बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के NH-22 को 4-लेन में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है. करीब 82.578 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत किया जाएगा और इसे पूरा करने की अवधि करीब 30 महीने रखी गई है.
उत्तर बिहार को मिलेगी तेज कनेक्टिविटी
इस परियोजना के पूरा होने के बाद मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी और भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा तक आवाजाही पहले के मुकाबले तेज और सुगम होगी. यह मार्ग मुजफ्फरपुर को NH-27 और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ेगा, जिससे उत्तर बिहार के कई महत्वपूर्ण इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परियोजना को मंजूरी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तर बिहार में कनेक्टिविटी, आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगी और ‘समृद्ध बिहार’ के संकल्प को मजबूत करेगी.
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी फोरलेन परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं, बल्कि कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाए जाएंगे.
परियोजना के तहत:
• 82.578 किलोमीटर सड़क को 4-लेन मानक पर विकसित किया जाएगा.
• 7 मेजर ब्रिज बनाए जाएंगे.
• बागमती नदी पर करीब 340 मीटर लंबा पुल बनेगा.
• 3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण होगा.
• 2 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे, जिनकी लंबाई करीब 1,170 मीटर और 270 मीटर होगी.
• 6 व्हीक्युलर अंडरपास बनाए जाएंगे.
सड़क को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि औसत परिचालन गति करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का लक्ष्य है.
किन इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा?
इस हाईवे से मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुटाही और सोनबरसा जैसे इलाकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाला समय भी घटेगा.
सड़क बेहतर होने से वाहनों की संचालन लागत कम होने के साथ-साथ माल ढुलाई भी आसान होगी. इसका सीधा असर स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय व्यापार पर पड़ सकता है.
NH-22 का यह हिस्सा भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर और NH-27 से जोड़ता है. ऐसे में परियोजना सिर्फ स्थानीय आवागमन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सीमा क्षेत्र और उत्तर बिहार के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी. बेहतर सड़क से माल परिवहन तेज होने की उम्मीद है, जिससे लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी फायदा
परियोजना का असर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ने की उम्मीद है. मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर और सीतामढ़ी के पुनौरा धाम स्थित माता जानकी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी.
इसके अलावा यह परियोजना पीएम गति शक्ति के तहत चिन्हित आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक नोड्स से बेहतर कनेक्टिविटी बनाने में भी मदद करेगी.
कुल मिलाकर, NH-22 का यह फोरलेन प्रोजेक्ट उत्तर बिहार के लिए सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है. इससे यात्रा का समय घटने, ट्रैफिक दबाव कम होने, माल परिवहन आसान होने और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. परियोजना पूरी होने के बाद मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क पहले से कहीं ज्यादा तेज और बेहतर हो सकेगा.

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