टाटा ट्रस्ट्स की सत्ता के गलियारों में छिड़ी अंदरूनी जंग अब अदालत की दहलीज तक जा पहुँची है. देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने को नियंत्रित करने वाली इस संस्था में खड़े हुए इस घमासान ने टाटा समूह के भविष्य और नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में नोएल टाटा और उनके बेटे नेविल टाटा हैं, जिन्होंने एहतियाती कानूनी कदम के रूप में केविएट दाखिल की है.
नोएल टाटा वर्तमान में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं, जिन्हें उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में इस अहम पद की कमान सौंपी गई थी, जबकि उनके बेटे नेविल टाटा का नाम ट्रस्ट के प्रशासनिक मामलों और नियुक्तियों से जुड़े इस आंतरिक विवाद में सामने आया है.
इस बीच, किसी भी मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ कोई एकतरफा अंतरिम आदेश पारित न किए जाने के अनुरोध को लेकर मुंबई सिटी सिविल कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में केविएट दाखिल की गई है.
विवाद का मुख्य कारण
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के कामकाज, ट्रस्टियों के अधिकारों, फैसलों की प्रक्रिया और टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर मचे घमासान से जुड़ा है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के समक्ष आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं. उनका आरोप है कि एक परोपकारी संस्था होने के नाते सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट को टाटा संस के व्यावसायिक और रणनीतिक मामलों में सीधे दखल नहीं देना चाहिए, और उन्होंने नोएल टाटा को स्थायी ट्रस्टी बनाने, नेविल टाटा की नियुक्ति तथा ट्रस्ट के कारोबारी दखल पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के बाद टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के विकल्पों पर चर्चा शुरू हुई, जहां ट्रस्ट का एक धड़ा इसे गैर-सूचीबद्ध (नॉन लिस्टेड) बनाए रखने के पक्ष में है क्योंकि यह समूह के ऐतिहासिक ढांचे के अनुकूल है.
हाल ही में टाटा संस के बोर्ड में एन. चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल देने के प्रस्ताव पर मुहर लगी थी, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक नोएल टाटा ने इस पुनर्नियुक्ति का विरोध किया था जिससे अंदरूनी दूरियां खुलकर सामने आ गईं. चूंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए इस अंदरूनी कलह का असर केवल एक चैरिटेबल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे टाटा समूह की कॉर्पोरेट रणनीति और भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

