I.N.D.I.A गठबंधन के सभी दल हुए एकजुट
इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में इंडी गठबंधन के लगभग सभी दलों के सांसद शामिल हैं। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।
ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए सात गंभीर आरोप
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त पर सात गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी गड़बड़ियों की जांच में बाधा डालने और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने जैसे आरोप शामिल हैं। खास तौर पर चुनावी सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए कई असली मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
ममता बनर्जी ने भी उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के जरिए असली मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल को फायदा पहुंच सकता है।
हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया काफी कठिन और लंबी होती है। संविधान के मुताबिक, उन्हें केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। फिलहाल जो नोटिस दिया गया है, उसमें इससे कहीं ज्यादा सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है।
प्रस्ताव पारित होने के लिए क्या जरूरी
यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश होता है, तो उसे पारित कराने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। जज (जांच) अधिनियम 1968 के तहत यदि प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति मिलकर एक जांच समिति का गठन करेंगे। यह समिति आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी।
सियासत में बढ़ सकता है टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह की पहल पहली बार हो रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज हो सकता है।