आनंद दत्त/किसलय शानू
जेपीएससी में विभिन्न परीक्षाओं में धांधली को लेकर जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते को 1 जनवरी 2026 को ही शिकायत मिल गई थी. यह शिकायत कर्नाटक थर्ड क्रॉस रोड निवासी सौरभ बर्मन ने की थी. जिसमें पूरे घोटाले के बारे में जानकारी दी गई थी.
लेकिन इस शिकायत के आधार पर आयोग के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. बल्कि मामले को दबा दिया गया. सीआईडी ने जांच के क्रम में इस शिकायत को हासिल कर के न्यायालय को सौंप दिया है.
शिकायत में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि TDPL से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR उत्तर पुस्तिकाओं और FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR उत्तर पुस्तिकाओं में विभिन्न स्थानों पर हेरफेर या बदलाव किया.
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इन गतिविधियों को शहर के अलग-अलग स्थानों से संचालित किए जाने की बात सामने आई है. साथ ही, प्रत्येक अभ्यर्थी से प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए लगभग 25 लाख रुपये तक की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है.
अध्यक्ष को इन बातों की दी गई जानकारी
जेपीएससी की ओर से आयोजित वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. आयोग के अध्यक्ष को दी गई एक औपचारिक शिकायत में परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) और उससे जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी.
शिकायत में OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर, डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में अनधिकृत बदलाव, अयोग्य अभ्यर्थियों को मेरिट सूची में शामिल कराने तथा परीक्षा में चयन के नाम पर कथित रूप से बड़ी रकम मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे.
यही नहीं, बल्कि FRO विज्ञापन संख्या 04/2024 और ACF विज्ञापन संख्या 03/2024 के तहत हुई परीक्षाओं की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे. आरोप है कि OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में अनधिकृत बदलाव के जरिए कुछ अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट सूची में शामिल कराया गया.
शिकायतकर्ता ने यह भी बताया था कि इस पूरी प्रक्रिया में TDPL से जुड़े कुछ कर्मियों और प्रोग्रामरों की भूमिका की जांच जरूरी है. इसके लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, डिजिटल कम्युनिकेशन लॉग, OMR डेटा, डिजिटल लॉग और CCTV फुटेज जैसे तकनीकी साक्ष्यों की जांच कराने का सुझाव दिया गया है.

सौरभ बर्मन ने जनवरी में ही अभय कुमार तिवारी का विशेष रूप से उल्लेख किया था. जिसमें उसने दावा किया गया था कि उनका नाम पहले नामकुम थाना कांड संख्या 45/2024 में आरोपी के रूप में सामने आया था. शिकायत के अनुसार यह मामला JSSC-CGL परीक्षा पेपर लीक से संबंधित है.
इसके साथ ही बर्मन ने शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्से ACF परीक्षा में संभावित कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट की तरफ भी अध्यक्ष का ध्यान इंगित किया था. बता दिया गया था कि अभय कुमार तिवारी स्वयं JPSC की FRO प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थी के रूप में शामिल हुए. शिकायत में उनका रोल नंबर, OTR नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर भी दर्ज होने का दावा किया गया है.
इसके अलावा शिकायत में कहा गया है कि वे ACF प्रारंभिक परीक्षा में भी अभ्यर्थी के रूप में शामिल हुए और उनका नाम परिणाम में आया। दूसरी ओर, शिकायत में उन्हें परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL से जुड़े व्यक्ति के रूप में बताया गया है।
टीडीपीएल के बारे में दी थी चेतावनी
शिकायत में कहा गया है कि TSR Data Processing Private Limited को जुलाई 2023 से चार वर्षों की अवधि के लिए JSSC द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र/दस्तावेज जमा करने और अनुचित एवं अव्यावहारिक दरें कोट करने के आरोप में डिबार किया गया था. शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि कंपनी की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और औचित्य को सक्षम प्राधिकारियों ने संतोषजनक नहीं पाया था.
यही बिंदु शिकायत को और गंभीर बनाता है, क्योंकि यदि किसी परीक्षा संचालन एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड में अनियमितताओं से जुड़े आरोप या कार्रवाई दर्ज रही हो, तो उसके बाद दूसरी संवेदनशील प्रतियोगी परीक्षा की जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया और उसके लिए किए गए ड्यू-डिलिजेंस की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
अभ्यर्थियों से दस्तावेज और चेक लेने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, OMR उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां, रद्द किए गए चेक, समझौते की रकम से जुड़े दस्तावेज, 1,000 रुपये के ब्लैंक स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए A-4 साइज के खाली कागज लिए जाने तक की जानकारी दे दी गई थी.
सौरभ बर्मन के अनुसार कथित अवैध गतिविधि लगातार तीन से चार महीने तक चलने का आरोप है. इसी के साथ परीक्षा परिणाम घोषित करने में पांच महीने से अधिक की देरी की जानकारी दे दी गई थी.
कुल 248 पदों की परीक्षा का मामला
शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार विज्ञापन संख्या 04/2024 और 03/2024 के तहत क्रमशः 170 और 78 पदों के लिए आवेदन/परीक्षा प्रक्रिया हुई थी. ऐसे में लगाए गए आरोपों का प्रभाव बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ता है.
शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा आगामी JPSC परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर अग्रिम रकम मांगे जाने की सूचना भी शिकायतकर्ता को मिली थी. इसमें 14वीं JPSC परीक्षा-2026 के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से लगभग 25 लाख रुपये लेने का दावा किया गया है.


