जोहार लाइव ब्यूरो
बिहार के मुजफ्फरपुर में AK-47 राइफल और जिंदा कारतूस बरामदगी से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक और फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है. NIA ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मुजफ्फरपुर के साहेबगंज निवासी भैरव त्रिपाठी, पिता जगत नारायण त्रिपाठी को गिरफ्तार किया. एजेंसी के मुताबिक भैरव त्रिपाठी इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर सह-आरोपियों के साथ मिलकर प्रतिबंधित और अत्याधुनिक हथियारों की तस्करी की साजिश में शामिल होने का आरोप है.
NIA के अनुसार यह कार्रवाई RC-11/2024/NIA/DLI मामले में की गई है.यह मामला मुजफ्फरपुर के फकुली थाना क्षेत्र में AK-47 राइफल और जिंदा गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है. जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने नागालैंड से बिहार तक अत्याधुनिक प्रतिबंधित हथियारों और राइफलों की तस्करी की योजना बनाई थी. इस साजिश का उद्देश्य सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को प्रभावित करना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना था.
मुर्गाटिया पुल के पास मिली थी AK-47
मामले की शुरुआत 7 मई 2024 को हुई, जब फकुली थाना पुलिस ने मुर्गाटिया पुल के पास एक AK-47 राइफल, उसके साथ लेंस और जिंदा गोला-बारूद बरामद किया था.इस बरामदगी के बाद फकुली थाना कांड संख्या 19/2024 दर्ज किया गया और शुरुआती कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था.
बाद में मामले की गंभीरता और हथियारों की तस्करी से जुड़े संभावित नेटवर्क को देखते हुए NIA ने 5 अगस्त 2024 को इस केस को अपने हाथ में लेते हुए RC-11/2024/NIA/DLI के रूप में जांच शुरू की.
जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपियों के बीच कथित साजिश, हथियारों की आपूर्ति और नेटवर्क से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की.जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया.
कई चरणों में दाखिल हुई चार्जशीट
NIA ने जांच के दौरान इस मामले में अलग-अलग चरणों में कई पूरक आरोपपत्र दाखिल किए हैं. एजेंसी ने 8 मई 2025 को पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की थी.इसमें विकास कुमार, सत्यम कुमार, देवमणि राय और अहमद अंसारी को आरोपी बनाया गया था. इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 13 और 18 के तहत आरोप लगाए गए.
इसके बाद NIA ने 20 फरवरी 2026 को दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की। इसमें मंजूर खान को आरोपी बनाया गया.उसके खिलाफ IPC की धारा 120बी, Arms Act की धाराओं 25(1AA), 26 और 35 तथा UAPA की धाराओं 13 और 18 के तहत आरोप लगाए गए.
जांच एजेंसी ने इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को तीसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की. इसमें कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत को आरोपी बनाया गया.उसके खिलाफ भी आपराधिक साजिश, Arms Act और UAPA की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए.
हथियारों की तस्करी की साजिश पर जांच का फोकस
NIA की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि AK-47 जैसी प्रतिबंधित और अत्याधुनिक राइफल बिहार तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क सक्रिय था. एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने नागालैंड से बिहार तक हथियारों की तस्करी की साजिश रची थी.

इस मामले में भैरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह कथित साजिश में शामिल होने के बाद फरार था.अब उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी उससे हथियारों की खरीद, परिवहन, आपूर्ति और अन्य आरोपियों के साथ उसके संपर्कों के बारे में पूछताछ कर सकती है.
आगे भी जारी रहेगी जांच
NIA ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है. इसका मतलब है कि एजेंसी अभी हथियारों की बरामदगी के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
AK-47 जैसी प्रतिबंधित राइफल की बरामदगी और नागालैंड से बिहार तक हथियारों की कथित तस्करी का कोण इस मामले को गंभीर बनाता है.अब भैरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, हथियारों की सप्लाई किसके निर्देश पर हुई और इस पूरी कथित साजिश से और कौन-कौन लोग जुड़े थे.
फिलहाल NIA की कार्रवाई से मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और जांच का दायरा दोनों बढ़े हैं.आने वाले दिनों में भैरव त्रिपाठी से पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है.
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