झारखंड हाईकोर्ट ने 2500 से ज्यादा अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द किए जाने के मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप हैं और आपराधिक जांच चल रही है, लेकिन यह मान लेना सही नहीं होगा कि नियुक्त किए गए सभी अभ्यर्थी गड़बड़ी में शामिल थे. कोर्ट ने यह भी कहा कि कई अभ्यर्थी वास्तविक और निर्दोष हो सकते हैं, जिन्हें कथित गड़बड़ी के कारण नियुक्ति नहीं मिली.
मामला झारखंड हाईकोर्ट में W.P.(S) No. 6512 of 2026, सुभाष मुर्मू एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य से जुड़ा है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई.
सीलबंद लिफाफे में पेश हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट, राज्य ने मांगा चार सप्ताह का समय
15 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं. कोर्ट ने बताया कि मामले की सुनवाई पहली पाली में हुई थी. इसके बाद आपराधिक जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए मामले को दूसरी पाली में लिया गया.
राज्य की ओर से महाधिवक्ता ने जांच की स्टेटस रिपोर्ट/प्रोग्रेस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की. कोर्ट ने रिपोर्ट को खोलकर देखा और उसका अवलोकन किया. इसके बाद रिपोर्ट को दोबारा सीलबंद कर दिया गया.
अदालत ने कहा कि जांच की यह स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ले ली गई है. हालांकि, मामले की प्रकृति को देखते हुए इसे याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं के साथ साझा नहीं किया गया.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अभी तक काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं किया गया है. इसलिए इसके लिए कम से कम चार सप्ताह का समय दिया जाए.
राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता और महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आपराधिक जांच अभी जारी है. ऐसी स्थिति में काउंटर एफिडेविट दाखिल करना फिलहाल कठिन हो रहा है.
कोर्ट ने साफ किया, अभी जांच नहीं बल्कि आदेश की वैधता पर फैसला होगा
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा याचिका में उसका मुख्य सवाल नियुक्तियां रद्द करने वाले आदेश की वैधता या अवैधता से जुड़ा है.
कोर्ट ने कहा कि जिस विज्ञापन के आधार पर नियुक्तियां हुई थीं, उसे ही रद्द कर दिया गया है. ऐसे में उसके आधार पर हुई नियुक्तियां भी स्वतः प्रभावित हो गई हैं.
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप हैं और इस संबंध में आपराधिक जांच चल रही है.
लेकिन अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ जांच चलने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि नियुक्त किए गए सभी लोग गड़बड़ी में शामिल थे.
सभी नियुक्त अभ्यर्थी दोषी नहीं हो सकते
अदालत ने कहा कि यह भी सच है कि कई अभ्यर्थी वास्तविक और योग्य हो सकते हैं. ऐसे अभ्यर्थियों को भी कथित अनियमितता के कारण नियुक्ति नहीं मिल पाई हो सकती है. इसी वजह से मामले की आपराधिक जांच चल रही है.
कोर्ट की इस टिप्पणी को नियुक्त अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2500 से अधिक लोगों की नियुक्ति प्रभावित हुई है और उनके करियर पर सीधा असर पड़ा है.
जांच की रफ्तार पर कोर्ट ने जताई चिंता
हाईकोर्ट ने आपराधिक जांच की प्रगति पर भी टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि इतने गंभीर मामले में जांच तेज गति से होनी चाहिए.
कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ जांच तेज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अच्छी गति से आगे बढ़ना चाहिए. अदालत के मुताबिक, स्टेटस रिपोर्ट से पता चलता है कि शुरुआत में जांच काफी तेजी से आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में इसकी रफ्तार कम हुई है.
कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जांच में तेजी की जरूरत बताई.
18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे तय की है. इस मामले के साथ नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य मामलों को भी सूचीबद्ध किया गया है.
इनमें W.P.(S) Nos. 6450/2026, 6514/2026, 7137/2026, 6521/2026, 7106/2026, 7133/2026, 7134/2026, 7135/2026, 7136/2026, 6451/2026, 6452/2026, 6515/2026 और 6512/2026 शामिल हैं.
महाधिवक्ता को कानून के सवाल पर कोर्ट की मदद करनी होगी
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली तारीख तक मामले पर सरकार की ओर से उचित निर्देश नहीं मिलते हैं, तो महाधिवक्ता को अदालत की सहायता करनी होगी.
कोर्ट ने कहा कि आखिरकार उसे नियुक्तियों को प्रभावित करने वाली अधिसूचना की कानूनी वैधता या अवैधता पर फैसला करना है.
अदालत ने विशेष रूप से कहा कि इस मामले में 2500 से अधिक अभ्यर्थियों का करियर दांव पर लगा है. इसलिए मामले को केवल आपराधिक जांच के नजरिए से नहीं, बल्कि नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश की कानूनी स्थिति के आधार पर भी देखा जाएगा.
अंतरिम राहत फिलहाल जारी रहेगी
कोर्ट ने अपने पहले के आदेश के तहत दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया है.
यानी 15 सितंबर की सुनवाई के बाद भी पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा फिलहाल बरकरार रहेगी. अब 18 सितंबर की सुनवाई पर कोर्ट नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचना की वैधता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगा.
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