ऑस्ट्रेलिया ने 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा फैसला किया है। इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे अब टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इस फैसले के साथ ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन गया है।
इस नियम की जिम्मेदारी बच्चों या उनके माता-पिता पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों पर डाली गई है। अगर कंपनियां यह साबित नहीं कर पातीं कि यूजर की उम्र 16 साल या उससे अधिक है, तो उन पर करीब 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 295 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दुनिया में अन्य देशों की स्थिति:
ब्रिटेन: ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट 2023 में पारित हुआ, 2025 से लागू। कंपनियों को नाबालिगों को हानिकारक सामग्री से बचाना जरूरी। उम्र की सीमा अभी तय नहीं।
चीन: ‘माइनर मोड’ के तहत उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम और कंट्रोल्स तय।
डेनमार्क: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध, 13 साल तक पैरेंट्स की अनुमति से इस्तेमाल संभव।
फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने के लिए पैरेंट्स की सहमति जरूरी, तकनीकी कारणों से लागू नहीं हो पाया।
जर्मनी: 13-16 साल के बच्चे केवल माता-पिता की सहमति से सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकते हैं।
इटली: 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैरेंट्स की अनुमति जरूरी।
मलेशिया: 2026 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध।
नॉर्वे: न्यूनतम उम्र 13 से बढ़ाकर 15 करने की तैयारी, 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैरेंट्स की अनुमति जरूरी।
अमेरिका: बाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण कानून के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा बिना पैरेंट्स की सहमति नहीं लिया जा सकता।
यूरोपीय यूनियन: सोशल मीडिया पर न्यूनतम उम्र 16 साल करने की सिफारिश की गई, लेकिन इसे कानूनी बाध्यकारी नहीं बनाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों के खुद के नियम भी पर्याप्त नहीं हैं। कई बच्चे 13 साल से पहले ही इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

