पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है. निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत राज्य में 13 तरह की योजनाओं पर काम हो रहा है. इनमें 112 हेल्पलाइन, सेफ सिटी प्रोजेक्ट, वन स्टॉप सेंटर, वीमेंन हेल्प डेस्क, एंटी ह्युमन ट्रैफकिंग युनिट और साइबर क्राइम से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं.
इन योजनाओं में One Stop Centre (OSC) यानी सखी सेंटर महिलाओं के लिए काफी अहम है. इसका मकसद हिंसा या किसी परेशानी का सामना कर रही महिलाओं को एक ही जगह पर कई तरह की मदद उपलब्ध कराना है.
क्या है वन स्टॉप सेंटर?
वन स्टॉप सेंटर योजना केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजना है. इसे 1 अप्रैल 2015 को निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत शुरू किया गया था. जिसमें घर, ऑफिस या किसी सार्वजनिक जगह पर शारीरिक, मानसिक, यौन या घरेलू हिंसा का सामना करने वाली किसी भी उम्र की महिला यहां मदद ले सकती है.
सबसे खास बात यह है कि महिला को मदद के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकना नहीं पड़ता. सखी सेंटर में चिकित्सा, कानूनी मदद, पुलिस सहायता और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं एक ही जगह मिलती हैं. जरूरत पड़ने पर महिला को 5 दिनों तक अस्थायी आश्रय भी दिया जा सकता है. महिलाएं सीधे सेंटर पहुंच सकती हैं या 181 महिला हेल्पलाइन के जरिए भी मदद मांग सकती हैं.
बंगाल में 24 सखी सेंटर चालू
पश्चिम बंगाल में फिलहाल 24 वन स्टॉप सेंटर्स काम कर रहे हैं. इनमें एक दार्जिलिंग और एक सिलीगुड़ी में है, जबकि बाकी 22 जिलों में एक-एक सेंटर है. सरकार के मुताबिक, अलिपुरद्वार को छोड़कर बाकी सभी सेंटर सरकारी अस्पतालों की इमारतों में चल रहे हैं. अलिपुरद्वार का वन स्टॉप सेंटर्स सुफल बांग्ला भवन में बनाया गया है.
इन सेंटरों में महिलाओं को जरूरत के हिसाब से मेडिकल जांच और इलाज, कानूनी सलाह, पुलिस कार्रवाई में मदद और मानसिक तनाव से बाहर निकलने के लिए काउंसलिंग जैसी सुविधाएं दी जाती हैं.
13 योजनाओं से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश
केंद्र सरकार के मुताबिक, निर्भया फंड के तहत बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी 13 योजनाएं लागू की गई हैं.
इनमें ERSS-112, Anti-Human Trafficking Units, Cyber Crime Prevention और फोरेंसिक सबूत जुटाने की ट्रेनिंग जैसी कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं.
वहीं, कोलकाता समेत आठ शहरों में सेफ सिटी प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है. वुमेन हेल्प डेस्क और कोलकाता की स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब में साइबर फॉरेंसिक सुविधाओं को मजबूत करने का काम भी जारी है.
रेप और POCSO मामलों की जल्द सुनवाई पर भी जोर
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों को जल्दी निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (Fast Track Special Courts) और विशेष POCSO अदालतों की व्यवस्था भी निर्भया फंड की योजनाओं में शामिल है.
इसके अलावा वाहनों की निगरानी के लिए व्हीकल ट्रेकिंग प्लेटफॉर्म (Vehicle Tracking Platform) पर भी काम किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर वाहनों की जानकारी आसानी से मिल सके.
कैसे होती है इन योजनाओं की निगरानी?
केंद्र सरकार के मुताबिक, निर्भया फंड के तहत चल रही इन योजनाओं की निगरानी Inter-Ministerial Empowered Committee करती है. फंड का इस्तेमाल कहां और कैसे हो रहा है और योजनाओं का काम कितना आगे बढ़ा है, इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है. यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में भाजपा सांसद सौमित्र खान के सवाल के जवाब में दी.

कुल मिलाकर, बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन से लेकर सखी सेंटर, सेफ सिटी प्रोजेक्ट, फास्ट ट्रैक कोर्ट और साइबर फोरेंसिक जैसी कई व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है. अब असली चुनौती यह है कि इन सुविधाओं की जानकारी हर जरूरतमंद महिला तक पहुंचे और मुश्किल समय में उसे बिना भटके और बिना देरी के मदद मिल सके.
Also Read :नीतीश कुमार बिहार के दूसरे महात्मा गांधी हैं – बुलो मंडल / शैलेश कुमार का बड़ा बयान


