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    Home»जोहार ब्रेकिंग»नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है, मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं : एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा
    जोहार ब्रेकिंग

    नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है, मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं : एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 8, 2026No Comments5 Mins Read3
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    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित बांकड़ा मस्जिद में नमाज फिर शुरू कराने की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने मस्जिद में नमाज की अनुमति देने की मांग का विरोध किया. एएआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन मुखर्जी ने अदालत में कहा कि नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है और इसके लिए किसी खास मस्जिद में जाना अनिवार्य नहीं है. उनका कहना था कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विमानन और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता.

    एएआई ने कहा कि संविधान किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह किसी खास स्थान पर जाकर ही धार्मिक गतिविधि करने का अधिकार मांग सकता है. अथॉरिटी के अनुसार बांकड़ा मस्जिद एयरपोर्ट के परिचालन क्षेत्र में स्थित है और वहां लोगों की आवाजाही विमानन सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.

    मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नमाज फिर शुरू कराने की मांग की है. कमेटी का कहना है कि करीब 136 साल पुरानी इस मस्जिद में लंबे समय से नमाज होती रही है. पहले सुरक्षा जांच के बाद सीमित संख्या में लोगों को एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश देकर मस्जिद तक पहुंचाया जाता था. कमेटी ने कम से कम शुक्रवार की नमाज के लिए नियंत्रित प्रवेश की अंतरिम अनुमति मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी.

    क्या है पूरा मामला?

    कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के परिसर में स्थित बांकड़ा मस्जिद को लेकर विवाद 11 जुलाई 2026 से बढ़ा, जब मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोगों का प्रवेश रोक दिया गया. मस्जिद कमेटी के अनुसार इससे पहले नमाजियों को एयरपोर्ट के गेट नंबर 8 से सुरक्षा जांच के बाद प्रवेश दिया जाता था. इसके बाद उन्हें बस से मस्जिद तक ले जाया जाता था और नमाज के बाद वापस लाया जाता था.

    कमेटी का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी और रोजाना सीमित संख्या में लोग वहां नमाज पढ़ते थे. शुक्रवार को नमाजियों की संख्या बढ़ जाती थी. कमेटी के मुताबिक अगर सुरक्षा को लेकर कोई नई चिंता सामने आई थी तो सुरक्षा जांच और आवाजाही को और कड़ा किया जा सकता था, लेकिन नमाज पर पूरी तरह रोक लगाना उचित नहीं है.

    दूसरी ओर एएआई और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मस्जिद एयरपोर्ट के संवेदनशील परिचालन क्षेत्र में है. मस्जिद तक पहुंचने के लिए लोगों को ऐसे हिस्से से गुजरना पड़ता है जहां विमानों की आवाजाही होती है. इसी वजह से लोगों की नियमित आवाजाही को सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं माना गया.

    सुरक्षा और जमीन का सवाल

    एएआई ने हाईकोर्ट में बताया कि मस्जिद में नमाजियों की आवाजाही को लेकर विमानन सुरक्षा एजेंसियों ने आपत्ति जताई थी. अथॉरिटी के मुताबिक 13 मई 2026 को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठाई थीं. इसके बाद 23 मई को संबंधित पक्षों के साथ बैठक हुई थी. एएआई का कहना है कि मस्जिद में प्रवेश रोकने का फैसला इसी सुरक्षा प्रक्रिया के बाद लिया गया.

    केंद्र सरकार और सीआईएसएफ की ओर से भी एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई. केंद्र का तर्क है कि एयरपोर्ट के संवेदनशील हिस्से में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और सुरक्षा जांच पूरी तरह सुनिश्चित करना जरूरी है. केवल पहचान पत्र के आधार पर लोगों को ऐसे क्षेत्र में प्रवेश देना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो सकती.

    मामले में मस्जिद की जमीन का सवाल भी महत्वपूर्ण है. एएआई ने अदालत को बताया कि जिस जमीन पर मस्जिद स्थित है, उसे 7 फरवरी 1961 की अधिसूचना के तहत एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित किया गया था. एएआई के अनुसार जमीन के लिए मुआवजा भी दिया गया था. केंद्र का कहना है कि मस्जिद की मौजूदगी एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़ी योजनाओं में बाधा बन रही है.

    हालांकि मस्जिद कमेटी का कहना है कि मस्जिद करीब 136 साल पुरानी है और एयरपोर्ट के मौजूदा विस्तार से बहुत पहले से वहां मौजूद है. कमेटी का तर्क है कि जमीन के अधिग्रहण और सुरक्षा व्यवस्था के सवाल को नमाज की मौजूदा मांग से अलग देखा जाना चाहिए.

    मस्जिद कमेटी ने मांगी अंतरिम अनुमति

    मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत में कहा कि पहले भी नमाजियों को नियंत्रित तरीके से मस्जिद तक पहुंचाया जाता था. सुरक्षा जांच के बाद लोगों को बस से मस्जिद तक ले जाया जाता था, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ नमाज की अनुमति दी जा सकती है.

    कमेटी की फिलहाल मुख्य मांग मस्जिद के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला नहीं, बल्कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक नमाज की अंतरिम अनुमति देने की है. कमेटी ने खास तौर पर शुक्रवार की नमाज के लिए सीमित संख्या में लोगों को सुरक्षा जांच के बाद प्रवेश देने का प्रस्ताव रखा है.

    वहीं एएआई और केंद्र सरकार का कहना है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती. एएआई ने इसी आधार पर अंतरिम राहत का विरोध किया और कहा कि नमाज किसी दूसरे स्थान पर भी पढ़ी जा सकती है.

    Also Read : सुप्रीम कोर्ट, CJI, राजपाल यादव और शेक्सपियर का एक प्रसंग : ये सुनवाई जो आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए

    कोलकाता एयरपोर्ट
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