रांची : AJSU पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 और JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है. राज्य गठन के समय लोगों को उम्मीद थी कि प्राकृतिक संसाधनों से उनके जीवन में बदलाव आएगा. लेकिन आज भी खनिज संपदा वाले क्षेत्रों के लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है.
9D के तहत झारखंड को विशेष अनुमति देने की मांग
सुदेश महतो ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार मिला था. हालांकि MMDR अधिनियम में संशोधन के बाद राज्य सरकार इस अधिकार का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 9D के तहत केंद्र सरकार से विशेष अनुमति मांगी जा सकती है. AJSU की मांग है कि DMFT के पैटर्न पर राज्य को सेस लगाने की अनुमति दी जाए. साथ ही यह शर्त रखी जाए कि सेस से मिलने वाली राशि केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च हो.
खनिज राजस्व के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
सुदेश महतो ने राज्य सरकार पर खनिज क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व का सही इस्तेमाल नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र से जुड़े 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की खबरें सामने आ चुकी हैं. उन्होंने नौकरी की बिक्री और अवैध खनन के आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों से खनिज निकाला जाता है, वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए. उनका आरोप है कि सरकार उपलब्ध राशि का भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. सुदेश महतो ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध राशि का पूरा उपयोग नहीं हो सका. उन्होंने आदिवासी कल्याण के लिए निर्धारित राशि के खर्च का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जब सरकार उपलब्ध फंड खर्च नहीं कर पा रही है, तो फंड की कमी का तर्क देना उचित नहीं है.

झामुमो सरकार पर टकराव की राजनीति का आरोप
AJSU अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार राज्य की जनभावनाओं को टकराव की स्थिति की ओर ले जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में खनिज राजस्व के मुद्दे पर गंभीर है, तो उसे अपने तथ्यों और प्रस्ताव के साथ केंद्र सरकार के सामने पहल करनी चाहिए. सुदेश महतो ने खनिज उत्पादन में गिरावट का भी दावा किया. उन्होंने कहा कि यदि सेस से मिलने वाली राशि राज्य को नहीं मिलती है, तो झारखंड को बड़ी आर्थिक क्षति हो सकती है.
JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर भी सवाल
सुदेश महतो ने JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को अपने तरीके से मानने की कोशिश की है. लेकिन परीक्षा रद्द करने के फैसले पर कई सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला न्यायिक समीक्षा में टिकेगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है. उनका आरोप है कि सरकार ने छात्रों के साथ छल किया है.
सुदेश महतो ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी की जांच और परीक्षा रद्द करने का अधिकार स्वतंत्र जांच एजेंसी और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के दायरे में होना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार खुद परीक्षा रद्द करने का फैसला कैसे ले सकती है.
CBI जांच की मांग
सुदेश महतो ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि इसी सरकार की CID ने कोर्ट में यह कहा था कि अभ्यर्थियों को नौकरी दी जा सकती है. जबकि अब सरकार परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात कह रही है. उन्होंने कहा कि सरकार के रुख में विरोधाभास दिखाई देता है. ऐसे में छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है. सुदेश महतो ने कहा कि CBI जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है और छात्रों के बीच बने असमंजस को भी दूर किया जा सकता है.
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