जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी भर्ती मामले में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच द्वारा किया गया यह दावा बेबुनियाद था कि सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अदालत में खामोश रहे और कोई भी बड़ा अधिकारी या महाधिवक्ता मौजूद नहीं था. हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सीनियर एएजी अच्युत केशव ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा है. जो महाधिवक्ता से एक पद नीचे के एडवोकेट हैं.
इससे पहले, गुरूवार 20 अगस्त को देर शाम रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र नेताओं ने आरोप लगाया था कि वे पिछले 26 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, जिसके बदले उन्हें केवल निराशा मिली है. मंच ने यह भी दावा किया था कि राज्य के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान न तो महाधिवक्ता और न ही कोई वरिष्ठ अधिवक्ता हाईकोर्ट में उपस्थित रहे, और सरकारी वकील ने कोर्ट रूम में एक शब्द तक नहीं कहा.
हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 11वीं से 13वीं जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने वाले आदेश की प्रति बताती है कि अदालत में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) अच्युत केशव द्वारा किया गया था.
हम हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और उसके बाद जारी ऑर्डर की कॉपी को हू-ब-हू सामने रख रहे हैं. पढ़िये ऑर्डर
झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में
डब्ल्यू.पी.(एस) संख्या 6452/2026
सोनम कुमारी … याचिकाकर्ता
बनाम
झारखंड राज्य एवं अन्य … प्रतिवादी
पीठ : माननीय न्यायमूर्ति दीपक रोशन
आदेश दिनांक : 20 अगस्त 2026
हिंदी अनुवाद
वर्तमान रिट याचिका याचिकाकर्ता द्वारा 18 अगस्त 2026 के मेमो संख्या 5404 में निहित अधिसूचना को रद्द करने और निरस्त करने के लिए दायर की गई है. उक्त अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार ने विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत आयोजित संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को एकतरफा रूप से रद्द कर दिया था.
याचिकाकर्ता की शिकायत है कि विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत उसकी विधिवत नियुक्ति हुई थी. हालांकि, 18 अगस्त 2026 की उक्त अधिसूचना के कारण अचानक पूरी परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी गई, जिसके परिणामस्वरूप उसकी सेवा भी समाप्त हो गई.

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने प्रस्तुत किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का कोई पालन नहीं किया गया। उनके निर्देश के अनुसार किसी दबाव के कारण संबंधित प्रतिवादियों ने यह कार्रवाई की है। इसलिए संबंधित अधिसूचना/आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए.
राज्य की ओर से वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव ने कहा कि अभी जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है. हालांकि, राज्य के विभिन्न नागरिकों द्वारा लगाए गए कई आरोपों के आधार पर अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) द्वारा गहन जांच शुरू कर दी गई है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं.
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के मुद्दे पर राज्य की ओर से कहा गया कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी. इसी कारण सरकार ने विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत हुई पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का सही निर्णय लिया.
मामले में कुछ हस्तक्षेप याचिकाएं भी दायर की गई हैं, लेकिन वे अभी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं. अधिवक्ता एस. रसिक सोरेन और कुमार हर्ष ने 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना को रद्द करने की मांग का जोरदार विरोध किया.
अधिवक्ता कुमार हर्ष ने इस न्यायालय के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें राजेश प्रसाद एवं अन्य का मामला खारिज कर दिया गया था और उन्होंने इसके खिलाफ अपील दायर की थी. हालांकि, तथ्य यह है कि इसी परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित इस न्यायालय के आदेश पर अब तक कोई रोक नहीं लगी है.
चूंकि हस्तक्षेप याचिकाएं अभी रिकॉर्ड पर नहीं हैं, इसलिए उन पर अगली सुनवाई की तारीख को विचार किया जाएगा.
दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना किसी नियमित नियुक्ति को बाधित या समाप्त नहीं किया जा सकता. चुनौती दिए गए आदेश में ऐसा कोई ठोस आधार या सामग्री नहीं दिखाई गई है, जो प्रतिवादियों द्वारा उठाए गए इस कठोर कदम को उचित ठहरा सके. साथ ही, जांच एजेंसी पहले से ही कार्रवाई कर रही है.
अंतरिम संरक्षण के मुद्दे पर न्यायालय ने कहा कि न्यायहित और सुविधा का संतुलन सर्वोपरि है. इस मामले में सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में है, क्योंकि प्रभावी रूप से उन्हें कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए बिना सेवा से हटा दिया गया है. न्यायालय ने यह भी कहा कि उक्त अधिसूचना का संचालन सार्वजनिक हित के भी विरुद्ध है.
इसलिए प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया जाता है कि वे जांच और उसमें हुई किसी भी आगे की प्रगति का विस्तृत विवरण देते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करें.
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी.
तब तक, विज्ञापन संख्या 01/2024 के संबंध में 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना संख्या 06/LO.S.A.-01-07/5404/2026 के संचालन, क्रियान्वयन और कार्यान्वयन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी.
वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया जाता है कि वे संबंधित विभाग को सूचित करें कि याचिकाकर्ता और अन्य समान रूप से प्रभावित व्यक्तियों को रिट याचिका के अंतिम निस्तारण तक अपना कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए.
हालांकि, मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता को एक हलफनामा/वचनपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है कि संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित अंतिम आदेश उन पर बाध्यकारी होगा और सरकार कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी.
(दीपक रोशन, न्यायमूर्ति)
दिनांक: 20 अगस्त 2026


