Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर बवाल: टेंट उखाड़े जाने का आरोप, छात्रों और सुरक्षाकर्मियों में टकराव
    जोहार ब्रेकिंग

    जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर बवाल: टेंट उखाड़े जाने का आरोप, छात्रों और सुरक्षाकर्मियों में टकराव

    Kanika RanaBy Kanika RanaOctober 24, 2026No Comments13 Mins Read3
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    कणिका राणा

    जिस जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर 13 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, वहां शनिवार, 24 अक्टूबर को छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई. छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत करने पहुंचे रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों के प्रतिनिधिमंडल के लौटने के बाद प्रदर्शन स्थल से टेंट हटाने की कोशिश की गई. छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके टेंट उखाड़ दिए, सामान बिखेर दिया और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को जबरन वहां से हटाने की कोशिश की.

    छात्रों के मुताबिक, जब प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद थी, उसी दौरान प्रदर्शन स्थल को खाली कराने की कोशिश शुरू हो गई. इसके बाद छात्र भूख हड़ताल कर रहे पांचों साथियों को राजनीति विज्ञान विभाग की इमारत के अंदर ले गए और उन्हें सुरक्षाकर्मियों की पहुंच से दूर रखने के लिए खुद भी वहां मौजूद रहे. इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए गए. कैंपस में प्रवेश नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए छात्र गेटों के बाहर जमा हो गए.

    इसी बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं अगले आदेश तक ऑनलाइन कर दीं. डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी और पुरानी लाइब्रेरी बंद करने का भी फैसला लिया गया. प्रशासन ने इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम बताया. वहीं, छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद आंदोलन को कमजोर करना और दूसरे विद्यार्थियों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना है.

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्रों का सवाल है कि आखिर छात्रसंघ चुनाव की मांग करना गलत कैसे हो सकता है? जिस देश में लोकसभा, विधानसभा और दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव होते हैं, वहां विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? जामिया में आखिरी बार दिसंबर 2005 में छात्रसंघ चुनाव हुआ था. मार्च 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया. इसके बाद करीब दो दशक बीत गए, लेकिन विश्वविद्यालय में केंद्रीय छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए. अब छात्र 2026-27 सत्र के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग कर रहे हैं.

    2005 के बाद जामिया में छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं हुए?

    जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी बार दिसंबर 2005 में छात्रसंघ चुनाव हुआ था. इसके कुछ महीने बाद मार्च 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उस समय कैंपस में हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और पढ़ाई में बाधा डालने की घटनाएं हुई थीं. प्रशासन के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद छात्रसंघ चुनाव बंद करने का फैसला लिया गया. संसद में दिए गए एक सरकारी जवाब के मुताबिक, छात्रसंघ भंग करने के पीछे हिंसा की घटनाएं थीं, जिनमें तत्कालीन कुलपति मुशीरुल हसन पर हमला भी शामिल था. दूसरी तरफ, छात्रों का कहना है कि 2006 की घटनाओं को आधार बनाकर पिछले करीब 20 साल से चुनाव नहीं कराना उचित नहीं है. उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली कई पीढ़ियां बिना किसी केंद्रीय, निर्वाचित छात्रसंघ के पास आउट हो गईं.

    फिलहाल विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनाव होते हैं. प्रशासन का कहना है कि इन चुनावों के जरिए छात्रों को प्रतिनिधित्व मिलता है. लेकिन आंदोलनकारी विद्यार्थियों का आरोप है कि विभागीय प्रतिनिधियों के ऊपर डीन या विभागाध्यक्ष जैसे पदाधिकारी होते हैं और अंतिम निर्णय प्रशासन ही लेता है. ऐसे में छात्रों के पास पूरे विश्वविद्यालय के स्तर पर अपनी समस्याएं उठाने वाली स्वतंत्र निर्वाचित संस्था नहीं है.

    2012 में छात्र पहुंचे हाईकोर्ट, 2022 में याचिका का निपटारा

    छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा सिर्फ कैंपस के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा. 2012 में जामिया के तत्कालीन छात्र हमीदुर रहमान ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में विश्वविद्यालय को छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी. यह मामला डब्ल्यूपी (सी) 917/2012 के नाम से दर्ज हुआ था. हमीदुर रहमान ने अदालत से मांग की थी कि विश्वविद्यालय में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं. 20 दिसंबर 2022 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया. आदेश में विश्वविद्यालय के वकील ने कहा था कि छात्रसंघ भंग हो चुका है और चुनाव कराने का सवाल ही नहीं उठता. इसके बाद अदालत ने कहा कि इस मामले में किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निपटारा कर दिया.

    अब विवाद इसी आदेश को लेकर है. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अदालत ने चुनाव कराने का निर्देश नहीं दिया था. वहीं, छात्रों की दलील है कि याचिका का निपटारा होना और चुनाव कराने पर प्रतिबंध लगना दो अलग-अलग बातें हैं. उपलब्ध आदेश में चुनाव कराने का निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन उसमें चुनाव पर स्पष्ट रोक लगाने का आदेश भी नहीं दिखता. इसलिए यह कहना कि हाईकोर्ट ने चुनाव कराने से मना कर दिया था, उपलब्ध आदेश के आधार पर सही नहीं होगा. छात्रों का सवाल है कि अगर अदालत ने चुनाव पर रोक नहीं लगाई, तो विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाता?

    कुलपति पर छात्रों के आरोप और आरएसएस से जुड़ा विवाद

    जामिया में जारी आंदोलन के बीच कुलपति प्रो. मजहर आसिफ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. छात्रों के एक वर्ग का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया छात्रसंघ चुनाव के पक्ष में नहीं है और कैंपस में विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आवाज को सीमित किया जा रहा है. कुछ छात्र संगठन कुलपति पर आरएसएस के एजेंडे के अनुसार विश्वविद्यालय चलाने का आरोप लगाते हैं. उनका दावा है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होने के पीछे प्रशासन की राजनीतिक सोच भी एक वजह हो सकती है. हालांकि, यह छात्रों के आरोप हैं. सार्वजनिक रूप से यह साबित नहीं होता कि कुलपति वर्तमान में आरएसएस के सदस्य हैं या छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने का फैसला इसी कारण लिया गया है.
    प्रो. मजहर आसिफ को राष्ट्रपति ने 24 अक्टूबर 2024 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया का 16वां कुलपति नियुक्त किया था. इससे पहले वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे.
    अप्रैल 2026 में जामिया में आरएसएस की शताब्दी से जुड़े एक कार्यक्रम को लेकर भी विवाद हुआ था. उस कार्यक्रम में कुलपति की मौजूदगी और उनके एक बयान पर कुछ छात्र संगठनों ने सवाल उठाए थे. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने इसे शैक्षणिक संस्थानों के कथित भगवाकरण से जोड़कर विरोध किया था. छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय को ऐसी राजनीतिक विचारधारा के हिसाब से नहीं चलाया जाना चाहिए, बल्कि यहां विद्यार्थियों की समस्याओं, शिक्षा और प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

    ‘तुम नेता मत बनो’: छात्रों का आरोप

    आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब भी विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बात उठती है, तो प्रबंधन की ओर से उन्हें कथित तौर पर राजनीति से दूर रहने की सलाह दी जाती है. छात्रों का आरोप है कि उनसे कहा जाता है कि वे पढ़ाई करें और नेता बनने की कोशिश न करें. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई करने की जगह नहीं है, बल्कि यहां विद्यार्थियों को अपने अधिकारों, समस्याओं और प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठाने का भी मौका मिलना चाहिए. दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में चुनाव, फिर जामिया में क्यों नहीं? आंदोलनकारी छात्रों का एक बड़ा सवाल यह भी है कि दिल्ली में ही दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, तो जामिया में चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते?

    छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं है. यह विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने, छात्र हितों की बात रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी का जरिया भी है. इसी आधार पर कुछ छात्र सवाल उठा रहे हैं कि क्या जामिया में अल्पसंख्यक संस्थान होने की वजह से छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर अलग रवैया अपनाया जा रहा है?हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव नहीं कराने के पीछे अल्पसंख्यक संस्थान होने को कारण नहीं बताया है. प्रशासन का तर्क 2006 की हिंसक घटनाओं और मौजूदा विभागीय प्रतिनिधित्व व्यवस्था पर आधारित है.

    इस बहस के बीच अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का उदाहरण भी सामने है. वहां छात्र आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को छात्रसंघ चुनाव की घोषणा की और 5 नवंबर को मतदान प्रस्तावित किया. जामिया के छात्र भी चाहते हैं कि उनके विश्वविद्यालय में चुनाव के लिए इसी तरह स्पष्ट कार्यक्रम घोषित किया जाए.

    12 अक्टूबर से पांच छात्र भूख हड़ताल पर

    जामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर आंदोलन 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था. शुरुआत में तीन छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. बाद में भूख हड़ताल करने वाले छात्रों की संख्या पांच हो गई.

    आंदोलन से जुड़ी रिपोर्टों में पांच छात्रों के नाम मोहम्मद जासिम खान, एबिन बेसिल, रेहान हैदर, रेहान खान और फैजान अली खान बताए गए हैं. छात्रों के अनुसार, भूख हड़ताल में चार छात्र और एक छात्रा शामिल हैं. आयोजकों से मिली जानकारी के आधार पर छात्रा का नाम रिदा नौशाद खान बताया गया है; हालांकि, इस नाम की स्वतंत्र पुष्टि प्रकाशित रिपोर्टों से नहीं हो सकी है.

    छात्रों की मुख्य मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल किया जाए और 2026-27 सत्र के चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए. इसके अलावा, आंदोलनकारी छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर तथा सिक्योरिटी एडवाइजर को हटाने की मांग भी की जा रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े कुछ छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी. इनमें एबिन बेसिल को एक साल के लिए रस्टिकेट करने और जासिम खान तथा रेहान हैदर को निलंबित करने की कार्रवाई शामिल थी. छात्रों का कहना है कि इन कार्रवाइयों ने आंदोलन को और तेज कर दिया.

    लगातार बातचीत, लेकिन समाधान नहीं

    आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कई बार बातचीत की कोशिश की गई. अधिकारियों और प्रोफेसरों की टीम छात्रों से मिलने पहुंची, लेकिन चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी. विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति भी बनाई है. प्रशासन का कहना है कि संविधान का मसौदा तैयार होने के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी. लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल समिति बनाने का आश्वासन नहीं चाहिए. वे चाहते हैं कि चुनाव की तारीख तय हो और विश्वविद्यालय इस दिशा में समयबद्ध तरीके से काम करे. छात्रों का आरोप है कि वे लगातार अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन उनकी बात का समाधान नहीं निकल रहा. इसी कारण भूख हड़ताल जारी है.

    24 अक्टूबर को टेंट हटाने की कोशिश के बाद बढ़ा तनाव

    शनिवार, 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों का प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचा. अधिकारियों ने छात्रों से हड़ताल खत्म करने की अपील की और बताया कि उनकी मांगों पर विचार करने के लिए समिति बनाई गई है. छात्रों के मुताबिक, बातचीत में चुनाव की तारीख को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ. इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर लगे टेंट हटाने की कोशिश की गई. छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने टेंट उखाड़े और हड़ताल कर रहे छात्रों को जबरन हटाने की कोशिश की. एबिन बेसिल ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन के निर्देश पर टेंट हटाए गए और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई. इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने पांचों भूख हड़ताल कर रहे साथियों को राजनीति विज्ञान विभाग की इमारत के अंदर पहुंचाया. उनका कहना था कि वे अपने साथियों को जबरन हटाए जाने से बचाना चाहते थे. दोपहर तक विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए गए. छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें कैंपस में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. इसके बाद गेटों के बाहर भीड़ जमा हो गई और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया.

    छात्र संगठन एआईएसए ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि जब बातचीत चल रही थी, उसी दौरान प्रदर्शन स्थल को हटाने की कोशिश की गई. संगठन के सचिव सौरभ त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को कमजोर करना चाहता है.

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने दूसरी ओर सुरक्षा और कैंपस में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बनाए रखने की बात कही. प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन निर्धारित स्थल से हटकर किया जा रहा था और इससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं.

    गेट के पास दीवार बनाने को लेकर भी विवाद

    आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय के गेट नंबर 7 और 10 के पास दीवार बनाने या मरम्मत का काम भी विवाद का कारण बना. छात्रों ने आरोप लगाया कि इन रास्तों का इस्तेमाल प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने के लिए किया जाता है. ऐसे में दीवार बनने से विद्यार्थियों की आवाजाही और प्रदर्शन में शामिल होने की सुविधा प्रभावित हो सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन ने दीवार के निर्माण को सुरक्षा और मरम्मत से जुड़ा नियमित काम बताया है. प्रशासन ने आंदोलन से इसका संबंध होने से इनकार किया है. छात्रों का सवाल है कि जब परिसर में चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है, तो उसी दौरान प्रदर्शन स्थल के पास रास्तों पर निर्माण का काम क्यों किया जा रहा है? हालांकि, प्रशासन की ओर से इसे नियमित सुरक्षा कार्य बताया गया है. इसलिए दीवार निर्माण को आंदोलन रोकने की सुनियोजित कोशिश कहना अभी छात्रों का आरोप है, कोई स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं.

    ‘जामिया प्रशासन हमें सोनम वांगचुक बनाने की कोशिश कर रहा है’

    आंदोलन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये की तुलना सोनम वांगचुक के आंदोलन से भी की. छात्रों का कहना है कि प्रशासन उन्हें लंबे समय तक भूख हड़ताल करने की स्थिति में पहुंचा रहा है और उनकी मांगों पर फैसला लेने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है. छात्रों ने कुलपति को लेकर यह राजनीतिक टिप्पणी भी की कि वे ‘धर्मेंद्र प्रधान बनने के लिए तैयार रहें’. इस बयान का आशय छात्रों की ओर से इस्तीफे की मांग और राजनीतिक विरोध की चेतावनी के रूप में समझा जा सकता है. छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल चुनाव कराने की है. वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकाले और उन्हें अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दे.

    सवाल वही: छात्रसंघ चुनाव कब?

    जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी आंदोलन अब केवल छात्रसंघ चुनाव की मांग तक सीमित नहीं रह गया है. इसके साथ छात्रों के प्रतिनिधित्व, अनुशासनात्मक कार्रवाई, विरोध करने के अधिकार और कैंपस में प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं.

    एक तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रसंघ का संविधान तैयार होने के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी. दूसरी तरफ छात्र इसे देरी बताते हुए तत्काल चुनाव कार्यक्रम जारी करने की मांग कर रहे हैं.

    छात्रों का कहना है कि जब देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है, तो विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इस अधिकार से लंबे समय तक वंचित क्यों रखा जाए?

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांग पर चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करेगा, या संविधान तैयार करने की प्रक्रिया पूरी होने तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी?

    Also Read : अंतिम आदिवासी भाग-4: हाईवे किनारे बसे बिरहोर, 14 किमी दूर कोयला खदान, फिर भी न स्कूल, न साफ पानी, न काम; बिहार के ईंट-भट्ठों पर कट रही जिंदगी

    जामिया मिल्लिया इस्लामिया
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleशहादत की यादें, 24 साल का सफर और पुलिस परिवार का दर्द… सिमडेगा DC कंचन सिंह की कलम से”
    Next Article झारखंड : हेमंत सोरेन को मरांग बुरु धर्मगाढ़ और अंतरराष्ट्रीय संताल सरना धर्म सम्मेलन का न्योता

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड : 27-28 अक्टूबर को लगेगा राजकीय मुड़मा जतरा, हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि का आमंत्रण

    October 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    लोहरदगा में 17 तारीख से बॉक्साइट परिवहन ठप, हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

    October 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    मांडर में 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक शीतगृह का हुआ शुभारंभ, किसानों को ₹1.04 करोड़ की परिसंपत्तियां वितरित

    October 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंडः स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगा होमगार्ड एसोसिएशन, हाईकोर्ट में याचिका की तैयारी

    October 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंडः दिवाली से पहले वेतन नहीं मिला तो अफसरों पर गिरेगी गाज, स्वास्थ्य सचिव ने दिया अल्टीमेटम

    October 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: ऑनलाइन खतियान में ‘मुंडा’ की जगह ‘स्वासी’ दर्ज, सीएम से जाति के कॉलम में सुधार का अनुरोध

    October 26, 2026
    Latest Posts

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले दीपांकर भट्टाचार्य, मां रूपी सोरेन के निधन पर जताया शोक

    October 26, 2026

    झारखंड : 27-28 अक्टूबर को लगेगा राजकीय मुड़मा जतरा, हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि का आमंत्रण

    October 26, 2026

    लोहरदगा में 17 तारीख से बॉक्साइट परिवहन ठप, हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

    October 26, 2026

    मांडर में 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक शीतगृह का हुआ शुभारंभ, किसानों को ₹1.04 करोड़ की परिसंपत्तियां वितरित

    October 26, 2026

    एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में लिटफेस्ट 3.0 का आगाज, साहित्य और कला के रंग में रंगे युवा

    October 26, 2026

    Powered by Feralvoice.

    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.