नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस अहम बैठक में पश्चिम एशिया के हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों का आकलन भी किया जाएगा। प्रधानमंत्री इसी दिन संसद में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) और पूर्ण कैबिनेट बैठक को भी संबोधित करेंगे, जहां देश की आर्थिक और रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा होने की संभावना है।
इससे पहले 1 अप्रैल को भी पीएम मोदी ने CCS की एक विशेष बैठक बुलाई थी। उस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए भारत की रणनीति, आपूर्ति व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया था। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर रही है। कैबिनेट सचिव ने बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों खासकर LNG और LPG की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इसके साथ ही देशभर में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों के लिए जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर विशेष चिंता जताई। इसमें खाद्य सामग्री, ईंधन और ऊर्जा जैसे जरूरी क्षेत्रों पर फोकस किया गया। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर न पड़े। पश्चिम एशिया में स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब 28 फरवरी को ईरान के क्षेत्र पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई। इस घटना के बाद तेहरान ने कड़ा जवाब दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। यह संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक तीनों स्तरों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और ऊर्जा संकट जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
बैठक में इन सभी पहलुओं का विस्तार से आकलन किया गया। सरकार ने जरूरी वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर चर्चा की। इसमें वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की पहचान, भंडारण क्षमता बढ़ाने और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने जैसे उपाय शामिल हैं।
किसानों पर इस संकट के प्रभाव को भी गंभीरता से लिया गया। आने वाले खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की गई। सरकार ने भरोसा जताया कि पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए उर्वरकों के पर्याप्त भंडार से किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी और खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, भविष्य में किसी भी संभावित कमी से बचने के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया गया। सरकार इस दिशा में दीर्घकालिक योजना बनाने पर जोर दे रही है, ताकि कृषि क्षेत्र को किसी भी वैश्विक संकट से सुरक्षित रखा जा सके। ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी अहम फैसले लिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद रहे। इससे यह तय होगा कि देश में बिजली की कोई कमी न हो और उद्योगों तथा आम उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिलती रहे।
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस इस समय तीन प्रमुख क्षेत्रों—खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति—पर है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत हर स्तर पर सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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