Ranchi : झारखंड पुलिस मुख्यालय ने अनुसंधान कार्य कर रहे पुलिस पदाधिकारियों के लिए मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के नियमों में अहम बदलाव किया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर जारी नए आदेश के अनुसार अब राज्य में वर्तमान में अनुसंधान कार्य कर रहे सभी पुलिस पदाधिकारियों को प्रावधान के तहत स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाएगा।
पहले के नियम से कई अधिकारी हो रहे थे वंचित
पुलिस मुख्यालय द्वारा 17 मार्च 2025 को जारी पूर्व आदेश में यह शर्त रखी गई थी कि नया मोबाइल फोन केवल उन्हीं अनुसंधानकर्ताओं को मिलेगा जिनकी सेवा संपुष्ट हो चुकी हो और जिनकी सेवा अवधि में कम से कम चार वर्ष शेष हों। साथ ही यह भी कहा गया था कि जो अधिकारी पिछले दो वर्षों से लगातार अनुसंधान कार्य में नहीं रहे हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इन शर्तों के कारण कई जिलों से यह शिकायत मिली कि अधिकांश अनुसंधानकर्ता इन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं और योजना से वंचित हो रहे हैं।
गृह विभाग के संकल्प में नहीं था कोई अपवाद
इस मामले की समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा 27 जनवरी 2025 को जारी संकल्प में अनुसंधानकर्ताओं को स्मार्टफोन देने के लिए इस तरह की कोई अतिरिक्त शर्त नहीं रखी गई थी। इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहले जारी निर्देशों में आंशिक संशोधन करने का फैसला लिया।
अब सभी कार्यरत अनुसंधानकर्ताओं को मिलेगा मोबाइल
नए आदेश के अनुसार अब ऐसे सभी पुलिस पदाधिकारी जो वर्तमान में अनुसंधान कार्य कर रहे हैं, उन्हें प्रावधान के अनुसार स्मार्टफोन दिया जाएगा। हालांकि जिन अधिकारियों की सेवा अवधि छह महीने से कम बची है, उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
सेवा समाप्त होने पर फोन जमा करना होगा
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी त्यागपत्र देता है, स्वैच्छिक या अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेता है या फिर बर्खास्त होता है, तो उसे मोबाइल फोन संपत्ति शाखा में जमा कराना होगा और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
प्रतिधारण की स्थिति में होगी मूल्य गणना
यदि कोई अधिकारी मोबाइल फोन को अपने पास रखना चाहता है, तो इसके लिए विभागीय संकल्प के अनुसार फोन के मूल्यह्रास (Depreciation Value) की गणना की जाएगी। तय प्रक्रिया के बाद ही संबंधित अधिकारी को मोबाइल फोन हस्तांतरित किया जा सकेगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 17 मार्च 2025 के आदेश में दिए गए दिशा-निर्देशों को उपरोक्त सीमा तक संशोधित माना जाएगा, जबकि बाकी सभी निर्देश पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।
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