बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर दियारा में गंगा नदी के सीने पर एक बार फिर बड़ा दर्दनाक हादसा हुआ है. यहां 13 अक्टूबर को एक नाव पलटने से कम से कम 13 लोगों की असमय मौत हो गई, जिनमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चे शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, राघोपुर में नाव पर सवार लोग एक भोज में शामिल होने जा रहे थे. इसी दौरान नाव में छेद होने के कारण पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव डूब गई.
हादसे में बचे अजीत कुमार अश्विनी ने बताया कि नाव में काफी लोग सवार थे. वहीं, एक अन्य sobrevivor आदित्य कुमार ने बताया कि नाव में पानी भरते ही लोग जान बचाने के लिए नदी में कूदने लगे. आदित्य ने लकड़ी के एक लट्ठे को पकड़कर अपनी जान बचाई.
हादसे में अपनों को खोने वाले स्थानीय निवासी सत्येंद्र ने बताया कि उनके परिवार के कई बच्चे भी डूब गए. उन्होंने कहा कि हादसे की खबर मिलने के बाद लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.
रेस्क्यू किए गए घायलों को पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार के मुताबिक, चार बच्चों में से एक को छुट्टी दे दी गई है, जबकि तीन भर्ती हैं. इनमें दो बच्चों की हालत गंभीर बताई गई है.
इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर राज्य की जल परिवहन व्यवस्था और नदी पार करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान चलाया गया, लेकिन यह हादसा राज्य के जलमार्गों की खौफनाक हकीकत बयां करने के लिए काफी है.
तीन साल में नाव हादसों ने ली 190 लोगों की जान
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों और केंद्र सरकार के अंतर्देशीय जल परिवहन प्रकाशनों के मुताबिक, बिहार में नाव पलटने की घटनाएं लगातार नासूर बनती जा रही हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 2021 से 2023 के बीच कुल 190 लोगों की जान इन हादसों में जा चुकी है.
इनमें साल 2021 के दौरान 74 दुर्घटनाओं में 47 मौतें, 2022 में 98 दुर्घटनाओं में 99 मौतें और 2023 में 43 दुर्घटनाओं में 44 मौतें दर्ज की गईं. वहीं, अगर चालू वर्ष 2026 की बात करें तो जनवरी से 14 अक्टूबर तक मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आंकड़ों के अनुसार नाव हादसों में कम से कम 21 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. अप्रैल से लेकर सितंबर तक शिवहर, पूर्वी चंपारण, पटना के बाढ़ क्षेत्र, गोपालगंज, दरभंगा, भागलपुर और वैशाली जैसे जिलों से लगातार नाव पलटने और लोगों के लापता होने की खबरें आती रही हैं.
एक साल में 2,547 लोगों की मौत, अकेले डूबने से गई 2000 से ज्यादा जान
राज्य विधानसभा में हाल ही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 के दौरान बिहार में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुल 2,547 लोगों की मौत हुई है, जबकि इसके पिछले वर्ष यानी 2023-24 में यह आंकड़ा 2,140 था. इन आपदाओं में सबसे विकराल रूप डूबने की घटनाओं ने लिया है, जिनसे अकेले 2,039 लोगों की जान चली गई.
इसके अलावा आकाशीय बिजली (वज्रपात) का कहर भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. वर्ष 2024-25 में वज्रपात की चपेट में आने से राज्य में 305 लोगों की मौत हुई और 29 लोग बुरी तरह झुलस गए, जबकि पिछले वर्ष आकाशीय मौत का यह आंकड़ा 242 था. आग लगने की जानलेवा घटनाओं में भी इजाफा हुआ है और इस दौरान 143 लोगों की मौत दर्ज की गई, जो पिछले साल से 25 अधिक है. वहीं, भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से भी मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई, जबकि पिछले साल लू से 12 लोगों की मौत हुई थी.
बिहार के दियारा और बाढ़ प्रभावित इलाकों में नदियां भले ही आवागमन का मुख्य साधन हों, लेकिन यहां खेती, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए रोजाना नावों पर सफर करने वाले आम लोग भगवान भरोसे जीने को मजबूर हैं.
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