Patna : बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने परिमार्जन प्लस पोर्टल पर आने वाले आवेदनों के निस्तारण के लिए सख्त समय-सीमा तय कर दी है। अब जमाबंदी में त्रुटियों का सुधार 15 कार्य दिवस में करना अनिवार्य होगा।
डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि समीक्षा के दौरान यह सामने आया है कि परिमार्जन प्लस पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के निस्तारण में अंचल स्तर पर काफी लापरवाही हो रही थी। समय-सीमा तय नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित थे, जिससे रैयतों को परेशानी हो रही थी। इसी को देखते हुए सरकार ने सभी मामलों के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है। उन्होंने साफ कहा कि अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तय समय-सीमा में मामलों का निस्तारण नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य आम रैयतों को त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद राजस्व सेवा देना है।
विभाग ने बताया कि अब तक करीब 4.50 करोड़ जमाबंदियों को ऑनलाइन किया जा चुका है। डिजिटलीकरण के दौरान कई जमाबंदियों में नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा और लगान से जुड़ी त्रुटियां पाई गई हैं। इन त्रुटियों के सुधार और छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करने के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल शुरू किया गया है। नई व्यवस्था के तहत लिपिकीय या टंकण की भूल से जुड़ी त्रुटियों का सुधार 15 कार्य दिवस में किया जाएगा। वहीं, छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करने और भू-मापी से जुड़े मामलों का निस्तारण अधिकतम 75 कार्य दिवस में अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों को सुधार के लिए वापस किया जाएगा, उनमें आवेदक के लॉगिन में लंबित समय को कार्य दिवस की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि तय समय-सीमा में आवेदनों का निस्तारण सुनिश्चित करें और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी जानकारी विभाग को दें।
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