Ranchi : इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच बंद हो चुके होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है। यह बैठक पेरिस में आयोजित की जा रही है, जिसमें दर्जनों देश शामिल हो रहे हैं, लेकिन अमेरिका को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। यह मार्ग बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस रास्ते से दुनिया के कुल तेल का करीब 20% हिस्सा गुजरता था। युद्ध और तनाव के चलते यह मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
सुरक्षा मिशन की तैयारी
फ्रांस और ब्रिटेन इस मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए एक “रक्षात्मक मिशन” की योजना बना रहे हैं। इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मिशन पूरी तरह सुरक्षा के उद्देश्य से होगा और इसमें केवल गैर-युद्धरत देश शामिल होंगे। इसे तब लागू किया जाएगा जब सुरक्षा परिस्थितियां अनुमति देंगी।
ईरान पर दबाव और कूटनीति
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि होर्मुज को बिना शर्त और तुरंत फिर से खोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक जिम्मेदारी है और इससे ऊर्जा और व्यापार की आपूर्ति फिर से सामान्य हो सकेगी। फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की बात भी कही है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है।
अमेरिका की गैर-भागीदारी चर्चा में
इस अंतरराष्ट्रीय पहल में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है, जिससे कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह योजना मुख्य रूप से यूरोपीय देशों के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है।
समुद्री सुरक्षा और भविष्य की योजना
प्रस्तावित योजना के तहत जहाजों की सुरक्षा के लिए खुफिया जानकारी, माइन क्लियरिंग, सैन्य एस्कॉर्ट और तटीय देशों के साथ समन्वय जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं।
फ्रांसीसी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह मिशन अभी प्रारंभिक चरण में है और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए आगे निर्णय लिया जाएगा।
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