जयपाल सिंह स्टेडियम में 29 जुलाई से चल रहा छात्र आंदोलन अब खत्म हो गया है. आंदोलन समाप्त होने के बाद छात्र-छात्राएं अपना सामान समेटकर घर लौटने की तैयारी में दिखे. जाते-जाते कई छात्र आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद दिया और सरकार के फैसले पर संतोष जताया.
छात्र हित में लिया गया फैसला
छात्रा अर्चना कुमारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद और जोहार करते हुए कहा कि सरकार ने छात्र हित में फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि यह झारखंड के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाला छात्र सत्याग्रह आंदोलन रहा है. आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाई और अब सरकार के फैसले के बाद उन्हें राहत मिली है.
सरकार ने हमारा दर्द समझा
छात्रा मंजु महतो ने कहा कि सरकार ने आखिरकार छात्रों की बात सुनी, यह देखकर अच्छा लग रहा है. उन्होंने कहा, “मैं तहे दिल से मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूं. उन्होंने छात्रों के दर्द को समझा और हमारी मांगों पर फैसला लिया.”
एक अन्य छात्रा ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहा. उन्होंने कहा कि आमतौर पर बड़े आंदोलनों और प्रदर्शनों के दौरान किसी न किसी तरह की हिंसा हो जाती है, लेकिन इस आंदोलन में छात्रों ने संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखी.
छात्रा ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इससे सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक अच्छा संदेश गया है. छात्रों ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया.
22 परीक्षाओं को रद्द करना आसान फैसला नहीं
छात्र आंदोलनकारी कृष्णा ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि पूरे भारत में शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री होगा, जिसने एक साथ 22 परीक्षाओं को रद्द करने जैसा बड़ा फैसला लिया हो.
कृष्णा ने कहा कि एक साथ इतनी परीक्षाओं को रद्द करना किसी भी सरकार के लिए आसान फैसला नहीं होता. इसके लिए कई स्तरों पर फैसले लेने और पूरी स्थिति को संभालने की जरूरत होती है.
आंदोलन खत्म होने के बाद छात्रों के चेहरों पर राहत नजर आई. कई छात्र-छात्राएं सरकार के फैसले से संतुष्ट दिखे और आंदोलन स्थल से अपने घरों की ओर रवाना होने लगे.
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