किसलय शानू
जेपीएससी घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल से जुड़े खुलासों की कड़ी में अब तक कई किरदारों की कहानियां सामने आ चुकी हैं. किसी ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान सिंडिकेट खड़ा किया, तो किसी ने नौकरी और कारोबार की आड़ में इस नेटवर्क में पैठ बनाई. गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल की इस कड़ी में अब उमेश कुमार, सुमन सौरभ और मो. एबाद की कहानी सामने है.
सीआईडी की जांच से स्पष्ट होता है कि घोटाले में शामिल लोगों की भूमिका और वजहें भले अलग थीं, लेकिन अफसर बनने की लालसा और पैसे की हवस ने सबको इस सिंडिकेट का हिस्सा बना दिया.
होटल बंद होने की वजह से अभय तिवारी के साथ जेपीएससी घोटाले में शामिल हुआ उमेश
जेपीएससी घोटाले के आरोपी उमेश कुमार तेतरी टोली, नामकुम का रहने वाला है. सीआईडी की गिरफ्त में आने से पूर्व उमेश सूचना भवन में कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम करता था. इसकी मुलाकात अभय तिवारी से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने के दौरान वर्ष 2017-2018 में हुई थी. जब अभय तिवारी प्रतियोगिता परीक्षा में सफल हो गया, तब भी उमेश से संपर्क बना रहा और दोनों ने मिलकर पार्टनरशिप में वर्ष 2020-21 में दो होटल सागर पैलेस, हरमू और स्टेशन रोड स्थित प्रकाश रेसीडेंसी खोला. कोरोना काल के बाद वर्ष 2022-2023 में अत्यधिक नुकसान होने के कारण दोनों होटल बंद हो गए. अभय तिवारी वर्ष 2025 में सीजीएल परीक्षा पास कर ऑफिसर बन गया. उमेश को जब पता चला कि अभय तिवारी जेपीएससी परीक्षा में सेटिंग करवा रहा है और इसमें पूरा फायदा होगा तब पैसे के लोभ के कारण उमेश भी अभय के लिए एजेंट का काम करने लगा.
प्रतियोगिता परीक्षा में नहीं मिली सफलता तो पैसों के बदौलत सुमन सौरभ बनना चाहता था ऑफिसर
सीआईडी द्वारा गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ हजारीबाग जिले के बड़कागांव का रहने वाला है. वर्ष 2010 से हजारीबाग में रहकर पढ़ाई कर रहा था और स्नातक होने के बाद वर्ष 2020 से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था. इसने दो बार सातवीं और ग्यारवीं जेपीएससी परीक्षा के अलावा सीजीएल की परीक्षा भी दी. लेकिन, वह सफल नहीं हुआ. सीजीएल परीक्षा में इसके बहुत सारे दोस्तों का चयन हो गया, लेकिन इसका चयन नहीं हो सका. जिसके कारण सुमन सौरभ परेशान रहने लगा. इस दौरान उसने यह सुना कि बिना पैसा और सेटिंग के चयन नहीं होगा तो उसने पैसों की बदौलत ऑफिसर बनना चाहा और अभय तिवारी के एजेंट के संपर्क में आकर 14 वीं जेपीएससी परीक्षा पास करने की योजना बना डाला.
पैसे के लालच ने फंसा दिया मो. एबाद को जेपीएससी घोटाले में
मो. एबाद ने बताया कि मैंने एमएसएस नाज इंटर कॉलेज से आईएससी पास करने के बाद के.एस.सी लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीसीए/एमसीए की पढ़ाई पूरी किया. जुलाई 2023 में पीकार टेक्नोलॉजी कंपनी में टेक्नीकल सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा था. यहां वेतन मात्र 12 हजार 500 रुपये प्रति माह मिल रहा था, जो काफी कम था. पीकार टेक्नोलॉजी कंपनी के डायरेक्टर मो. उस्मान जेपीएससी ऑफिस रांची में टेक्नीकल सपोर्ट इंजीनियर का काम करता था. उसने मुझे 18 हजार रुपये अपने साथ काम करने के लिए देने का आश्वासन दिया. इस वजह से मैने काम करने को तैयार हुआ. मुझे उस्मान जो भी काम का दायित्व देता उसे मैं पूरा करता था.

