डीजल भरवाने से लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के प्रचार-प्रसार पर खेल विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर देता है.
बाबूलाल ने आरोप लगाया कि पूरा खेल विभाग खिलाड़ियों के हित और राज्य की खेल व्यवस्था सुधारने के बजाय मुख्यमंत्री की चरणभक्ति में लगा हुआ है.
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि जिस बेटी ने झारखंड के लिए मेडल जीते हैं, क्या उसका इतना भी अधिकार नहीं है कि उसे उसकी योग्यता के मुताबिक सम्मानजनक रोजगार मिले.
बाबूलाल मरांडी ने सरकार से सुनीता उरांव के लिए सम्मानजनक रोजगार की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास प्रचार-प्रसार और दूसरे कामों के लिए करोड़ों रुपये हैं तो सुनीता जैसी प्रतिभावान खिलाड़ी के सम्मान और भविष्य के लिए क्यों नहीं.
उन्होंने कहा कि सरकार को सुनीता के हाथ से झाड़ू हटाकर उनके हाथ में सम्मानजनक रोजगार देना चाहिए और उनकी प्रतिभा के साथ न्याय करना चाहिए.
दिल्ली से भी आया मदद का ऑफर
सुनीता उरांव का मामला सामने आने के बाद केडी कैंपस की नीतू सिंह ने भी एक वीडियो जारी कर उनकी मदद की पेशकश की है. नीतू सिंह ने खुद को झारखंड से बताते हुए कहा कि वह झारखंड की बेटी होने के नाते सुनीता की मदद करना चाहती हैं.
उन्होंने सुनीता से दिल्ली आने की अपील की और कहा कि उनके रहने और खाने के साथ-साथ इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी.
नीतू सिंह ने कहा कि यह सुनीता के लिए कोई दान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली आने के बाद सुनीता को अपनी कमाई करने के लिए बेहतर साधन और अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
उन्होंने सुनीता से अपनी ताकत और प्रतिभा पहचानने की अपील करते हुए कहा कि वह इंटरनेशनल लेवल की खिलाड़ी हैं और उनके लिए आगे बढ़ने की कई संभावनाएं हैं.
कौन हैं सुनीता उरांव?
सुनीता उरांव झारखंड की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही हैं. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया है. इन प्रतियोगिताओं में उन्होंने राज्य के लिए दो गोल्ड समेत कुल पांच मेडल जीते हैं. उन्होंने तमिलनाडु और राजस्थान में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है.
लेकिन खेल के मैदान में उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद सुनीता की जिंदगी में हालात नहीं बदले. रिपोर्ट के मुताबिक, वह पिछले करीब 8-9 वर्षों से रांची के मोरहाबादी स्थित खेल निदेशालय परिसर में सफाई का काम कर रही हैं. इसके बदले उन्हें करीब 10 हजार रुपये महीने मिलते हैं.
सुनीता का कहना है कि उन्हें सफाई का काम करना पसंद नहीं है, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण वह यह काम कर रही हैं. उन्होंने सरकार से खेल कोटे के तहत अपनी योग्यता के मुताबिक सम्मानजनक नौकरी देने की मांग की है.
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