जोहार लाइव ब्यूरो. चाईबासा
पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक मनीष कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), जमशेदपुर की टीम ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है. आरोप है कि थाना प्रभारी ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले से एक व्यक्ति के भाई का नाम हटाने के एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई. इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर ट्रैप कार्रवाई की गई और 20 अगस्त को आरोपी थाना प्रभारी को 15 हजार रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया गया.
एसीबी से संबंधित दस्तावेज के अनुसार, बंदगांव थाना क्षेत्र के कारिका निवासी बिजराय मुंडू ने पुलिस अधीक्षक, एसीबी, जमशेदपुर को लिखित शिकायत दी थी. शिकायतकर्ता के अनुसार, बंदगांव थाना कांड संख्या 07/2025 एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है. इस मामले में उसके बड़े भाई लाचो मुंडू उर्फ गुजु का नाम शामिल है.
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मामले से लाचो मुंडू का नाम हटाने के लिए थाना प्रभारी मनीष कुमार ने 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की. रिश्वत देने से इनकार करने के बाद शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया.
सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि
शिकायत मिलने के बाद एसीबी जमशेदपुर की टीम ने मामले का सत्यापन कराया. सत्यापन के दौरान मनीष कुमार द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई. दस्तावेज के मुताबिक, इस दौरान 15 हजार रुपये रिश्वत मांगे जाने की बात सामने आई.
सत्यापन रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर एसीबी, जमशेदपुर थाना कांड संख्या 04/2026 दर्ज किया गया. प्राथमिकी 19 अगस्त 2026 को दर्ज हुई. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधित अधिनियम, 2018 की धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया.
ट्रैप कर 15 हजार रुपये लेते पकड़ा
एफआईआर दर्ज होने के बाद एसीबी ने ट्रैप की कार्रवाई की. योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम के साथ भेजा गया. बंदगांव थाना प्रभारी मनीष कुमार जैसे ही 15 हजार रुपये रिश्वत की रकम लेते हैं, एसीबी की टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी 20 अगस्त 2026 को हुई. एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिश्वत की कथित मांग एक आपराधिक मामले से आरोपी का नाम हटाने के एवज में की गई थी. एसीबी ने पहले शिकायत का सत्यापन किया, रिश्वत मांगने की पुष्टि के बाद प्राथमिकी दर्ज की और फिर ट्रैप कार्रवाई के जरिए थाना प्रभारी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया.
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