जोहार लाइव ब्यूरो
टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल), वह परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी है जो झारखंड सरकार द्वारा राज्य कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षाएं रद्द करने के फैसले के केंद्र में है. साथ ही झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन यानी जेपीएससी की भी वो परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं जिसे टीडीपीएल ने आयोजित कराए थे.
टीडीपीएल को लेकर झारखंड सीआईडी की ओर से कार्रवाई का दौर लगातार जारी है. इधर बीते मंगलवार 18 जुलाई को सीआईडी ने यूपी के लखनऊ स्थित कंपनी के कार्यालय पर छापेमारी की, जिसमें कंपनी के कामकाज से संबंधित कई दस्तावेज बरामद किए. साथ ही कंपनी के कार्यालय को फिलहाल सील कर दिया गया.
मिली जानकारी के मुताबिक कंपनी के एक निदेशक रामवीर सिंह को झारखंड सीआईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. वहीं दूसरे निदेशक सत्यपाल सिंह की गिरफ्तारी में सीआईडी कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर रही है.
कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) के रिकॉर्ड में दर्ज टीडीपीएल के ‘‘मुख्य कार्यालय’’ लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा स्थित आदर्श कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर दो कमरों में संचालित था. हालांकि स्थापना के वक्त इसका मुख्य कार्यालय कानपुर हुआ करता था. लखनऊ के मड़ियांव थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर शिवानंद के मुताबिक झारखंड पुलिस के पांच कर्मचारी लखनऊ आए थे और उन्होंने टीडीपीएल कार्यालय में तलाशी लेने के लिए स्थानीय पुलिस से सहयोग मांगा था.
शिवानंद ने कहा, ‘‘वे तलाशी वारंट के साथ आए थे और लखनऊ पुलिस ने अभियान में उनकी सहायता की. झारखंड पुलिस ने परिसर की तलाशी ली और कार्यालय को सील कर दिया. उन्होंने कई दस्तावेज भी जब्त किए. तलाशी के दौरान कार्यालय में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था.’’
आरओसी रिकॉर्ड के मुताबिक, टीडीपीएल की स्थापना जुलाई 2010 में राम बीर, सत्य पाल और मोहम्मद तारिक ने मिलकर की थी. मोहम्मद तारिक वर्ष 2013 में कंपनी से अलग हो गए थे. कंपनी द्वारा 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए 29 अगस्त 2025 को दाखिल की गई नवीनतम घोषणा के अनुसार, राम बीर सिंह और सत्य पाल कंपनी के एकमात्र प्रमोटर हैं. दोनों के पास 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसमें प्रत्येक के पास 5,000 इक्विटी शेयर हैं. कंपनी ने अपने यहां 965 कर्मचारियों के होने की जानकारी दी है और बताया है कि ये सभी पुरुष हैं.
आरओसी रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में टीडीपीएल का संचालन से कुल राजस्व 19.62 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2023-24 में यह 5.23 करोड़ रुपये था. वर्ष 2024-25 में कर चुकाने के बाद कंपनी का कुल लाभ 48.54 लाख रुपये रहा. कंपनी की अधिकृत पूंजी 16 लाख रुपये थी और आरओसी रिकॉर्ड के मुताबिक, कंपनी की आखिरी बोर्ड बैठक 15 फरवरी 2025 को हुई थी. वित्त वर्ष 2024-25 में राम बीर और सत्य पाल ने 18.60-18.60 लाख रुपये वेतन लिया.
यूपी में भर्ती घोटाले में शामिल रही है कंपनी
कंपनी का कथित अनियमितताओं और ‘‘भाई-भतीजावाद’’ से जुड़ा एक संदिग्ध रिकॉर्ड रहा है, जिसकी कड़ियां पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक जाती हैं. पिछले महीने झारखंड पुलिस की सीआईडी ने सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में राम बीर और टीडीपीएल के कुछ प्रमुख कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था. सूत्रों के अनुसार, सत्य पाल का फिलहाल कोई पता नहीं चल पाया है. टीडीपीएल ने मंगलवार को टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021-22 में टीडीपीएल उन तीन कंपनियों में शामिल थी, जिसने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों में प्रशासनिक पदों की 186 रिक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित कराई थीं. इससे पहले नवंबर 2024 में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में पाया गया था कि इन नौकरियों में से करीब पांचवां हिस्सा वीवीआईपी और उन अधिकारियों के रिश्तेदारों को मिला, जिनकी निगरानी में परीक्षाएं आयोजित की गई थीं. इनमें टीडीपीएल के निदेशक राम बीर सिंह और सत्य पाल सिंह के कम से कम पांच रिश्तेदार भी शामिल थे.
उत्तर प्रदेश के इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने टीडीपीएल से जुड़ी अनियमितताओं को ‘‘चौंकाने वाला’’ बताया था. अदालत ने परीक्षाओं की ‘‘निष्पक्षता और ईमानदारी’’ पर सवाल उठाते हुए ‘‘भाई-भतीजावाद’’ की आशंका जताई थी और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी.
हाईकोर्ट ने परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता की कमी को भी रेखांकित किया था. नतीजे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की गई और कुल आवेदकों की संख्या भी अज्ञात रही. बाद में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश को रद्द कर दिया था, हालांकि मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है.
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा की भर्ती प्रक्रिया का ठेका केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज (बीईसीआईएल) को दिया गया था. बीईसीआईएल ने भर्ती परीक्षा आयोजित कराने के लिए टीडीपीएल को नियुक्त किया था.
उत्तर प्रदेश प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा विधानसभा भर्ती मामले की सुनवाई शुरू करने के बाद से कंपनी को परीक्षा आयोजित कराने के लिए कोई सरकारी ठेका नहीं दिया गया है.
राम बीर और सत्य पाल चार अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं—स्माइलिंग डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, एलकेओ फूड एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, केएसआर इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीमलॉजिक्स इन्फोटेक लिमिटेड.
इस बीच, उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि राम बीर और सत्य पाल एक अलग भर्ती मामले में जमानत पर हैं. यह मामला वर्ष 2019 में ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ओर से मार्च 2021 में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था. रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों को 7 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी.

