रांची: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार में बड़े औद्योगिक निवेश की इच्छा जताई है. इंडिया टीवी के कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए अग्रवाल ने कहा कि बिहार में एल्युमिनियम या कॉपर की बड़ी फैक्ट्री लगाने की उनकी इच्छा है. उन्होंने कहा कि इसके लिए झारखंड से कच्चा माल बिहार लाने को लेकर दोनों राज्यों के बीच समझौते की कोशिश की जा रही है. उनका कहना था कि अगर यह व्यवस्था बनती है तो समय आने पर वह बिहार में 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपये तक निवेश करना चाहेंगे.
अग्रवाल ने बिहार से अपने व्यक्तिगत संबंध का जिक्र करते हुए कहा कि वह प्राकृतिक संसाधनों के कारोबार से जुड़े हैं और उनके मुताबिक बिहार के झारखंड बनने के बाद खनिज संसाधनों का बड़ा हिस्सा अलग राज्य में चला गया. उन्होंने कॉपर, जिंक और एल्युमिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे झारखंड से कच्चा माल बिहार लाकर वहां उद्योग लगाया जा सके.
अनिल अग्रवाल के बयान की पृष्ठभूमि झारखंड के बनने से है. यही ऐतिहासिक संदर्भ अनिल अग्रवाल के उस बयान से जुड़ता है, जिसमें उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों का बड़ा हिस्सा झारखंड में चला गया और अब बिहार में उद्योग लगाने के लिए झारखंड से कच्चा माल लाने की जरूरत होगी.
बिहार में निवेश की इच्छा पहली बार नहीं जताई
बिहार में औद्योगिक निवेश को लेकर यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की हो, क्योंकि सितंबर 2016 में भी उन्होंने पटना में खनिज प्रोसेसिंग प्लांट और एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना की बात कही थी, हालांकि उस समय वह परियोजना जमीन पर नहीं उतर सकी थी.
इसके विपरीत, जिस झारखंड से अब कच्चा माल लाने की बात की जा रही है, वहां वेदांता ने पहले ही बड़ा निवेश किया हुआ है. फरवरी और अक्टूबर 2017 में झारखंड में लगभग 1 अरब डॉलर और 10,000 करोड़ रुपये के स्टील प्लांट व लौह अयस्क खनन प्रोजेक्ट की घोषणा करने के बाद, साल 2018 में कंपनी ने बोकारो के पास स्थित इलेक्ट्रोस्टील लिमिटेड का सफल अधिग्रहण भी किया था.
नवंबर 2014 के हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में भी उन्होंने बिहार के कुशल श्रम बल और प्राकृतिक संसाधनों की सराहना करते हुए वहां ‘मीनिंगफुल बिजनेस’ शुरू करने की मंशा जताई थी.

औद्योगिक इकाइयों के अलावा हाल ही में साल 2026 में वेदांता समूह ने सामाजिक क्षेत्र में ठोस पहल करते हुए अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के ‘नंदघर’ कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार के साथ राज्य के 1,000 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक नंदघर में बदलने का समझौता किया है. अब सामाजिक कल्याण के इन कार्यों से आगे बढ़कर अनिल अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से भारी-भरकम औद्योगिक निवेश की संभावना भी रखी है, जो पूरी तरह से बिहार और झारखंड सरकारों के बीच आपसी सहमति और प्रशासनिक समझौतों पर निर्भर करती है.
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