जोहार लाइव ब्यूरो: झारखंड
जेएसएससी द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा की जांच के लिए गठित एसआइटी का विस्तार डीजीपी तदाशा मिश्रा ने किया है. इससे संबंधित आदेश उन्होंने जारी कर दिया है. पूर्व की एसआइटी में अध्यक्ष के रूप में आइजी एसटीएफ अनूप बिरथरे थे. इनके अलावा सदस्य के रूप में डीआइजी वाइएस रमेश और केस के अनुसंधानक की जिम्मेवारी स्पेशल ब्रांच के एसपी एचपी जर्नादन को दी गयी थी.
अनुसंधान में इन्हें सहयोग सीआइडी की टीम कर रही थी. लेकिन अब एसआइटी में तीन नये आइपीएस को शामिल किया गया है. इसमें एक का नाम सीआइडी के एसपी पूज्य प्रकाश, दूसरे का नाम आइपीएस निधि द्विवेदी और तीसरे एसआइबी के डीएसपी एसआइबी के एसपी सौरभ का नाम शामिल है. इसके अलावा टीम में सीआइडी और साइबर थाना प्रभारी के डीएसपी सहित 17 अन्य पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है.
आरोपी और पेपर लीक के जरिये बाहल लोग होंगे चिह्नित
जानकारी के अनुसार इस मामले में अभी तक एसआइटी कई लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के बाद उनके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी कर चुकी है. लेकिन हाल में सरकार सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया था.
जांच के दौरान अभय तिवारी ने अपने बयान में सीआइडी को बताया था कि वेबल एजेंसी टीडीपीएल कंपनी के डी इंपैनलमेंट के बाद जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का संचालन कर रही थी.वेबल एजेंसी का मालिक पटना निवासी मिथिलेश सिंह, जिसका पार्टनर खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक है. इसी उमाकांत प्रमाणिक से मेरा संपर्क हुआ और इसके माध्यम से मुझे जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के प्रश्नों का उत्तर पहले से मिल गया था.
मिथिलेश सिंह के सहयोगी राकेश सिंह के द्वारा बोकारो स्थिति क्वार्टर में मेरे अलावा 15 अन्य लोगों को पढ़ाया गया था. पश्नों को पढ़ाने के दौरान मिथिलेश और राकेश सिंह दोनों मौजूद थे.पश्नों का उत्तर पहले ही मिल जाने के कारण सीजीएल में मेरा रैंक 48 आया था. मेरे अलावा इस परीक्षा में मेरा भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी भी पास हुई थी. वेबल एजेंसी ने हमे 65 पश्नों का उत्तर रटाया था. इसके एवज में प्रति परीक्षार्थी से 12 लाख रुपये लिया गया था. अब एसआइटी जांच के दौरान पूरे केस में नये आरोपियों को चिह्नित करेगी, ताकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकें. इसके अलावा वैसे परीक्षार्थियों को चिह्नित करने का काम करेगी, जो पेपर लीक के जरिये पाय हुए थे, ताकि ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा सकें.
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